क्या इंदौर ‘सबसे बड़ी जीत’ और ‘नोटा’ का नया रिकॉर्ड बनाएगा, ईवीएम देगी जवाब

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Mon, 03 Jun 2024 07:40 PM
क्या इंदौर ‘सबसे बड़ी जीत’ और ‘नोटा’ का नया रिकॉर्ड बनाएगा, ईवीएम देगी जवाब
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इंदौर. लोकसभा चुनाव की मंगलवार को होने वाली मतगणना से पहले, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इंदौर में 10 लाख से ज्यादा मतों के अंतर से “अब तक की सबसे बड़ी जीत” का भरोसा जताया है. उधर, कांग्रेस का दावा है कि इंदौर में ”नोटा” कम से कम दो लाख वोट हासिल करके नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड कायम करेगा.

इंदौर में कांग्रेस के घोषित प्रत्याशी अक्षय कांति बम ने पार्टी को तगड़ा झटका देते हुए नामांकन वापसी की आखिरी तारीख 29 अप्रैल को अपना पर्चा वापस ले लिया और वह इसके तुरंत बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए थे. नतीजन इस सीट के 72 साल के इतिहास में कांग्रेस पहली बार चुनावी दौड़ से बाहर हो गई. इसके बाद कांग्रेस ने स्थानीय मतदाताओं से अपील की कि वे इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) पर ”नोटा” (उपरोक्त में से कोई नहीं) का बटन दबाकर भाजपा को सबक सिखाएं.

जिला निर्वाचन कार्यालय के एक अधिकारी ने बताया कि इंदौर में 13 मई को हुए मतदान में कुल 25.27 लाख मतदाताओं में से 61.75 प्रतिशत लोगों ने वोट डाला. वैसे तो इस सीट पर कुल 14 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा, लेकिन राजनीति के स्थानीय समीकरणों के कारण मुख्य जंग इंदौर के निवर्तमान सांसद और मौजूदा भाजपा उम्मीदवार शंकर लालवानी और कांग्रेस सर्मिथत ”नोटा” के बीच रही.

लालवानी ने सोमवार को ”पीटीआई-भाषा” से कहा,”हमें पूरा भरोसा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हम इंदौर में 10 लाख से ज्यादा मतों के अंतर से अब तक की सबसे बड़ी जीत दर्ज करेंगे.” वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान लालवानी ने अपने नजदीकी प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस प्रत्याशी पंकज संघवी को 5.48 लाख वोट से हराया था. पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान इंदौर में 69.31 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था और 5,045 मतदाताओं ने ”नोटा” का विकल्प चुना था.

वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में गुजरात के नवसारी से भाजपा उम्मीदवार सीआर पाटिल ने कांग्रेस प्रत्याशी धर्मेश भाई भीम भाई पटेल को करीब 6.90 लाख वोट से हराया था. जीत का यह अंतर पिछले चुनाव में देश की सभी 543 लोकसभा सीट में सबसे ज्यादा था.
इससे पहले, भाजपा के दिवंगत नेता गोपीनाथ मुंडे की बेटी प्रीतम मुंडे अक्टूबर 2014 में महाराष्ट्र की बीड सीट पर हुए उपचुनाव में 6.96 लाख वोट के रिकॉर्ड अंतर से जीतकर लोकसभा पहुंची थीं. सड़क दुर्घटना में गोपीनाथ मुंडे की मृत्यु के चलते यह उपचुनाव कराया गया था.

मौजूदा लोकसभा चुनाव की मतगणना की पूर्व संध्या पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता शोभा ओझा ने दावा किया,”इंदौर में इस बार नोटा को कम से कम दो लाख वोट मिलेंगे. नोटा का यह राष्ट्रीय कीर्तिमान देश के राजनीतिक इतिहास में दर्ज होगा और भाजपा जैसे उन सभी सियासी दलों के लिए सबक होगा जो लोकतंत्र का गला घोंटते हैं.” उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद “नोटा” के बटन को सितंबर 2013 में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन में शामिल किया गया था. वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में “नोटा” को बिहार की गोपालगंज सीट पर सर्वाधिक वोट मिले थे. तब इस क्षेत्र के 51,660 मतदाताओं ने “नोटा” का विकल्प चुना था और “नोटा” को कुल मतों में से करीब पांच प्रतिशत वोट मिले थे.

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