
नयी दिल्ली. राष्ट्रपति चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया आरंभ होने के साथ ही बुधवार को जहां विपक्षी दलों ने अपनी तरफ से चुनाव में संयुक्त उम्मीदवार उतारने के लिए कुछ नामों पर मंथन किया वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर से भी इस मुद्दे पर सहमति बनाने के लिए कुछ सहयोगी दलों के साथ ही कुछ प्रमुख विपक्षी नेताओं और कुछ गैर-राजग व गैर-संप्रग दलों के नेताओं से बातचीत की गई.
विचार-विमर्श की इस प्रक्रिया के तहत रक्षा मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता राजनाथ ंिसह ने कांग्रेस नेता व राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी, बीजू जनता दल (बीजद) अध्यक्ष व ओड़िशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव से बात की. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक ंिसह ने जनता दल (यूनाईटेड) के नेता और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की मुखिया मायावती और वाईएसआर कांग्रेस नेता जगन मोहन रेड्डी से भी फोन पर बात की.
ंिसह ने कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, बीजद और सपा सहित अन्य विपक्षी दलों से अपनी बात के दौरान उम्मीदवार को लेकर उनकी प्राथमिकता जाननी चाही जबकि विपक्षी नेताओं ने ंिसह से भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की ओर से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार का नाम जानना चाहा.
इत्तेफाक से खड़गे, बनर्जी, पवार और यादव, ममता बनर्जी द्वारा संयुक्त विपक्ष की ओर से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के नाम पर सहमति बनाने के लिए राजधानी दिल्ली में बुधवार को बुलाई गई बैठक का हिस्सा थे. इस बैठक में कई दलों के नेताओं ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) प्रमुख शरद पवार से संयुक्त विपक्ष की ओर से राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनने का अनुरोध किया लेकिन उन्होंने एक बार फिर इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया.
सूत्रों के मुताबिक पवार द्वारा प्रस्ताव को ठुकराए जाने के बाद विपक्ष के संभावित उम्मीदवार के रूप में वरिष्ठ नेता फारूक अब्दुल्ला और पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल गोपाल कृष्ण गांधी के नाम भी सामने आएं. भाजपा ने गत रविवार को राजनाथ ंिसह और पार्टी अध्यक्ष जे पी नड्डा को राष्ट्रपति चुनाव के लिए विपक्ष सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ विचार-विमर्श करने के लिए अधिकृत किया था. भाजपा सूत्रों ने कहा कि पार्टी अध्यक्ष नड्डा भी उममीदवार के नाम पर सहमति बनाने के प्रयास के तहत विभिन्न दलों के नेताओं से चर्चा करेंगे.
वर्ष 2017 में हुए राष्ट्रपति चुनाव के दौरान विपक्षी दलों ने भाजपा पर अंतिम समय में उनसे संपर्क करने का आरोप लगाया था, क्योंकि उसने पहले ही राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में रामनाथ कोंिवद के नाम को अंतिम रूप दे दिया था. विपक्ष ने मीरा कुमार को चुनाव मैदान में उतारा था जो कोंिवद से हार गई थीं. राष्ट्रपति रामनाथ कोंिवद का कार्यकाल 24 जुलाई को समाप्त हो रहा है. राष्ट्रपति चुनाव 18 जुलाई को होगा. मतगणना 21 जुलाई को होगी.
चुनाव के लिए मतदाताओं की कुल संख्या 4,809 है, जिसमें 776 सांसद और 4,033 विधायक होंगे. राष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान संसद और राज्य विधानसभाओं के परिसर में होगा, जबकि राज्यसभा के महासचिव रिर्टिनंग आॅफिसर होंगे. आम तौर पर, सांसद संसद में और विधायक अपने-अपने राज्य की विधानसभा में मतदान करते हैं.
राष्ट्रपति का चुनाव निर्वाचक मंडल के सदस्यों द्वारा किया जाता है जिसमें संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य और दिल्ली तथा केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी सहित सभी राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य होते हैं. राज्यसभा और लोकसभा या राज्यों की विधानसभाओं के मनोनीत सदस्य निर्वाचक मंडल में शामिल होने के पात्र नहीं हैं, इसलिए, वे चुनाव में भाग लेने के हकदार नहीं होते. इसी तरह, विधान परिषदों के सदस्य भी राष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदाता नहीं होते हैं.
विपक्षी दलों की बैठक में प्रमुख क्षेत्रीय दलों की अनुपस्थिति से भाजपा को मिली राहत
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी द्वारा संयुक्त विपक्ष की ओर से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के नाम पर सहमति बनाने के लिए राजधानी दिल्ली में बुधवार को बुलाई गई बैठक में बीजू जनता दल (बीजद), तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) और आम आदमी पार्टी (आप) जैसे प्रमुख क्षेत्रीय दलों की अनुपस्थिति से सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राहत की सांस ली है.
भाजपा नेताओं का मानना है कि इन दलों की अनुपस्थिति ने विपक्षी खेमे की खामियों और दूसरों पर हावी होने की उनकी आदत को रेखांकित किया है. ओड़िशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के नेतृत्व वाले बीजद ने पूर्व में कई मुद्दों पर विपक्षी खेमे से दूरी बनाते हुए भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का साथ दिया है. विपक्षी दलों की बैठक से आप और टीआरएस की गैरमौजूदगी अहम है क्योंकि दोनों ही दल भाजपा के प्रखर आलोचक रहे हैं और पूर्व में कई अवसरों पर उन्होंने केंद्र की सत्ताधारी पार्टी के खिलाफ विपक्षी एकजुटता की वकालत की है.
