एआई के बढ़ते प्रभाव से वैश्विक अर्थव्यवस्था में ‘के’ आकार की वृद्धि: मूडीज एनालिटिक्स

Author: Nandkishoryadav
UPDATED: Thu, 16 Jul 2026 03:02 PM
एआई के बढ़ते प्रभाव से वैश्विक अर्थव्यवस्था में ‘के’ आकार की वृद्धि: मूडीज एनालिटिक्स
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नयी दिल्ली: वैश्विक अर्थव्यवस्था में ‘के’ आकार की वृद्धि देखने को मिल रही है, जहां कृत्रिम मेधा (एआई) में तेजी कुछ देशों और उद्योगों को आगे बढ़ा रही है, जबकि अन्य पीछे छूट रहे हैं। मूडीज एनालिटिक्स ने बृहस्पतिवार को यह बात कही। ‘के’ आकार की वृद्धि एक ऐसी स्थिति है जहां मंदी या संकट के बाद अर्थव्यवस्था के अलग-अलग हिस्से अलग-अलग गति से आगे बढ़ते हैं। इसमें एक वर्ग तेजी से आगे बढ़ता है, जबकि दूसरा वर्ग नीचे गिरता जाता है।

मूडीज एनालिटिक्स ने अपनी वैश्विक आर्थिक परिदृश्य रिपोर्ट में कहा कि उसे उम्मीद है कि वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर 2026 में धीमी होकर 2.5 प्रतिशत रह जाएगी और 2027 में मामूली सुधार के साथ 2.8 प्रतिशत पर पहुंच सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, एआई की बढ़ती मांग ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को और अधिक गंभीर सुस्ती की चपेट में आने से बचा लिया है। हालांकि, भू-राजनीतिक जोखिमों, संपत्तियों के बढ़े हुए मूल्यांकन और वित्तीय बाजारों में अस्थिरता के कारण यह परिदृश्य धीमी वृद्धि से बदलकर सुस्ती में भी तब्दील हो सकता है।

मूडीज एनालिटिक्स ने कहा, “वैश्विक अर्थव्यवस्था दो अलग-अलग रफ्तार से चल रही है। एआई में आए उछाल के कारण कुछ क्षेत्रों में वृद्धि उम्मीद से बेहतर रही है, लेकिन जो अर्थव्यवस्थाएं और उद्योग इस एआई क्षेत्र से कम जुड़े हैं, उन्हें संघर्ष करना पड़ रहा है।” एजेंसी ने कहा कि एआई में तेजी से डेटा केंद्रों में निवेश बढ़ा है, एशिया की प्रौद्योगिकी आधारित अर्थव्यवस्थाओं के निर्यात में वृद्धि हुई है और दुनियाभर के शेयर बाजारों में कंपनियों के मूल्यांकन को बढ़ावा मिला है।

रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया संघर्ष से लेकर अमेरिका और उसके व्यापारिक साझेदारों के बीच तनाव तक भू-राजनीतिक घटनाक्रमों और व्यापार बाधाओं ने कीमतों तथा कारोबार करने की लागत को बढ़ा दिया है। मूडीज एनालिटिक्स ने कहा, ”इसका परिणाम एक ऐसी ‘के’ आकार की वैश्विक अर्थव्यवस्था के रूप में सामने आया है, जिसमें कुछ देश और उद्योग तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, जबकि अन्य पीछे रह गए हैं। 2026 में वृद्धि धीमी होगी, लेकिन इस साल की शुरूआत में लगाए गए अनुमान से कम।”

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