कर्नाटक: प्रमोदा देवी वाडियार ने चामुंडी पहाड़ी के स्वामित्व संबंधी बयान को ‘असंवेदनशील’ बताया

मैसुरु. मैसूरु के पूर्व राजघराने की प्रमोदा देवी वाडियार ने इस वर्ष दशहरा उत्सव को लेकर उठे विवादों पर “गहरी निराशा” व्यक्त करते हुए बृहस्पतिवार को उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के उस बयान को “असंवेदनशील” करार दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि चामुंडी पर्वत और वहां की देवी केवल हिंदुओं की संपत्ति नहीं है. चामुंडी पर्वत पर प्रसिद्ध चामुंडेश्वरी देवी मंदिर स्थित है.

शिवकुमार ने मंगलवार को कहा था कि चामुंडी पर्वत और देवी चामुंडेश्वरी हर धर्म के लोगों की हैं और यह केवल हिंदुओं की संपत्ति नहीं हैं. इस बयान पर विपक्षी भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की. उपमुख्यमंत्री ने यह बयान अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार विजेता बानू मुश्ताक को इस वर्ष 22 सितंबर को चामुंडी पहाड़ियों पर आयोजित होने वाले विश्व प्रसिद्ध ‘मैसुरु दशहरा-2025’ के उद्घाटन समारोह के लिए दिए गए सरकारी निमंत्रण के विरोध पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए दिया. वाडियार के पुत्र और मैसुरु से सांसद यदुवीर कृष्णदत्त चामराजा वाडियार ने बुधवार को शिवकुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि चामुंडी पहाड़ी हिंदुओं की है और यह हिंदुओं की संपत्ति है. यदुवीर, पूर्व राजपरिवार के वंशज भी हैं.

शिवकुमार ने प्रमोदा देवी वाडियार और यदुवीर कृष्णदत्त चामराजा वाडियार पर निशाना साधते हुए बृहस्पतिवार को कहा, “मैं जब भी तथ्यों के साथ बात करता हूं तो लोगों को ‘बर्दाश्त नहीं होता’ और मैं जो कुछ भी कहता हूं, उसमें खामियां निकाली जाती हैं.” उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा, “देखिए जब मैं तथ्यों के साथ बोलता हूं तो कुछ लोगों को बर्दाश्त नहीं होता फिर चाहे वह प्रमोदा देवी हों या यदुवीर या विधानसभा के अंदर. लोगों का एकमात्र काम है कि मैं जो कुछ भी कहता हूं उसमें खामियां निकालें फिर चाहे वह राजनेता हों, पत्रकार हों या कोई और. यही चल रहा है. बेहतर है कि न बोलें. अन्य नेता और पार्टी प्रवक्ता भी हैं. आप (पत्रकार) उनसे बात करें.”

प्रमोदा देवी वाडियार ने एक बयान में कर्नाटक सरकार द्वारा इस वर्ष प्रस्तावित दशहरा उत्सव को संपन्न कराने के तरीके और पवित्र चामुंडेश्वरी मंदिर को लेकर की जा रही राजनीति पर निराशा व्यक्त की. उन्होंने कहा, “इस वर्ष के नाडा हब्बा (राज्य उत्सव) या जनता दशहरा के उद्घाटन के लिए आमंत्रित गणमान्य व्यक्ति के चयन ने परस्पर विरोधी विचारों को जन्म दिया है. इन निर्णयों का बचाव करते हुए ‘चामुंडेश्वरी मंदिर हिंदुओं का नहीं है’ जैसे असंवेदनशील बयान अनावश्यक और टाले जा सकते थे.” प्रमोदा देवी वाडियार ने कहा कि अगर यह हिंदू मंदिर न होता तो इसे मुजराई विभाग के अंतर्गत कभी नहीं लाया जाता.

उन्होंने कहा, “हमारा मत है कि सरकारी दशहरा एक सांस्कृतिक उत्सव है. राज्य सरकार अपनी प्रकृति के अनुसार ऐसे उत्सव के आयोजन में धार्मिक शुचिता, संप्रदाय (परंपरा) या परम्परा (विरासत) का दावा नहीं कर सकती.” मैसुरु में दशहरा उत्सव 22 सितंबर से शुरू होगा और दो अक्टूबर को ‘विजयदशमी’ पर समाप्त होगा.

यदुवीर ने बुधवार को कहा कि यह ‘चौंकाने वाला’ है कि उपमुख्यमंत्री जैसे जिम्मेदार पद पर बैठे किसी व्यक्ति ने ऐसा बयान दिया है.
उन्होंने आरोप लगाया कि शिवकुमार शायद ‘संतुलन’ बनाने की कोशिश कर रहे हैं क्योंकि हाल ही में विधानसभा में राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ का प्रार्थना गीत गाने के लिए उन्हें अपनी ही कांग्रेस पार्टी के भीतर से आलोचना का सामना करना पड़ा था.

यदुवीर ने कहा, “पुराणों में उल्लेख है कि हजारों साल पहले ऋषि मार्कंडेय ने चामुंडी पहाड़ी पर तपस्या की थी और वहां दो मूर्तियां स्थापित की थीं. हमारे अपने प्रलेखित इतिहास में महाबलेश्वर मंदिर और चामुंडेश्वरी मंदिर का हजारों साल पुराना इतिहास है.” भाजपा की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र और मैसुरु से सांसद यदुवीर कृष्णदत्त चामराज वाडियार समेत कई नेताओं ने मुश्ताक से दशहरा का उद्घाटन करने की सहमति देने से पहले देवी चामुंडेश्वरी के प्रति अपनी श्रद्धा स्पष्ट करने को कहा.

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