
नयी दिल्ली. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमलों की खबरों को लेकर सोमवार को चिंता प्रकट की और उम्मीद जताई कि मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार हिंदू, ईसाई और बौद्ध धर्म को मानने वाले लोगों की सुरक्षा व सम्मान सुनिश्चित करेगी.
उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी सभ्य समाज में धर्म, जाति, भाषा या पहचान के आधार पर भेदभाव, हिंसा और हमले अस्वीकार्य हैं.
बांग्लादेश में शेख हसीना के नेतृत्व वाली सरकार के अपदस्थ होने के बाद से वहां हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की घटनाएं हो रही हैं. प्रियंका गांधी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”पड़ोसी देश बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर लगातार हमलों की खबरें विचलित करने वाली हैं. किसी भी सभ्य समाज में धर्म, जाति, भाषा या पहचान के आधार पर भेदभाव, हिंसा और हमले अस्वीकार्य हैं.” प्रियंका ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि बांग्लादेश में जल्द हालात सामान्य होंगे और वहां की अंतरिम सरकार हिंदू, ईसाई और बौद्ध धर्म को मानने वाले लोगों की सुरक्षा व सम्मान सुनिश्चित करेगी.
सांप्रदायिकता से मुकाबले के लिए सीमाओं का भेद न हो : आईएमएसडी ने बांग्लादेश के हालात पर कहा
‘इंडियन मुस्लिम्स फॉर सेक्युलर डेमोक्रेसी’ (आईएमएसडी) ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदायों पर हमलों की कड़ी निंदा करते हुए सोमवार को कहा कि सांप्रदायिकता उपमहाद्वीप की समस्या है और इससे मुकाबला करने के लिए सीमाओं का भेद नहीं रखना चाहिए. आईएमएसडी ने एक बयान में भारतीय मुस्लिम संगठनों और व्यक्तियों से पड़ोसी देश में अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने की घटनाओं की कड़ी निंदा करने का भी आ”ान किया.
आईएमएसडी के इस बयान पर पूर्व राज्यसभा सदस्य शाबाना आज.मी, उनके पति एवं गीतकार जावेद अख्तर, डॉक्यूमेंट्री फिल्मकार आनंद पटवर्धन, फिल्म लेखक अंजुम राजाबली, वरिष्ठ पत्रकार अस्करी जैदी, रंगमंच एवं सामाजिक कार्यकर्ता नीलीमा शर्मा, लेखक डॉ राम पूनियानी व शम्स-उल-इस्लाम, सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ और सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी विभूति नारायण राय समेत 52 हस्तियों ने हस्ताक्षर किए हैं.
बयान में बांग्लादेश के अखबारों की खबरों के हवाले से कहा गया है कि 27 जिलों में हिंदू समुदाय और उनसे जुड़े प्रतिष्ठानों और पूजा स्थलों पर हमले किए गए और उनमें लूटपाट की गई. बांग्लादेश में नौकरियों में आरक्षण व्यवस्था के खिलाफ छात्रों के हिंसक प्रदर्शन के बीच पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना पांच अगस्त को देश छोड़कर चली गई थीं. इसके बाद से पड़ोसी देश में अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों को निशाना बनाया जा रहा है.
बयान में कहा गया है कि कुछ कट्टरपंथी इस्लामी समूह – जिनकी बांग्लादेश में कोई कमी नहीं है – अपने असहिष्णु एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं. इसमें यह भी कहा गया है कि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बांग्लादेश की अंतरिम सरकार की जिम्मेदारी है और उसे कानून का शासन बहाल करना चाहिए तथा शांति सुनिश्चित करनी चाहिए. बयान में कहा गया है कि अंतरिम सरकार हिंसा के शिकार हिंदू पीड़ितों को आश्वस्त करे कि उनके मंदिरों, घरों और व्यवसायों को हुए नुकसान के लिए उन्हें पूरा मुआवजा दिया जाएगा तथा हिंसा फैलाने वाले अपराधियों को इंसाफ के कटघरे में लाया जाएगा.



