निर्वाचन आयोग हमेशा मोदी सरकार के हाथों की ‘कठपुतली’ रहा है: कपिल सिब्बल

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Sun, 13 Jul 2025 07:34 PM
निर्वाचन आयोग हमेशा मोदी सरकार के हाथों की ‘कठपुतली’ रहा है: कपिल सिब्बल
ऑडियो सुनें

नयी दिल्ली. राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने आरोप लगाया है कि निर्वाचन आयोग हमेशा से मोदी सरकार के हाथों की ”कठपुतली” रहा है. उन्होंने दावा किया कि बिहार में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण एक ”असंवैधानिक” कदम है, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बहुसंख्यकवादी सरकारें सत्ता में बनी रहें.

पूर्व कानून मंत्री ने ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ साक्षात्कार में यह भी आरोप लगाया कि प्रत्येक निर्वाचन आयुक्त ”इस सरकार के साथ मिलीभगत करने” में एक-दूसरे से आगे रहता है. बिहार में मतदाता सूची के जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग (ईसी) के पास नागरिकता के मुद्दों पर फैसला करने का अधिकार नहीं है.

निर्वाचन आयोग का कहना है कि 22 वर्षों के बाद हो रहे इस पुनरीक्षण से मतदाता सूची से अपात्र लोगों, ‘डुप्लिकेट’ प्रविष्टियों को हटाया जाएगा तथा कानून के अनुसार मतदान के पात्र लोगों को इसमें शामिल किया जाएगा. एसआईआर को लेकर निर्वाचन आयोग पर विपक्ष के हमले के बारे में पूछे जाने पर सिब्बल ने कहा, ”जब से यह सरकार सत्ता में आई है, तब से यह (निर्वाचन आयोग) लंबे समय से सरकार के हाथों की कठपुतली रहा है.” उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग के आचरण के बारे में जितना कम कहा जाए उतना ही बेहतर है.

एसआईआर पर उन्होंने कहा, ”मेरे अनुसार यह पूरी तरह से असंवैधानिक प्रक्रिया है. आयोग के पास नागरिकता के मुद्दों पर निर्णय लेने का अधिकार नहीं है और वह भी एक ब्लॉक स्तर के अधिकारी द्वारा.” वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा, ”मैं कहता रहा हूं कि वे (भाजपा) किसी भी तरह चुनाव जीतने के लिए हरसंभव हथकंडा अपनाते हैं. दरअसल, विशेष गहन पुनरीक्षण की यह पूरी प्रक्रिया आने वाले समय में बहुसंख्यकवादी सरकारों को बनाए रखने की प्रक्रिया है.”

उन्होंने कहा, ”यही मंशा है क्योंकि अगर आप गरीब लोगों, हाशिए पर पड़े लोगों, आदिवासियों के नाम हटा देंगे, तो आप यह सुनिश्चित कर देंगे कि बहुसंख्यकवादी पार्टी हमेशा जीते. इसलिए यह कवायद यही सुनिश्चित करने का एक और तरीका है तथा यह बहुत चिंताजनक है.” सिब्बल ने कहा कि उन्होंने हमेशा कहा है कि उन्हें निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता पर बिल्कुल भी विश्वास नहीं है, क्योंकि इस संस्था ने वह स्वतंत्रता प्रर्दिशत नहीं की है जिसकी उससे अपेक्षा की जाती है.

उच्चतम न्यायालय के अंतरिम आदेश पर सिब्बल ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और कहा कि वह इस मामले में वकील हैं.
उन्होंने कहा, ”उम्मीद है कि अदालत ने जो कुछ भी कहा है, निर्वाचन आयोग उसे ध्यान में रखेगा ताकि यह विवाद आगे न बढ़े.” संसद के आगामी मानसून सत्र का उल्लेख करते हुए सिब्बल ने कहा कि एसआईआर का मुद्दा आज चर्चा में आए किसी भी अन्य मुद्दे से अधिक महत्वपूर्ण है.

उन्होंने यह भी कहा कि महाराष्ट्र का मुद्दा भी बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि ”निर्वाचन आयोग अभी तक यह स्पष्ट नहीं कर पाया है कि केवल उन्हीं निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या में अचानक वृद्धि कैसे हुई, जहां भाजपा जीती है.” आगामी मानसून सत्र के दौरान उठाए जाने वाले मुद्दों पर सिब्बल ने कहा कि ऐसे कई मुद्दे हैं लेकिन समस्या यह है कि ”वे हमें कभी समय नहीं देते हैं.”

सिब्बल ने कहा, ”वे कभी भी चर्चा की अनुमति नहीं देते हैं, चाहे वह विदेश नीति के बारे में हो या आतंकवादी गतिविधियों के जारी रहने के बारे में हो या अंतरराष्ट्रीय समुदाय में भारत के अलग-थलग पड़ने के बारे में हो या 2014 के बाद से चार गुना बढ़ चुके भ्रष्टाचार के स्तर के बारे में हो या उन राज्यों के खिलाफ भेदभाव के बारे में हो जो केंद्र में सत्तारूढ़ राजनीतिक दल द्वारा शासित नहीं हैं या इस देश के संघीय ढांचे को धीरे-धीरे खत्म किये जाने के बारे हो.” सिब्बल की यह टिप्पणी उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्वाचन आयोग को बिहार में एसआईआर के दौरान आधार, मतदाता पहचान पत्र और राशन कार्ड को वैध दस्तावेज मानने के निर्देश देने के कुछ दिन बाद आई है. बिहार में इस साल के अंत में चुनाव होने हैं.

न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने एसआईआर को एक ”संवैधानिक आदेश” बताते हुए निर्वाचन आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी की दलीलों पर विचार किया और निर्वाचन आयोग को बिहार में यह प्रक्रिया जारी रखने की अनुमति दे दी थी. लोकतांत्रिक देश में मतदान के अधिकार को एक महत्वपूर्ण अधिकार बताते हुए इसने कहा था, ”हम एक संवैधानिक संस्था को वह करने से नहीं रोक सकते जो उसे करना चाहिए. साथ ही, हम उसे वह भी नहीं करने देंगे जो उसे नहीं करना चाहिए.” मामले की सुनवाई की आवश्यकता पर बल देते हुए पीठ ने इस कवायद को चुनौती देने वाली 10 से अधिक याचिकाओं को सुनवाई के वास्ते 28 जुलाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया था.

Breaking news. hindi news. Navabharat News. Latest news, in-depth analysis and opinion.
नवभारत न्यूज : छत्तीसगढ़, असम, ओडिशा, देश, दुनिया और राज्यों की खबरों का विश्वसनीय मंच.

लेखक के बारे में
By Yogesh Kumar Sahu