
नयी दिल्ली. देश में एकजुटता का संदेश देते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने एकता के लिए एकरूपता की जरूरत को नकारते हुए मंगलवार को कहा, ”विविधता में भी एकता है” और अलग विचारधारा रखना “कोई अपराध नहीं है.” नामी हस्तियों, विदेशी राजनयिकों और अन्य के समक्ष दिए गए एक महत्वपूर्ण संबोधन में भागवत ने कहा कि भारतीय, चाहे उनका धर्म कुछ भी हो, अपने पूर्वजों की सामान्य परंपराओं से बंधे हैं और “अखंड भारत” में 40,000 से अधिक वर्षों से उनका ”डीएनए” एक ही है.
उन्होंने कहा कि आरएसएस एकता के लिए एकरूपता को जरूरी नहीं मानता. उन्होंने आरएसएस के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित तीन दिवसीय सम्मेलन के उद्घाटन के अवसर पर अपने संबोधन में कहा, “सद्भावना से रहना हमारी संस्कृति है. ऐसा नहीं है कि एकता एकरूपता से आती है. विविधता में भी एकता है. विविधता, एकता का ही परिणाम है.” ऐसा प्रतीत होता है कि भागवत का संबोधन हिंदुत्ववादी संगठन के बारे में चिंताओं को दूर करने के उद्देश्य से था, जिस पर आलोचकों द्वारा अपने कथित अल्पसंख्यक-विरोधी पूर्वाग्रहों के ज.रिए विभाजनकारी भावनाएं भड़काने का आरोप लगाया गया है.
हालांकि मंगलवार का बयान कुछ हद तक उनके द्वारा अतीत में व्यक्त किए गए सौहार्दपूर्ण विचारों की पुनरावृत्ति है, लेकिन भाषण का समय और लक्षित श्रोतागण इसे और भी महत्वपूर्ण बना देते हैं. विज्ञान भवन में उपस्थित श्रोताओं में अमेरिका, यूरोपीय और एशियाई देशों सहित 25 देशों के राजदूत शामिल थे, जिनमें से कुछ लंबे समय से संघ के बारे में संदेह रखते रहे हैं. भागवत अगले महीने 75 वर्ष के हो जाएंगे. उन्होंने कहा कि आरएसएस उन सभी को हिंदू मानता है जो भूगोल और समान परंपराओं से एक साथ बंधे हैं, और राष्ट्र या “भारत माता” के प्रति निष्ठा रखते हैं.
उन्होंने हिंदुओं को भूगोल और परंपराओं की व्यापक रूपरेखा में परिभाषित किया और कहा कि कुछ लोग जानते हैं, लेकिन खुद को हिंदू नहीं मानते, जबकि कुछ अन्य इसे नहीं जानते. उन्होंने कहा, “हमारा डीएनए भी एक है…सद्भावना से रहना हमारी संस्कृति है.” आरएसएस के हिंदू राष्ट्र के विचार को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि इसका किसी सत्ता से कोई संबंध नहीं है और यह आस्था या संप्रदाय के आधार पर भेदभाव नहीं करता. उन्होंने कहा, “न्याय सबके लिए समान है. हिंदू राष्ट्र का मतलब किसी को बाहर करना नहीं है. इसका मतलब किसी का विरोध करना नहीं है.” राजनीतिक संदेश से सराबोर एक सूक्ष्म संदेश में भागवत ने कहा कि आरएसएस अपने से संबद्ध किसी भी संगठन को परोक्ष या अपरोक्ष से नियंत्रित नहीं करता है. उन्होंने कहा कि विभिन्न स्थानों पर काम करने वाले उसके स्वयंसेवक अपने कामकाज में स्वतंत्र और स्वायत्त हैं.
उन्होंने कहा कि संघ और स्वयंसेवकों के बीच अटूट बंधन है और वे अक्सर संगठन से सलाह-मशविरा करते हैं. भागवत ने कहा, “उन पर हमारा अनुसरण करने का कोई दबाव नहीं है. वे हमारी मान्यताओं को समझेंगे, लेकिन वे वही करेंगे जो उन्हें महसूस होगा, क्योंकि उन्हें सबको साथ लेकर चलना होता है, क्योंकि संगठन में हर कोई स्वयंसेवक नहीं होता.” उनकी यह टिप्पणी आरएसएस और भारतीय जनता पार्टी के बीच कुछ मुद्दों पर कथित मतभेदों के बीच आई है. भागवत ने कहा कि संघ पूरे समाज को एकजुट करने में विश्वास रखता है. आरएसएस प्रमुख ने कहा कि भारत आजादी के 75 वर्षों में वह वांछित दर्जा हासिल नहीं कर सका जो उसे मिलना चाहिए था. उन्होंने कहा कि आरएसएस का उद्देश्य देश को ”विश्वगुरु” बनाना है और दुनिया में भारत के योगदान का समय आ गया है.
आरएसएस के शताब्दी समारोह में सिंधिया, रामदेव, कंगना रनौत समेत कई हस्तियां शामिल हुईं
योग गुरु रामदेव, जनता दल (यूनाइटेड) नेता के सी त्यागी, अभिनेत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सांसद कंगना रनौत, तथा केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया एवं अनुप्रिया पटेल मंगलवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी समारोह में शामिल होने वाले गणमान्य व्यक्तियों में शामिल थे.
“100 वर्ष की संघ यात्रा : नए क्षितिज” विषय पर तीन दिवसीय कार्यक्रम यहां विज्ञान भवन में शुरू हुआ. व्याख्यान श्रृंखला के पहले दिन, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने भारत के भविष्य के लिए अपना दृष्टिकोण और उसे आकार देने में स्वयंसेवकों की भूमिका पर प्रकाश डाला. कार्यक्रम के तीसरे दिन, वह उपस्थित लोगों के प्रश्नों के उत्तर देंगे.
व्यापक जन संपर्क अभियान के तहत, आरएसएस ने अपने शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में देशभर में एक लाख से अधिक ‘हिंदू सम्मेलनों’ सहित कई कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई है जिसकी शुरुआत विजयादशमी के दिन नागपुर स्थित संगठन के मुख्यालय में भागवत के संबोधन से होगी. विजयादशमी इस वर्ष दो अक्टूबर को है. आरएसएस की योजना अपने शताब्दी वर्ष के दौरान देशव्यापी घर-घर जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित करने की भी है.



