राजीव गांधी की हत्या के दोषी संथन की मौत, शव श्रीलंका ले जाने की तैयारी

चेन्नई. पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के मामले में दोषी करार दिए गए संथन की दिल का दौरा पड़ने से बुधवार को मौत हो गयी. सरकार के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी. संथन को उच्चतम न्यायालय ने बाद में रिहा कर दिया था. संथन उर्फ टी. सुतेनदिराराजा (55) एक श्रीलंकाई नागरिक था और उन सात लोगों में से एक था जिसे 1991 में चेन्नई के समीप श्रीपेरुम्बदूर में पूर्व प्रधानमंत्री की हत्या के जुर्म में 20 वर्ष से ज्यादा की जेल की सजा काटने के बाद 2022 में उच्चतम न्यायालय ने रिहा कर दिया था.

राजीव गांधी गवर्नमेंट जनरल हॉस्पिटल के डीन ई थेरानिरजन ने बताया कि संथन की मौत सुबह सात बजकर 50 मिनट पर हुई. संथन का यकृत खराब था और उसका उपचार किया जा रहा था. थेरानिराजन ने संवाददाताओं से कहा कि संथन को बुधवार तड़के करीब चार बजे दिल का दौरा पड़ा, इसके बाद उसे सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) दिया गया और वेंटिलेटर पर रखा गया था.

उन्होंने कहा कि संथन पर उपचार का कोई असर नहीं हुआ और आज (बुधवार) सुबह सात बजकर 50 मिनट पर उसकी मौत हो गई.
डीन ने कहा कि संथन को 27 जनवरी को यकृत खराब होने के कारण तिरुचिरापल्ली के एक विशेष शिविर से यहां अस्पताल में भर्ती कराया गया था. संथन को रिहाई के बाद से तिरुचिरापल्ली के एक विशेष शिविर में रखा गया था. संथन के वकील एस. पुगाझेंथी ने कहा कि प्राधिकारियों ने पोस्टमार्टम के बाद शव सौंप दिया है और उसके शव को श्रीलंका ले जाने के लिए कदम उठाए गए हैं.

पुगाझेंथी ने पत्रकारों से कहा, ”वह अपनी मां से मिलना चाहता था लेकिन दुर्भाग्य से उसकी इस इच्छा को पूरा नहीं किया जा सका. अगर प्राधिकारी उसे श्रीलंका प्र्त्यियपत करने के उसके अनुरोध पर त्वरित कार्रवाई करते तो कम से कम संथन अपनी मां से मिल पाता.” यह पूछने पर कि संथन ने चिकित्सीय सलाह के बावजूद यकृत बायोप्सी कराने से इनकार क्यों कर दिया था, इस पर वकील ने कहा कि संथन चाहता था कि जाफना पहुंचने के बाद यह सर्जरी की जाए.

पुगाझेंथी ने संथन के बायोप्सी कराने से इनकार की डॉ. थेरानीराजन की पूर्व की टिप्पणी के संदर्भ में कहा, ”उसने कहा था कि अगर उसकी मां तथा करीबी सगे रिश्तेदार आसपास हो तो वह यह कराने में सुरक्षित महसूस करेगा. और मुझे लगता है कि उसका सोचना सही था. इसलिए मुझे यहां बायोप्सी से इनकार करने वाले दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करना पड़ा था.”

मरुमलार्ची द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एमडीएमके) महासचिव वाइको, विदुथलई चिरुथैगल काची (वीसीके) नेता टी. तिरुमावलवन और नाम तमीलार काची (एनटीके) के मुख्य संयोजक सीमन ने उच्चतम न्यायालय द्वारा रिहा किए गए मुरुगन, रॉबर्ट पयास और जयकुमार को केंद्र से शरणार्थी शिविर में न रखने बल्कि उन्हें उनके मनपसंद स्थान पर वापस भेजने का अनुरोध किया.

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