
संभल/नयी दिल्ली. उत्तर प्रदेश के संभल जिले के नखासा थाना क्षेत्र में एक हिंदू महिला को कथित तौर पर ईसाई बनाने की कोशिश करने के आरोप में शुक्रवार को एक मिशनरी स्कूल की दो शिक्षिकाओं को हिरासत में ले लिया गया. पुलिस अधीक्षक चक्रेश मिश्रा ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि नखासा थाना क्षेत्र के सिरसा नाल गांव में पिछली 21 सितंबर को मिशनरी से संचालित सीडीएम जूनियर हाईस्कूल की शिक्षिकाओं-सिस्टर रोज मेरी और सिस्टर डीसा ने एक हिंदू परिवार के धर्मांतरण की कोशिश की. इस दौरान हिंदू देवी-देवताओं के चित्र को जलाया गया.
उन्होंने बताया कि धर्मांतरण की कोशिश का आरोप लगाने वाली सुनीता नामक महिला का पति ईसाई है. मिश्रा के मुताबिक, इस मामले में सुनीता की तहरीर पर मिशनरी स्कूल की सिस्टर रोज मेरी और सिस्टर डीसा के खिलाफ बृहस्पतिवार को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और अवैध धर्मांतरण रोधी कानून की सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उन्हें शुक्रवार को हिरासत में ले लिया गया.
उच्चतम न्यायालय ने जबरन धर्मांतरण के खिलाफ कार्रवाई संबंधी याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी किया
उच्चतम न्यायालय ने ‘‘डरा-धमकाकर’’ और ‘‘तोहफे एवं आर्थिक लाभ’’ देकर कपटपूर्वक कराए जाने वाले धर्मांतरण पर नियंत्रण के लिए कड़े कदम उठाने का अनुरोध करने वाली याचिका पर केंद्र एवं अन्य से शुक्रवार को जवाब मांगा. न्यायमूर्ति एम आर शाह और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की पीठ ने भारत संघ, गृह मंत्रालय और विधि एवं न्याय मंत्रालय को नोटिस जारी किए. शीर्ष अदालत ने पक्षकारों से 14 नवंबर तक अपना जवाब दाखिल करने को कहा.
शीर्ष अदालत अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय की ओर से दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें ‘‘डरा-धमकाकर, उपहार और आर्थिक लाभ की पेशकश करके छल से बहकाकर’’ कपटपूर्ण तरीके से कराए जाने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाने का केंद्र और राज्यों को निर्देश देने का आग्रह किया गया है. उपाध्याय ने याचिका में कहा कि यह एक राष्ट्रव्यापी समस्या है, जिससे तत्काल निपटे जाने की आवश्यकता है. याचिका में कहा गया, ‘‘इससे नागरिकों को बहुत नुकसान होता है, क्योंकि एक भी ऐसा जिला नहीं है, जहां हर संभव माध्यम का इस्तेमाल करके धर्मांतरण नहीं कराया जाता हो.’’’