राष्ट्रपति चुनाव के निर्वाचक मंडल में सत्तारूढ़ राजग के पास लगभग 48 प्रतिशत वोट हैं. भाजपा को बीजद आॅल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) और युवजन श्रमिक रायथू कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) जैसे दलों का समर्थन मिलने की उम्मीद है. ऐसा होता है तो उसके उम्मीदवार की राष्ट्रपति चुनाव में जीत सुनिश्चित हो सकती है. वाईएसआर कांग्रेस आंध्र प्रदेश में सत्ता में है और संसद में उसके सदस्यों की संख्या भी अच्छी खासी है.
बीजद की तरह वाईएसआर कांग्रेस ने भी विपक्षी खेमे की बैठक से दूरी बनाई है और संसद व उसके बाहर कई मुद्दों पर उसने केंद्र सरकार का समर्थन किया है. विपक्षी दलों की बैठक का परिहास उड़ाते हुए भाजपा प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कई विपक्षी नेता एक दूसरे पर हावी होने के प्रयासों के तहत कई प्रकार की गतिविधियां करते रहते हैं.
उन्होंने कहा, ‘‘यह बैठक विपक्ष के अंदर कौन अपना कद बड़ा स्थापित करके दिखा दे, किसी भी मौके का उपयोग करके… यह उसकी अभिव्यक्ति ज्यादा नजर आती है.’’ भाजपा की नजर आप और टीआरएस के रुख पर भी है क्योंकि दोनों ही दलों की अपनी-अपनी राष्ट्रीय राजनीतिक महत्वकांक्षाएं पिछले कुछ दिनों में सामने आई हैं. भाजपा को लगता है कि इसके मद्देनजर वे किसी का समर्थन करने की बजाय मतदान से दूरी बनाना पसंद करेंगे.
गुजरात और हिमाचल प्रदेश में भाजपा विरोधी माहौल का फायदा उठाने में लगे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरंिवद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आप कांग्रेस और अन्य विपक्षी खेमे के साथ खड़ी होनी नहीं चाहेगी जबकि टीआरएस भी कांग्रेस की मुखालफत करती रही है. विपक्षी दलों की बैठक में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा), द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक), राष्ट्रीय जनता दल (राजद), शिवसेना, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), भाकपा-एमएल, नेशनल कांफ्रेंस(नेकां), पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) जद(सेक्युलर), रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी), आईयूएएमएल, राष्ट्रीय लोकदल और झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता शरीक हुए.
इस बैठक में बुधवार को कई दलों के नेताओं ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) प्रमुख शरद पवार को संयुक्त विपक्ष की ओर से राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनने का अनुरोध किया लेकिन उन्होंने एक बार फिर इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया. इस बीच, आगामी राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवार के नाम पर सहमति बनाने के लिए भाजपा ने भी विचार-विमर्श की प्रक्रिया शुरू कर दी. इसके तहत रक्षा मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता राजनाथ ंिसह ने आज कांग्रेस नेता व राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष खड़गे, बनर्जी और समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव से बात की.
भाजपा ने गत रविवार को राजनाथ ंिसह और पार्टी अध्यक्ष जे पी नड्डा को राष्ट्रपति चुनाव के लिए विपक्ष सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ विचार-विमर्श करने के लिए अधिकृत किया था. राजनाथ ंिसह ने खड़गे, बनर्जी और यादव सहित कुछ अन्य दलों के नेताओं से भी फोन पर बात की. सूत्रों के मुताबिक रक्षा मंत्री ने जनता दल (यूनाईटेड) के नेता और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ ही बीजू जनता दल (बीजद) सुप्रीमो व ओड़िशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक से भी राष्ट्रपति चुनाव के सिलसिले में फोन पर चर्चा की.
सूत्रों के मुताबिक पवार द्वारा प्रस्ताव को ठुकराए जाने के बाद विपक्ष के संभावित उम्मीदवार के रूप में वरिष्ठ नेता फारूक अब्दुल्ला और पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल गोपाल कृष्ण गांधी के नाम भी सामने आएं. गांधी 2017 के उपराष्ट्रपति चुनाव में संयुक्त विपक्ष की ओर से उम्मीदवार थे लेकिन उन्हें भाजपा के वरिष्ठ नेता एम वेंकैया नायडू के हाथों पराजय का सामना करना पड़ा था. इसके बावजूद वह बीजद और जनता दल (यूनाईटेड) का समर्थन हासिल करने में सफल रहे थे. हालांकि इन दोनों दलों ने राष्ट्रपति चुनाव में राजग के उम्मीदवार रामनाथ कोंिवद का समर्थन किया था.
नीतीश कुमार की जदयू ने जब पिछले उपराष्ट्रपति चुनाव में गांधी को समर्थन करने की घोषणा की थी तब वह विपक्षी खेमे में थे. बाद में राजग में लौटने के बाद भी वह गांधी को समर्थन के फैसले पर अड़िग रहे. चुनाव के लिए मतदाताओं की कुल संख्या 4,809 है, जिसमें 776 सांसद और 4,033 विधायक होंगे. राष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान संसद और राज्य विधानसभाओं के परिसर में होगा, जबकि राज्यसभा के महासचिव रिर्टिनंग आॅफिसर होंगे. आम तौर पर, सांसद संसद में और विधायक अपने-अपने राज्य की विधानसभा में मतदान करते हैं.
राष्ट्रपति का चुनाव निर्वाचक मंडल के सदस्यों द्वारा किया जाता है जिसमें संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य और दिल्ली तथा केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी सहित सभी राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य होते हैं. राज्यसभा और लोकसभा या राज्यों की विधानसभाओं के मनोनीत सदस्य निर्वाचक मंडल में शामिल होने के पात्र नहीं हैं, इसलिए, वे चुनाव में भाग लेने के हकदार नहीं होते. इसी तरह, विधान परिषदों के सदस्य भी राष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदाता नहीं होते हैं.



