किरदार चुनते वक्त इस बारे में बिल्कुल भी नहीं सोचता कि लोग क्या कहेंगे : मनोज बाजपेयी

इंदौर. मशहूर अभिनेता मनोज बाजपेयी ने मंगलवार को कहा कि उन्हें अदाकारी को लेकर किसी बक्से में कैद होना पसंद नहीं है और किरदार चुनते वक्त वह इस बारे में बिल्कुल भी नहीं सोचते कि लोग क्या कहेंगे. बाजपेयी अपनी आगामी फिल्म ”भैयाजी” के प्रचार के लिए इंदौर आए थे. यह उनके करियर की 100वीं फिल्म है जिसमें वह मार-धाड़ वाले किरदार में नजर आएंगे.

बाजपेयी ने संवाददाताओं से कहा, ”आगे भी मेरी जो फिल्में आएंगी, वे पहले से अलग होंगी क्योंकि मुझे किसी बक्से में बंद होकर रहना पसंद नहीं है. मैं एक ही तरह के किरदारों से ऊब जाता हूं.” उन्होंने कहा, ”मुझे (अभिनेता के तौर पर) लगातार नयी चुनौतियों का सामना करते हुए खुद को बदलते रहना पसंद है. मेरा इस बात पर ज्यादा ध्यान रहता है कि एक अभिनेता के रूप में मेरा विकास हो रहा है या नहीं? लोग क्या कहेंगे, मैं इस बारे में थोड़ा कम सोचता हूं या सच बोलूं तो मैं इस बारे में बिल्कुल भी नहीं सोचता हूं.” यह पूछे जाने पर कि क्या पारिवारिक और सामाजिक कहानियों वाली फिल्मों के लिए दर्शकों की भीड़ सिनेमाघरों में लौटेगी, बाजपेयी ने कहा, ”आज के दौर में सबसे पहले जरूरी यह है कि दर्शक सिनेमाघरों में लौटें और पहले की तरह मिल-बैठकर फिल्मों का मजा लें. यह आज हर फिल्म निर्माता और हर कलाकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है.”

उन्होंने कहा, ”मैं मानता हूं कि किसी फिल्म के हर विभाग का पूरा आनंद बड़े परदे वाले सिनेमाघर में 100-150 लोगों के साथ बैठकर ही लिया जा सकता है, फिर फिल्म चाहे किसी भी तरह की हो.” मनोरंजन जगत में ओटीटी मंचों का जोर बढ.ने पर बाजपेयी ने कहा कि लोग इन दिनों मोबाइल फोन पर भी फिल्में देख रहे हैं, लेकिन फोन पर किसी फिल्म के हर कलात्मक पहलू का पूरा आनंद लिया जाना मुमकिन नहीं है. राजनीति में आने की संभावना के सवाल पर उन्होंने कहा कि सियासत की दुनिया उन्हें समझ नहीं आती, लेकिन वह हर पांच साल में मतदान की जिम्मेदारी जरूर निभाते हैं और इसके बाद मनोरंजन जगत में अपने काम में फिर से जुट जाते हैं.

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