नेहरू-गांधी की विचारधारा, बाबासाहेब के सम्मान के लिए आख़िरी दम तक लड़ेंगे: खरगे

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Thu, 26 Dec 2024 07:41 PM
नेहरू-गांधी की विचारधारा, बाबासाहेब के सम्मान के लिए आख़िरी दम तक लड़ेंगे: खरगे

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बेलगावी. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर के कथित अपमान को लेकर बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर फिर निशाना साधा और कहा कि उनकी पार्टी महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू की विचारधारा तथा बाबासाहेब के सम्मान के लिए आखिरी दम तक लड़ेगी.

उन्होंने कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में यह भी कहा कि चुनावी प्रक्रिया में लोगों का विश्वास धीरे-धीरे कम होता जा रहा है क्योंकि निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं. कांग्रेस अध्यक्ष का यह भी कहना था कि वर्ष 2025 कांग्रेस के संगठन के सशक्तीकरण का साल होगा तथा सभी रिक्त पदों को भरा जाएगा और ‘उदयपुर’ के संकल्प को पूरी तरह से लागू किया जाएगा.

उन्होंने राज्यसभा में गृह मंत्री अमित शाह के भाषण का उल्लेख करते हुए कहा, ”हमने संसद सत्र में संविधान के ऊपर चर्चा के दौरान डाक्टर बाबासाहेब आंबेडकर के बारे में गृह मंत्री का घोर अपमानजनक बयान सुना. हमने आपत्ति दर्ज की, विरोध जताया, प्रदर्शन किया. अब तो पूरे देश में प्रदर्शन हो रहा है.” खरगे ने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार गलती मानने को तैयार नहीं है तथा अमित शाह से माफ.ी और इस्तीफ.ा लेना तो दूर, उलटा आपत्तिजनक बयान का समर्थन किया.

उन्होंने कहा, ”गृह मंत्री के बचाव में प्रधानमंत्री ने बयान जारी किया. राहुल गांधी पर झूठा मामला दर्ज करा दिया. ये है आज के हुक्मरान का संविधान और उसके निर्माता के प्रति नज़रिया. परन्तु हम किसी से डरनेवाले नहीं हैं, ना ही झुकने वाले हैं. हम नेहरू-गांधी की विचारधारा और बाबासाहेब के सम्मान के लिए आख.रिी दम तक लड़ेंगे.” कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ”भाजपा के लोग हमारे ऊपर झूठा आरोप लगाते हैं कि हमने बाबासाहेब का सम्मान नहीं किया. सब को मालूम है कि संसद में बाबासाहेब की मूर्ति 1967 में कांग्रेस ने लगवायी. मुझ जैसे हज.ारों कार्यकर्ताओं की मांग को मानते हुए इंदिरा जी के कार्यकाल में राष्ट्रपति डॉ. राधाकृष्णन जी ने संसद में मुख्य स्थान पर पहली बड़ी मूर्ति बाबासाहेब की ही स्थापित कराई. इसलिए मैं कहता हूं कि भाजपा-आरएसएस वाले झूठ बोलना बंद कर दें.”

उन्होंने कहा, ”प्रधानमंत्री जी जब पहली बार संसद चुनकर आए थे तो उन्होंने पुराने संसद (भवन) की सीढि.यों पर माथा टेका था जिसके बाद नए संसद (भवन) का निर्माण हो गया. हमें डर इस बात का है कि इस बार नए संसद भवन में शपथ लेने के पहले इन्होंने संविधान के सामने माथा टेका है.” उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल के लोगों के द्वारा संविधान की प्रस्तावना का अपमान किया जाता रहता है, संवैधानिक प्रावधानों और मूल्यों का आदर नहीं होता है.

खरगे ने दावा किया, ”संवैधानिक संस्थाओं को नियंत्रित किया जा रहा है, मिसाल के तौर पर भारतीय निर्वाचन आयोग को ही देखें, तो यही मालूम होता है कि इनके मन में संवैधानिक संस्थाओं के लिए कोई आदर नहीं है, ये सब पर कब्जा करना चाह्ते हैं. इसलिए हमें यह लड़ाई लगातार लड़नी पड़ेगी.” उनके मुताबिक, चिंता की बात यह है कि चुनावी प्रक्रिया में लोगों की आस्था धीरे – धीरे कम होती जा रही है क्योंकि आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं. खरगे ने कहा कि कुछ रोज. पहले निर्वाचन संचालन नियमों में बदलाव कर दिया गया ताकि अदालत ने जो जानकारी साझा करने का आदेश दिया था, उसे रोका जा सके.

उन्होंने सवाल किया कि आख.रि ऐसा क्या है जिसे छुपाने का प्रयास किया जा रहा है? खरगे ने दावा किया, ”कभी वोटरों का नाम मतदाता सूची से काटा जाता है. कभी उनको मत डालने से रोका जाता है. कभी वोटर सूची संख्या में अचानक वृद्धि हो जाती है. कभी मतदान के अंतिम समय में मत प्रतिशत अप्रत्याशित तरीके से बढ़ जाता है. ये कुछ सवाल उठते रहते हैं जिनका संतोषजनक जवाब नहीं मिलता.” उन्होंने न्यूतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी और कुछ अन्य मुद्दों को लेकर किसानों के आंदोलन का उल्लेख किया और कहा कि इस सरकार में अन्नदाता का दु?ख-दर्द समझने वाला कोई नहीं है.

खरगे ने पार्टी के संगठन को मजबूत बनाने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा, ”वर्ष 2025 हमारे संगठन-सशक्तीकरण का साल होगा. हम संगठन में सभी रिक्त पदों को भरेंगे. ‘उदयपुर संकल्प’ को पूरी तरह से लागू करेंगे. अपने संगठन को एआईसीसी से लेकर मंडल और बूथ तक चुनाव जीतने के लिये आवश्यक कौशल से सुसज्जित करेंगे.” उनका कहना था, ”हमें ऐसे लोग ढूंढ कर निकालना होगा, जो वैचारिक रूप से प्रतिबद्ध हैं, जो संविधान की रक्षा के लिए लड़ने को तैयार हैं, जो कांग्रेस पार्टी के ‘आइडिया ऑफ इंडिया’ में विश्वास रखते हैं. ऐसे लोगों को पार्टी से जोड़ना होगा. उन्हें मुख्यधारा में लाना होगा. उन्हें संगठन के कार्यों में शामिल करना होगा, जोड़ना होगा.” खरगे ने कहा कि केवल मेहनत ही काफी नहीं है, समयबद्ध ठोस रणनीति और दिशा जरूरी है, नयी शक्ति को मौका देने की जरूरत है और स्थानीय एवं नए नेतृत्व को भी उभारने की जरूरत है. उनका कहना था, ”पिछले 140 वर्षों की यात्रा में कांग्रेस ने बहुत उतार-चढाव देखे. पर कांग्रेस आज भी महात्मा गांधीजी के विचारों की रोशनी में उनके सिद्धांतों को सर्मिपत है और उसूलों पर कायम है.”

By Yogesh Kumar Sahu