दो विचारधाराओं के बीच लड़ाई में केवल कांग्रेस ही आरएसएस-भाजपा को हरा सकती है: राहुल

मोडासा. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को कहा कि गुजरात में पार्टी कार्यकर्ता भले ही “हतोत्साहित” दिख रहे हैं, लेकिन केवल उनकी पार्टी ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भाजपा को हरा सकती है. एक सप्ताह में गुजरात की अपनी दूसरी यात्रा के दौरान कांग्रेस सांसद ने राज्य में संगठन को नया रूप देने के लिए रोडमैप पेश किया और पार्टी के उन नेताओं को हटाने का वादा किया जो या तो नि्क्रिरय हैं या “भाजपा के लिए काम करते हैं.” उन्होंने कभी अपना गढ़ रहे गुजरात को अपनी पार्टी के लिए सबसे महत्वपूर्ण राज्य बताया और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) तथा 30 वर्षों से राज्य की सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को हराने का संकल्प व्यक्त किया.

गांधी गुजरात में संगठन को नया रूप देने के कांग्रेस के प्रयासों के तहत जिला इकाइयों को मजबूत करने की प्रायोगिक योजना शुरू करने के बाद अरवल्ली जिले के मोडासा शहर में बूथ स्तरीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे. गुजरात में 2027 के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं. एक एआईसीसी पर्यवेक्षक और चार राज्य पर्यवेक्षकों समेत पांच सदस्यों वाली एक समिति गुजरात में पार्टी की 41 जिला इकाइयों (आठ शहरों समेत) में से प्रत्येक के लिए नए प्रमुखों की नियुक्ति की प्रक्रिया की देखरेख करेगी, जिसकी शुरुआत अरवल्ली जिले से होगी.

अपने संबोधन में गांधी ने कार्यकर्ताओं से कई वादे किए जैसे कि जिला इकाइयों को अधिक शक्ति एवं धन उपलब्ध कराना, वरिष्ठ नेताओं-कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन का आकलन करना, जमीनी स्तर पर सक्रिय पदाधिकारियों को बढ़ावा देना और उन नेताओं को हटाना जो या तो नि्क्रिरय हैं या “भाजपा के लिए काम कर रहे हैं.” उन्होंने कहा, “यह विचारधाराओं की लड़ाई है. केवल दो ही पार्टियां हैं जिनकी विचारधाराएं हैं – एक भाजपा और दूसरी कांग्रेस. केवल कांग्रेस ही भाजपा और आरएसएस को हरा सकती है. गुजरात पार्टी के लिए सबसे महत्वपूर्ण राज्य है क्योंकि भाजपा की हार का रास्ता गुजरात से होकर जाता है.” गांधी ने उपस्थित लोगों से कहा, “एक तरह से, कांग्रेस गुजरात में अस्तित्व में आई क्योंकि पार्टी के दो महान नेता – महात्मा गांधी और सरदार पटेल – इसी राज्य से थे.” गांधी ने इस बात को स्वीकार किया कि गुजरात में पार्टी कार्यकर्ता ‘हताश’ हैं, क्योंकि कांग्रेस लगभग तीन दशकों से राज्य में सत्ता से बाहर है.
उन्होंने कहा कि भाजपा को हराना मुश्किल नहीं है.

उन्होंने कहा, “आपको लगता है कि यहां भाजपा को हराना मुश्किल है. लेकिन मैं यहां आपको यह बताने आया हूं कि भाजपा को हराना आसान है और हम निश्चित रूप से इसमें सफल होंगे. हमें पार्टी की कार्यप्रणाली में बस कुछ बदलाव की जरूरत है. स्थानीय नेताओं ने, नेताओं के बीच विनाशकारी प्रतिस्पर्धा और स्थानीय नेतृत्व से परामर्श किए बिना चुनाव टिकटों का बंटवारा जैसे कुछ मुद्दों को उजागर किया है.” लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष गांधी ने कांग्रेस नेताओं को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया – रेस के घोड़े, बारात के घोड़े और ‘लंगड़े घोड़े’.

