मतदाता डेटा विवाद: चुनाव विश्लेषक संजय कुमार के खिलाफ मामला दर्ज

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Wed, 20 Aug 2025 10:33 PM
मतदाता डेटा विवाद: चुनाव विश्लेषक संजय कुमार के खिलाफ मामला दर्ज

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नागपुर/नयी दिल्ली. नागपुर जिला पुलिस ने बुधवार को चुनाव विश्लेषक संजय कुमार के खिलाफ ”चुनाव के संबंध में झूठा बयान” देने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की. उन्होंने 2024 के आम चुनावों की तुलना में महाराष्ट्र चुनाव में दो विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या में वृद्धि का आरोप लगाया था.

कुमार की पोस्ट में दावा किया गया था कि 2024 के आम चुनाव की तुलना में दो विधानसभा सीट पर मतदाताओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो लगभग छह महीने के अंतराल पर हुए थे. बाद में उन्होंने मंगलवार को इसे हटा दिया और एक अन्य पोस्ट में माइक्रोब्लॉगिंग मंच पर ”गलत डेटा” पोस्ट करने के लिए माफी मांगी थी.

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि रामटेक के तहसीलदार की शिकायत पर कुमार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है. उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 175 (चुनाव के संबंध में झूठा बयान), 353 (1) बी (सार्वजनिक शरारत करने वाले बयान), 212 (लोक सेवक को गलत जानकारी प्रदान करना) और 340 के तहत मामला दर्ज किया गया.

सीएसडीएस मुखिया ने जानबूझकर महाराष्ट्र चुनाव से जुड़े गलत आंकड़े दिये : शिक्षा मंत्री प्रधान

शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने बुधवार को राज्यसभा में कहा कि ‘थिंक टैंक’ सीएसडीएस से संबद्ध एक महत्वपूर्ण व्यक्ति ने महाराष्ट्र चुनाव से जुड़े कुछ गलत आंकड़ों को जानबूझ कर और ‘निहित स्वार्थ’ के तहत सोशल मीडिया पर पोस्ट किया तथा विपक्ष विशेषकर कांग्रेस पार्टी ने इन गलत तथ्यों को आगे बढ़ाया.

शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने उच्च सदन में यह बात भारतीय प्रबंधन संस्थान (संशोधन) विधेयक, 2025 को चर्चा एवं पारित करने के लिए रखे जाने के दौरान कही. प्रधान जब इस विधेयक के बारे में सदन को जानकारी दे रहे थे, उसी दौरान विपक्षी सदस्य बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन परीक्षण (एसआईआर) पर चर्चा की अनुमति नहीं दिये जाने के विरोध में सदन से वाकऑट कर गये.
एसआईआर मुद्दे पर विपक्षी सदस्यों के लगातार हंगामे की ओर संकेत करते हुए प्रधान ने कहा कि ये सदस्य देश का अहित कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि संसद देश के लोगों के करों से चलती है.

प्रधान ने कहा कि ये लोग (विपक्षी सदस्य) किस बात को छिपाना चाहते हैं? उन्होंने कहा कि इन लोगों ने हाल में एक थिंक टैंक सीएसडीएस (सेंटर फॉर स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज) के एक तथ्य का हवाला दिया. उन्होंने कहा कि सीएसडीएस के एक महत्वपूर्ण व्यक्ति ने ‘निहित स्वार्थों’ के साथ महाराष्ट्र चुनाव से जुड़े कुछ आंकड़ों को सोशल मीडिया में पोस्ट किया. शिक्षा मंत्री ने दावा कि इन ‘महानुभाव ने संबंधित ‘आंकड़ों’ को जानबूझ कर पोस्ट किया ताकि देश में भ्रम फैलाया जा सके तथा जिसे विपक्ष विशेषकर कांग्रेस पार्टी वाले आगे बढ़ा रहे हैं. इस पर पीठासीन अध्यक्ष भुवनेश्वर कालिता ने उन्हें टोकते हुए कहा कि मंत्री को सिर्फ विधेयक पर बोलना चाहिए.

प्रधान ने कहा कि वह इस विषय को इसलिए उठा रहे हैं क्योंकि वह देश के शिक्षा मंत्रालय का दायित्व संभाल रहे हैं. उन्होंने कहा कि आज ही उन्हें समाचार पत्र में पढ़कर यह जानकारी मिली कि उनके मंत्रालय के तहत आने वाले आईसीएसएसआर (भारतीय सामाजिक अनुसंधान विकास परिषद) की ओर से उनको (सीएसडीएस) कुछ धन दिया गया. शिक्षा मंत्री ने कहा कि भारत सरकार का पैसा लेकर भारत की संवैधानिक व्यवस्था को चुनौती देना, उचित बात नहीं है. उन्होंने कहा कि आईसीएसएसआर ने इस मामले में कहा है कि वह कार्रवाई करेगा और उसने सीएसडीएस को नोटिस दिया है.

प्रधान ने कहा कि उस संस्था (सीएसडीएस) के मुखिया ने सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी है. उन्होंने कहा कि संस्था के मुखिया ने कहा है कि उसके तथ्य गलत हैं और इन्हीं तथ्यों को लेकर विपक्ष संसद को बाधित कर रहा है. गौरतलब है कि चुनाव विश्लेषक और ‘सीएसडीएस के प्रोफेसर संजय कुमार ने रविवार को ‘एक्स’ पर पिछले साल के महाराष्ट्र चुनावों से संबंधित दो विधानसभा सीटों के मतदाता आंकड़े साझा किए और मंगलवार को उसे हटा दिया. उन्होंने ‘माइक्रोब्लॉगिंग’ मंच पर गलत आंकड़े पोस्ट करने के लिए माफी मांगी. पोस्ट में दावा किया गया था कि राज्य के चुनावों में दो विधानसभा सीटों पर मतदाताओं की संख्या में 2024 के आम चुनावों की तुलना में उल्लेखनीय कमी आई है. दोनों चुनाव लगभग छह महीने के अंतराल पर हुए थे.

By Yogesh Kumar Sahu