‘योगी आदित्यनाथ’ के जीवन पर आधारित फिल्म को प्रमाणपत्र नहीं देने को लेकर निर्माता अदालत पहुंचे

मुंबई. फिल्म निर्माताओं ने अपनी एक फिल्म (कथित तौर पर उत्तर प्रदेश के मौजूदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जीवन पर आधारित) को लेकर बंबई उच्च न्यायालय का रुख किया है और अनुमति प्रमाणपत्र नहीं देने के केंद्रीय फिल्म प्रमाणन  बोर्ड(सीबीएफसी) के फैसले को चुनौती दी है.

न्यायमूर्ति रेवती मोहिते डेरे और न्यायमूर्ति नीला गोखले की पीठ ने कहा कि वह शुक्रवार को याचिका पर सुनवाई करेगी, लेकिन साथ ही यह भी पूछा कि सीबीएफसी ने आवेदन क्यों खारिज कर दिए जबकि जिस उपन्यास से फिल्म प्रेरित है, वह आठ साल से सार्वजनिक रूप से मौजूद है. अगर पुस्तक पर कोई आपत्ति नहीं जताई गई, तो उससे प्रेरित फिल्म सार्वजनिक व्यवस्था को कैसे बिगाड़ सकती है? अदालत ने सीबीएफसी को नोटिस जारी कर जवाब मांगते हुए यह सवाल पूछा.

फिल्म निर्माता ‘सम्राट सिनेमैटिक्स’ का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता असीम नफड़े, सत्य आनंद और निखिल अराधे ने तर्क दिया कि सीबीएफसी ने फिल्म देखे बिना ही फिल्म, ट्रेलर और उसके गानों के लिए प्रमाणपत्र देने से जुड़े आवेदन को खारिज कर दिए.
निर्माताओं ने इस महीने की शुरुआत में उच्च न्यायालय का रुख किया था और सेंसर बोर्ड को उनके आवेदनों पर फैसला लेने का निर्देश देने की मांग की थी. जवाब में सीबीएफसी ने पिछले हफ्ते अदालत को आश्वासन दिया था कि वह दो दिनों के भीतर फैसला ले लेगा.
निर्माताओं ने अपनी नई याचिका में दावा किया है कि आश्वासन के बावजूद, बोर्ड ने अब जाकर यह फैसला लिया है. फिल्म ‘अजय: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ अ योगी’ एक अगस्त को रिलीज होने वाली है. यह किताब ‘द मॉन्क हू बिकेम चीफ मिनिस्टर’ से प्रेरित है, जो कथित तौर पर आदित्यनाथ के जीवन पर आधारित है.

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