बूथ स्तर का डेटा अपलोड नहीं होने से पार्टियों को गड़बड़ी का संदेह: सिब्बल

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Thu, 23 May 2024 09:11 PM
बूथ स्तर का डेटा अपलोड नहीं होने से पार्टियों को गड़बड़ी का संदेह: सिब्बल
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नयी दिल्ली. राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने बृहस्पतिवार को कहा कि निर्वाचन आयोग ने अपनी वेबसाइट पर मतदान केंद्र-वार मतदान प्रतिशत के आंकड़े नहीं डाले हैं, जिससे राजनीतिक दलों को कुछ गड़बड़ होने का संदेह पैदा हो गया है. वरिष्ठ अधिवक्ता और पूर्व केंद्रीय मंत्री ने यह सवाल भी किया कि जब मतदान के अंत में फॉर्म 17सी में सभी विवरण पोलिंग एजेंट को दे दिए जाते हैं तो बूथ स्तर का डेटा डालने में क्या समस्या है? उन्होंने यह टिप्पणी ऐसे समय की है जब निर्वाचन आयोग ने उच्चतम न्यायालय से कहा है कि मतदान केंद्र-वार मतदान प्रतिशत डेटा को “अव्यवस्थित तरीके से जारी करने” और वेबसाइट पर पोस्ट करने से चुनावी मशीनरी में भ्रम की स्थिति पैदा हो जाएगी, जो इस समय लोकसभा चुनाव में व्यस्त है.

सिब्बल ने संवाददाताओं से कहा, ”निर्वाचन आयोग ने उच्चतम न्यायालय में एक हलफनामा दायर किया है जिसमें कहा गया है कि उसके पास फॉर्म 17सी अपलोड करने का कोई कानूनी आदेश नहीं है, जो एक मतदान केंद्र पर डाले गए वोटों का रिकॉर्ड है.” उनका कहना था, ”फॉर्म 17 सी पर पीठासीन अधिकारी द्वारा हस्ताक्षर किए जाते हैं और मतदान के अंत में पोलिंग एजेंट को दिया जाता है, जो डाले गए वोट की संख्या को दर्शाता है. सूचना सीधे निर्वाचन आयोग को भी भेजी जाती है. अब ऐसा क्यों होता है कि आयोग उस डेटा को वेबसाइट पर नहीं डालता? समस्या क्या है? आयोग अपनी वेबसाइट पर अंतिम आंकड़े तो डालता ही है ताकि यह पता चले कि कौन जीता है.” सिब्बल ने कहा कि राजनीतिक दलों को संदेह हो रहा है कि कुछ तो गड़बड़ है.

निर्वाचन आयोग का पर्दाफाश हुआ, सत्तापक्ष की तरफ झुकाव का मतलब लोकतंत्र खतरे में: कांग्रेस

कांग्रेस ने अपने अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को निर्वाचन आयोग के पत्र तथा मतदान केंद्र-वार मतदान प्रतिशत डेटा वेबसाइट पर डालने से आयोग के इनकार का हवाला देते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि इस संवैधानिक संस्था के कदम भर्त्सना योग्य हैं तथा इससे उसका पर्दाफाश होता है. पार्टी प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने यह भी कहा कि अगर निर्वाचन आयोग जैसी संस्था सत्तारूढ. पार्टी की तरफ इस तरह से झुक जाएगी तो इसका यह मतलब है कि लोकतंत्र खतरे में है.

निर्वाचन आयोग ने बुधवार को उच्चतम न्यायालय से कहा कि मतदान केंद्र-वार मतदान प्रतिशत डेटा को “बिना सोचे-समझे जारी करने” और वेबसाइट पर पोस्ट करने से चुनावी मशीनरी में भ्रम की स्थिति पैदा हो जाएगी, जो इस समय लोकसभा चुनाव में व्यस्त है.
आयोग ने कहा कि एक मतदान केंद्र में डाले गए वोटों की संख्या बताने वाले फॉर्म 17सी का विवरण सार्वजनिक नहीं किया जा सकता और और इससे पूरे चुनावी तंत्र में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो सकती है क्योंकि इससे तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ की संभावना बढ. जाती है.
साथ ही, निर्वाचन आयोग ने बुधवार को सत्तारूढ. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए उन्हें लोकसभा चुनाव में जाति, समुदाय, भाषा और धर्म के आधार पर प्रचार करने से बचने की नसीहत दी और कहा कि चुनावों में देश के सामाजिक-सांस्कृतिक परिवेश को नुकसान पहुंचाने की अनुमति नहीं दी सकती.

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