उन्होंने कहा कि पार्टी गुजरात में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रही, क्योंकि रेस के घोड़ों को “शादियों में नचाया जाता है”, जबकि जो “नाचने” के लिए होते हैं, उन्हें दौड़ (चुनाव लड़ने) में हिस्सा लेने के लिए कहा जाता है. गांधी ने कहा, “उन्हें अलग करने का समय आ गया है. हम रेस के घोड़ों को (चुनावों में) दौड़ाएंगे और बारात के घोड़ों को (कोई काम नहीं देंगे) नचाएंगे. जिला इकाइयों को अहमदाबाद से नहीं, बल्कि जिलों से चलाया जाना चाहिए. इसीलिए हमने जिला अध्यक्षों को अधिक अधिकार देने की यह कवायद शुरू की है.” पांच सदस्यीय समिति प्रत्येक जिले में पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाकात करेगी और पांच-छह संभावित उम्मीदवारों के नामों का चयन करेगी, जिन्हें जिला अध्यक्ष बनाया जा सकता है. उन्होंने वादा किया कि चुने गए जिला अध्यक्ष बिना किसी हस्तक्षेप या “ऊपरी” निर्देश के जिला इकाई को चलाने के लिए निर्णय लेंगे. गांधी ने कहा कि विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों के चयन में जिला अध्यक्षों की भूमिका अधिक होगी.

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा, “पार्टी संगठन और चुनाव उम्मीदवारों के बीच संबंध होना चाहिए. कई बार चुनाव जीतने के बाद विधायक संगठन की चिंता नहीं करते, जिसने उनकी जीत में अहम भूमिका निभाई थी. अब संगठन ही उम्मीदवारों का चयन करेगा. उम्मीदवारों के बारे में ऊपर से कोई फैसला नहीं होगा.” गांधी ने एक नया दृष्टिकोण अपनाते हुए घोषणा की कि केवल उन पार्टी नेताओं को बढ़ावा दिया जाएगा जो लोगों से जुड़े रहते हैं और उनके मुद्दों को उठाते हैं, जबकि जो लोग नि्क्रिरय रहते हैं या केवल चुनावों के दौरान सक्रिय होते हैं उन्हें दरकिनार कर दिया जाएगा.

लोकसभा सदस्य ने कहा, “पार्टी जमीनी कार्यकर्ताओं से परामर्श के बाद ही निर्णय लेगी. हम नयी पीढ़ी और लोगों के बीच रहने वालों को बढ़ावा देना चाहते हैं. हमें उन लोगों की पहचान करने और उन्हें किनारे करने की भी जरूरत है जो भाजपा के लिए काम कर रहे हैं.” कार्यकर्ताओं से बातचीत के दौरान एक कार्यकर्ता ने गांधी से कहा कि कांग्रेस के नेता चुनाव से सिर्फ 10 दिन पहले सक्रिय होते हैं और फिर वे “गायब हो जाते हैं.” इस पर गांधी ने माना कि फिलहाल पार्टी अपने वरिष्ठ नेताओं के प्रदर्शन का आकलन नहीं करती.

उन्होंने कहा, “लेकिन अब हम इसकी शुरुआत करेंगे. हम पता लगाएंगे कि कोई नेता कितने बूथ जीतने में कामयाब रहा. इससे प्रतिस्पर्धा शुरू होगी. अगर हम गुजरात में सरकार बनाते हैं तो सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले जिला अध्यक्ष को मंत्री बनाया जाएगा. हम उन लोगों को सत्ता देंगे जो कांग्रेस को मजबूत कर सकते हैं.” गांधी ने संगठन में और अधिक महिलाओं को शामिल करने का वादा किया और कहा कि फिलहाल गुजरात में एक भी महिला जिला अध्यक्ष नहीं है.

एक कार्यकर्ता ने शिकायत की कि जमीनी स्तर पर संगठनात्मक कार्य के लिए निर्धारित धनराशि का उचित उपयोग नहीं किया जाता है, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें अपनी जेब से पैसा खर्च करना पड़ता है. गांधी ने जिला प्रमुखों से स्थानीय स्तर पर प्रयास करने और धन जुटाने का आग्रह किया. उन्होंने कहा, “आम तौर पर पार्टी किसी भी चुनाव से 3 से 4 महीने पहले उम्मीदवारों को धन देती है. अब हम एक कोष बनाएंगे और इसे जिला इकाई को देंगे.”

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