
नयी दिल्ली/गुवाहाटी. असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा के ‘मियां मुस्लिम’ संबंधी बयान को लेकर राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने बुधवार को उनकी आलोचना की. शर्मा ने मंगलवार को राज्य विधानसभा में कहा था कि वह पक्षपात करेंगे और ‘मियां मुस्लिमों’ को असम में कब्जा नहीं करने देंगे.
वह नगांव में 14 साल की एक बच्ची से सामूहिक दुष्कर्म और उसकी हत्या की घटना की पृष्ठभूमि में राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति पर विपक्षी दलों के कार्य स्थगन प्रस्ताव के संबंध में विधानसभा में बोल रहे थे. सिब्बल ने कहा कि शर्मा का बयान ”विशुद्ध रूप से सांप्रदायिक जहर घोलने” वाला है और इस तरह की टिप्पणी पर चुप नहीं रहा जा सकता.
उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा, ”हिमंत (असम के मुख्यमंत्री) ने कहा है कि पक्ष लेंगे, मियां मुस्लिमों को पूरे असम पर कब्जा नहीं करने देंगे. मेरा पक्ष है: पूरी तरह सांप्रदायिक जहर घोलने वाला बयान. कार्रवाई होनी चाहिए. चुप्पी कोई जवाब नहीं है.” बांग्लाभाषी मुस्लिम समुदाय के लोगों के लिए ‘मियां’ शब्द का इस्तेमाल विरोध स्वरूप किया जाता रहा है और गैर-बांग्ला भाषी लोग आमतौर पर उन्हें बांग्लादेशी प्रवासी बताते हैं. पिछले कुछ साल में समुदाय से जुड़े कार्यकर्ताओं ने प्रतिरोध के रूप में इस शब्द का इस्तेमाल शुरू कर दिया है.
असम के विपक्षी दलों ने मुख्यमंत्री के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई
असम के विपक्षी दलों ने बुधवार को मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई जिसमें उन पर धर्म और जाति के आधार पर ‘शत्रुता को बढ़ावा देने’ का आरोप लगाया गया है. उन्होंने शर्मा पर आरोप लगाया कि वह एक विशिष्ट समुदाय को निशाना बनाकर सांप्रदायिक तनाव पैदा करने के प्रयास रहे हैं, जिससे राज्य में दंगे जैसी स्थिति पैदा हो सकती है. संयुक्त विपक्षी मंच असम (यूओएफए) के महासचिव लुरिनज्योति गोगोई द्वारा दिसपुर थाने में शिकायत दी गई. गोगोई के साथ मंच के अन्य दलों के नेता भी मौजूद थे. यूओएफए असम में 18 दलों का गठबंधन है.
मीडिया के साथ साझा की गई जानकारी में कहा गया, ”हम राज्य के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा के खिलाफ धर्म और जाति के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने की कोशिश करने के लिए यह प्राथमिकी दर्ज करा रहे हैं.” पुलिस ने बताया कि थाने के एक अधिकारी को शिकायत प्राप्त हुई है, लेकिन अभी तक कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है. धींग में 14 वर्षीय एक लड़की के साथ कथित सामूहिक बलात्कार की घटना का जिक्र करते हुए यूओएफए ने दावा किया कि शर्मा ”एक विशेष समुदाय को निशाना बनाकर सांप्रदायिक उन्माद भड़काने की कोशिश कर रहे हैं”.



