
नयी दिल्ली. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कुछ सदस्यों के बीच मंगलवार को उस वक्त नोकझोंक देखने को मिली जब सदन में प्रियंका ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान पहलगाम हमले के पीड़ितों के नाम का उल्लेख कर रही थीं.
सदन में प्रियंका गांधी ने जैसे ही पहलगाम हमले के 26 पीड़ितों का नाम पढ़ना शुरू किया तो सत्तापक्ष के कुछ सदस्यों ने ‘हिंदू-हिंदू’ कहा. इस पर कांग्रेस नेता ने कहा, ”भारतीय.” इसके बाद प्रियंका गांधी द्वारा पीड़ितों के नाम पढ़ने पर कांग्रेस और सहयोगी दलों के सदस्यों ने ‘भारतीय-भारतीय’ के नारे लगाए. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदस्यों से कहा कि वे नारे नहीं लगाएं.
मेरी मां के आंसुओं की बात हुई, पर यह नहीं बताया गया कि ऑपरेशन सिंदूर क्यों रुका: प्रियंका गांधी
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने मंगलवार को सरकार पर तीखा हमला बोला और कहा कि गृह मंत्री अमित शाह ने इतिहास का पाठ पढ.ाया तथा उनकी मां के आंसुओं तक की बात की, लेकिन यह नहीं बताया कि जब पाकिस्तान ने घुटने टेक दिए थे तो ऑपरेशन सिंदूर को अचानक क्यों रोक दिया गया. प्रियंका ने लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर विशेष चर्चा में भाग लेते हुए यह भी कहा कि उनकी मां सोनिया गांधी के आंसू तब गिरे थे जब उनके पति (राजीव गांधी) को आतंकवादियों ने शहीद किया था.
केरल के वायनाड से लोकसभा सदस्य ने कहा, ”गृह मंत्री जी ने कहा कि पाकिस्तान के पास शरण में आने के बजाय कोई चारा नहीं था. सवाल है कि आपने शरण दी क्यों? आतंकी हमारे देश में आकर लोगों को मार डालते हैं और आप उन्हें शरण दे रहे हैं. आपने इस बात का जवाब अपने एक भी भाषण में क्यों नहीं दिया?” प्रियंका गांधी ने कहा, ”जैसे ही शरण की बात उठी, गृह मंत्री इतिहास में चले गए. वह नेहरू जी, इंदिरा जी से लेकर मेरी मां के आंसुओं तक पहुंच गए. लेकिन इस सवाल का जवाब नहीं दिया कि जंग क्यों रुकी?”
उन्होंने कहा, ”सदन में मेरी मां के आंसुओं की बात की गई, मैं इसका जवाब देना चाहती हूं. मेरी मां के आंसू तब गिरे, जब उनके पति को आतंकवादियों ने शहीद किया, जब वह सिर्फ 44 साल की थीं. आज मैं इस सदन में खड़ी होकर (पहलगाम हमले में मारे गए) उन 26 लोगों की बात इसलिए कर रही हूं, क्योंकि मैं उनका दर्द जानती हूं और उसे महसूस करती हूं.” इससे पहले, सदन में गृह मंत्री ने कहा था, ”एक सुबह मैंने टीवी पर देखा कि सलमान खुर्शीद रोते-रोते सोनिया गांधी के घर से बाहर आ रहे थे और उन्होंने कहा कि बटला हाउस की घटना देखकर सोनिया जी फूट-फूटकर रो पड़ीं.” शाह ने कहा कि रोना था तो शहीद मोहनचंद्र शर्मा के लिए रोते, लेकिन इन्हें बटला हाउस के आतंकवादियों के लिए रोना आता है.
कांग्रेस के कुछ सदस्यों के शोर मचाने पर शाह ने कहा, ”मेरे पास खुर्शीद का वह साक्षात्कार सुरक्षित रखा है और आप कहें तो मैं उसे दिखाने के लिए तैयार हूं.” प्रियंका गांधी ने सदन में गृह मंत्री शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के भाषण का उल्लेख करते हुए कहा, ”रक्षा मंत्री का लंबा भाषण था. दूसरे भाषण भी सुने. मेरे मन में बार-बार यह बात आई कि सारी बातें कर लीं, इतिहास का पाठ पढ.ा दिया, लेकिन यह नहीं बताया गया कि 22 अप्रैल, 2025 को हमला कैसे हुआ और क्यों हुआ.” उन्होंने सवाल किया, ”बैसरन घाटी में सुरक्षा क्यों नहीं थी? क्या सरकार को पता नहीं था कि वहां इतने लोग आते हैं.” प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि लोग सरकार के भरोसे गए और इस सरकार ने उन्हें भगवान भरोसे छोड़ दिया.
