उत्तराखंड: चीता परियोजना अपेक्षा से अधिक सफलता के साथ प्रगति कर रही

देहरादून: दक्षिण अफ्रीका से भारत लाई गई मादा चीता ‘गामिनी’ अपने चार शावकों के साथ मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय पार्क में चार हजार वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र घूम-फिर कर देखी चुकी है और जल्द ही अपना खुद का एक इलाका (होम रेंज) तय कर लेगी जहां वह अपने बच्चों के साथ रहेगी। विशेषज्ञों ने कहा है कि देश में चीता परियोजना अपेक्षा से अधिक सफलता के साथ प्रगति कर रही है।

‘गामिनी’ का 4000 वर्ग किलोमीटर का यह विस्तृत ‘एक्सप्लोरेटरी फेज’ 194 दिनों में दर्ज किया गया जो भारत में एक तरह एक रिकॉर्ड है। विलुप्त होने के करीब 75 सालों बाद भारत में दोबारा बसाने के लिए एक विशेष परियोजना के तहत 2022-23 में नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से चीतों को लाया गया था। इन चीतों की निगरानी कर रहे देहरादून स्थित भारतीय वन्यजीव संस्थान के विशेषज्ञों का कहना है कि सभी चीते अपने आपको नयी परिस्थितियों में ढाल चुके हैं और अपना इलाका निर्धारित करने के लिए घूम-फिर कर जंगल का जायजा ले रहे हैं जिसे उनका खोजी चरण (एक्सप्लोरेटरी फेज) बताया जा रहा है।

विशेषज्ञों ने कहा कि ‘गामिनी’ समेत फिलहाल सभी चीते अपने ‘एक्सप्लोरेटरी फेज’ के अंतिम दौर में हैं। उन्होंने कहा कि धीरे-धीरे उनकी ‘एक्सप्लोरेटरी’ गतिविधियां कम हो रही हैं और जल्द ही उसे और कम करते हुए वे अपना खुद का वास क्षेत्र (होम रेंज) तय कर लेंगे। उन्होंने कहा कि इसका मतलब है कि परियोजना चीता तेजी से सफलता की ओर बढ़ रही है।

वैज्ञानिकों ने संस्थान में बुधवार को इस संबंध में अपनी नयी अध्ययन रिपोर्ट ‘स्टेप्स बीफोर द स्प्रिंट: इनीशियल मूवमेंट एंड हैबिटेट सलेक्शन आॅफ फ्री रेंंिजग चीता इन कूनो नेशनल पार्क, मध्य प्रदेश’ पेश की। अपनी रिपोर्ट पेश करते हुए संस्थान के वरिष्ठ प्रोजेक्ट एसोसियेट मौलिक सरकार ने कहा कि कूनो में चीतों के लिए शिकार के लिए जीवों की संख्या और विविधता अच्छी है जो धीरे-धीरे बढ़ रही है जबकि आसपास के गांवों में उनका आवागमन भी सुरक्षित है।

सरकार ने कहा, ‘‘चीतों के लिए कूनो का वातावरण और परिस्थितियां अफ्रीका के जंगलों से मिलती-जुलती हैं। कूनो में मौजूद घास के मैदान और जंगलों का मिश्रण उनके लिए पसंदीदा वास क्षेत्र है।’’ विशेषज्ञों के मुताबिक, हाल ही में गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य में कूनो से स्थानांतरित किए गए तीन चीते भी वहां अच्छी तरह से रह रहे हैं। वर्तमान में देश में कुल चीतों की संख्या 27 है जिनमें से 24 चीते कूनो राष्ट्रीय पार्क में हैं।

संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. बिलाल हबीब ने कहा कि चीता परियोजना की सफलता का आकलन करने के लिए कम से कम 20-25 वर्ष चाहिए लेकिन हम नि›ित रूप से कह सकते हैं कि यह तेजी से सफलता की ओर बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि हमारे देश में चीते अच्छे से प्रजनन कर रहे हैं और जितने चीते लाए गए थे, उससे भी अधिक उनके शावक हो गए हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘यह परियोजना बढि़या चल रही है। यह अपेक्षा से भी अधिक सफलता के साथ प्रगति कर रही है।’’ इन सभी चीतों की रेडियो कॉलर लगाकार चौबीसों घंटे संस्थान के विशेषज्ञों द्वारा लगातार निगरानी की जा रही है ताकि भारत में चीतों की दीर्घकालिक उपस्थिति बनाए रखने की योजना में खलल ना पड़े।

संस्थान के अध्ययन में चीतों के ‘एक्सप्लोरेटरी’ व्यवहार में उल्लेखनीय भिन्नता देखने को मिली है। मादा चीतों ने जंगल में 275-4,870 वर्ग किलोमीटर तक का क्षेत्र घूम-फिर के देखा। अध्ययन के मुताबिक, वयस्क नर चीतों ने उप वयस्क नर चीतों की तुलना में अपनी ‘एक्स्पलोरेटरी’ गतिविधियां छोट क्षेत्रों यानी करीब 1021 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल तक सीमित रखीं जबकि उप वयस्क नर चीतों ने औसतन 1735 वर्ग किलोमीटर तक का इलाका घूमा।

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