
उत्तराखंड में यूसीसी में बदलाव: उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) में नए बदलाव किए गए हैं। इन बदलावों के तहत अब धोखाधड़ी से, बलपूर्वक या दबाव डालकर किसी के साथ सहवास करने वालों को सात साल की जेल और जुर्माना देना पड़ेगा।
विवाह और लिव-इन के नियम
अगर कोई व्यक्ति पहले से शादीशुदा है और धोखे से लिव-इन में रहता है, तो उसे भी सात साल की सजा और जुर्माना हो सकता है। लेकिन, यदि उसने लिव-इन रिलेशनशिप को खत्म कर दिया है या उसका साथी सात साल से अधिक समय से लापता है, तो ये प्रावधान लागू नहीं होंगे।
सामान्य बदलाव
- विवाह का पंजीकरण अब एक साल तक किया जा सकता है (पहले यह छह महीने का था)।
- विवाह, तलाक, लिव-इन, या उत्तराधिकार का रजिस्ट्रेशन रजिस्ट्रार जनरल की अनुमति से किया जाएगा।
- जुर्माने और दंड की प्रक्रिया को और सख्त किया गया है।
कानूनी धाराओं में बदलाव
- बल, दबाव या धोखाधड़ी से सहमति लेकर संबंध बनाने पर सात साल की जेल और जुर्माना।
- बिना कानूनी प्रक्रिया पूरी किए, शादीशुदा व्यक्ति यदि लिव-इन में रहता है और उसके साथी का पता नहीं है या सात साल से अधिक समय से लापता है, तो भी सजा का प्रावधान।
अतिरिक्त जानकारी
- नए कानून में कई तकनीकी और कानूनी खामियों को दूर किया गया है।
- विवाह, तलाक, लिव-इन या उत्तराधिकार से संबंधित रजिस्ट्रेशन की शक्ति रजिस्ट्रार जनरल को दी गई है।
- भू-राजस्व बकाए की तरह ही जुर्माने की वसूली भी की जाएगी।