उन्होंने सवाल किया, ”क्या लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की नहीं है?” प्रियंका गांधी ने कहा, ”उप राज्यपाल (मनोज सिन्हा) एक साक्षात्कार में कहते हैं कि बैसरन घाटी में बहुत ज्यादती हुई है, उसकी जिम्मेदारी मैं लेता हूं.” उन्होंने दावा किया कि टीआरएफ आतंकी संगठन 2019 में बना और कश्मीर घाटी में पांच साल के दौरान 25 आतंकी हमले किए गए. उन्होंने आरोप लगाया कि यह एजेंसियों की बड़ी विफलता है.
कांग्रेस सांसद ने कहा, ”सरकार ने एजेंसियों की विफलता की जिम्मेदारी ली? गुप्तचर ब्यूरो (आईबी) गृह मंत्री जी के कार्यक्षेत्र में आता है, क्या उन्होंने इस्तीफा दिया? इस्तीफा तो छोड़िए, क्या उन्होंने जिम्मेदारी भी ली?” प्रियंका गांधी ने सरकार पर पलटवार करते हुए कहा, ”आप इतिहास की बात करिये. मैं वर्तमान की बात करना चाहती हूं. आप 11 साल से सत्ता में हैं और अपनी जिम्मेदारी खुद लीजिए.” उन्होंने कहा, ”मुंबई हमले के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने इस्तीफा दिया था और गृह मंत्री ने इस्तीफा दिया था. उनकी इस देश की जनता के प्रति जवाबदेही थी.” प्रियंका गांधी ने कहा, ”उरी, पुलवामा और पठानकोट के समय राजनाथ जी गृह मंत्री थे. अमित शाह जी के गृह मंत्री रहते पहलगाम हमला हुआ, दिल्ली में दंगे हुए, मणिपुर में हिंसा हुई, (लेकिन) वह अपने पद पर बने हुए हैं.”
उन्होंने कहा, ”ऑपरेशन सिंदूर का श्रेय तो प्रधानमंत्री जी चाहते हैं. श्रेय लीजिए. सिर्फ श्रेय लेने से नेतृत्व नहीं होता, जिम्मेदारी भी लेनी पड़ती है.” प्रियंका गांधी ने कहा, ”रक्षा मंत्री ने कल कहा कि (ऑपरेशन सिंदूर के दौरान) हमारे बुनियादी ढांचे को नुकसान नहीं हुआ, तो जहाजों के बारे में बता दे. साफ-साफ बता दें. क्या हर्ज है.” उन्होंने दावा किया, ”यह सरकार हमेशा सवालों से बचने का प्रयास करती हैं. देशवासियों के लिए इनके दिल में कोई जगह नहीं. इनके लिए सब राजनीति है, सिर्फ ‘पीआर’ है. बहुत समय हो गया, आप प्रचार में लिप्त हैं, जनता को देख नहीं पा रहे हैं.” प्रियंका ने आरोप लगाया कि इस सरकार की राजनीतिक कमजोरी बेमिसाल है.
उन्होंने कहा, ”देश के इतिहास में पहली बार हुआ कि युद्ध रुक गया और इसका ऐलान अमेरिका के राष्ट्रपति करते हैं. यह हमारे प्रधानमंत्री की गैर-जिम्मेदारी का सबसे बड़ा प्रतीक है.” उन्होंने सरकार पर कूटनीतिक विफलता का भी आरोप लगाया. कांग्रेस सांसद ने अपने भाषण के आखिर में उन सभी लोगों के नाम पढ.े, जो 22 अप्रैल के पहलगाम हमले में मारे गए थे. प्रियंका गांधी ने जब पीड़ितों का नाम पढ.ना शुरू किया तो सत्तापक्ष की तरफ से कुछ सदस्यों ने ‘हिंदू-हिंदू’ बोलने लगे, इस पर कांग्रेस के सदस्यों ने ‘भारतीय-भारतीय’ बोलना शुरू किया. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदस्यों से कहा कि वे नारे नहीं लगाएं.



