हम सुनिश्चित करेंगे कि मुद्रास्फीति चार प्रतिशत के करीब आए: दास

मुंबई. वैश्विक स्तर पर जारी अनिश्चितता के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को कहा कि केंद्रीय बैंक यह सुनिश्चित करेगा कि अर्थव्यवस्था में ज्यादा उठा-पटक नहीं हो, आर्थिक वृद्धि पर नाममात्र असर पड़े तथा मुद्रास्फीति चार प्रतिशत के करीब आए.

दास ने यहां एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि खुदरा मुद्रास्फीति संभवत: अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच चुकी है और अगले महीने होने वाली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक में वित्त वर्ष 2022-23 में मुद्रास्फीति के 6.7 प्रतिशत पूर्वानुमान की समीक्षा की जाएगी.

दास ने कहा, “हमारी कोशिश होगी कि अर्थव्यवस्था में ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं आए और मुद्रास्फीति चार प्रतिशत के लक्ष्य के करीब हो. साथ ही आर्थिक वृद्धि में होने वाला नुकसान भी प्रबंध के दायरे में रहे.” उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के पहले अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर भारत बिना अधिक उतार-चढ़ाव के साथ पुनरूद्धार के रास्ते पर पहुंच चुका था. लेकिन बदले हुए हालात ने ंिजसों, कच्चे तेल के दाम बढ़ाकर नई चुनौतियां पैदा कर दीं. इसकी वजह से केंद्रीय बैंकों को मौद्रिक नीति में सख्ती बरतनी पड़ी और पूंजी की निकासी भी बढ़ गई. उन्होंने कहा कि यह सभी चीजें आरबीआई के नियंत्रण से बाहर की हैं.

उन्होंने कहा कि फिलहाल आरबीआई की प्राथमिकता का केंद्र मुद्रास्फीति पर नियंत्रण करना है और फिर वृद्धि का स्थान आता है.
दास ने यह बात ऐसे समय कही है जब रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण कच्चा तेल और ंिजसों के दाम में तेजी आई है. इससे महंगाई बढ़ने के साथ विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है.

इस मौके पर उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल उधारी देने वाली फर्मों को सिर्फ वही काम करने चाहिए जिसके लिए उन्हें लाइसेंस मिला है. उन्होंने कहा कि लाइसेंस प्रावधानों का उल्लंघन स्वीकार्य नहीं है. उन्होंने कहा, “अगर ये फर्में हमारी अनुमति के बगैर गैर-लाइसेंसी काम कर रही हैं तो यह स्वीकार्य नहीं है. यह लाइसेंंिसग जरूरतों से परे है और हम इस तरह के जोखिम की इजाजत नहीं दे सकते हैं.”

उभरते बाजारों, विकसित अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं की तुलना में रुपया अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में: दास

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को कहा कि उभरते बाजारों और विकसित अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं की तुलना में रुपया अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में है. गौरतलब है कि घरेलू मुद्रा कुछ दिन पहले ही 80 रुपये प्रति डॉलर के स्तर को पार कर गई थी. आरबीआई गवर्नर ने कहा कि केंद्रीय बैंक रुपये में तेज उतार-चढ़ाव और अस्थिरता को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करेगा. उन्होंने कहा कि आरबीआई के कदमों से रुपये के सुगम कारोबार में मदद मिली है.

दास ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक अमेरिकी डॉलर की आपूर्ति करके बाजार में नकदी की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित कर रहा है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आरबीआई ने रुपये के किसी विशेष स्तर का लक्ष्य तय नहीं किया है. आरबीआई गवर्नर ने कहा कि बिना जोखिम से बचाव वाले विदेशी मुद्रा की उधारी से परेशान होने की जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में ऐसे लेनदेन सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां कर रही हैं और सरकार जरूरत पड़ने पर इसमें हस्तक्षेप कर सकती है और मदद भी दे सकती है.

दास ने कहा कि लक्ष्य के अनुसार मुद्रास्फीति का स्तर बनाने रखने के लिये 2016 में अपनाए गए मौजूदा ढांचे ने बहुत अच्छा काम किया है और अर्थव्यवस्था तथा वित्तीय क्षेत्र के हित की खातिर यह जारी रहना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘‘तात्कालिक आवश्यकताओं के लिए हमें अपने लक्ष्य नहीं बदलने चाहिए.’’ बैंक आॅफ बड़ौदा के कार्यक्रम में दास ने यह भी कहा कि आयातीय वस्तुओं की मुद्रास्फीति एक बड़ी चुनौती है क्योंकि भारत जिसों का एक बड़ा आयातक है.

छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति के प्रमुख दास ने कहा कि उदार रूख को छोड़ने की प्रक्रिया अभी भी चल रही है और इसकी पुष्टि इस बात से होती है कि लगातार दो बार वृद्धि के बावजूद प्रमुख नीतिगत दर रेपो कोविड-पूर्व स्तर के नीचे बनी हुई है. दास ने कहा कि आगे जाकर बैंक की दुनिया प्रतिस्पर्धी होने के साथ-साथ सहयोगात्मक भी हो जाएगी. उन्होंने बताया डिजिटल माध्यम से ऋण देने के विषय पर आरबीआई जल्द ही नियमन लाएगा.

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