
नयी दिल्ली/हैदराबाद. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच रविवार को मुलाकात के बाद कांग्रेस ने केंद्र पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि क्या ”न्यू नॉर्मल” (नयी सामान्य स्थिति) चीन की आक्रामकता और ”सरकार की कायरता” से परिभाषित किया जाना चाहिए.
कांग्रेस ने सवाल किया कि क्या प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार का चीन के साथ सुलह पर जोर देना वास्तव में उसकी क्षेत्रीय आक्रामकता को वैध ठहरा रहा है. मोदी ने तियानजिन में चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ अपनी बैठक में कहा कि भारत आपसी विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता के आधार पर चीन के साथ अपने संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है.
कांग्रेस महासचिव एवं संचार प्रभारी जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ”आज प्रधानमंत्री मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच हुई मुलाकात का आकलन निम्नलिखित संदर्भों में किया जाना चाहिए- जून 2020 में गलवान घाटी में चीनी आक्रामकता के चलते हमारे 20 सबसे बहादुर जवानों ने अपनी जान की कुर्बानी दी. इसके बावजूद, 19 जून 2020 को प्रधानमंत्री मोदी ने चीन को कायराना तरीके से (कुख्यात) क्लीन चिट दे दी.” उन्होंने कहा कि सेना प्रमुख ने लद्दाख में चीन के साथ सीमा पर यथास्थिति की पूर्ण बहाली की मांग की थी.
रमेश ने कहा, ”लेकिन इसे हासिल करने में विफल रहने के बावजूद मोदी सरकार ने चीन के साथ सुलह की दिशा में कदम बढ़ाए जिससे चीन की उस क्षेत्र में आक्रामकता को अप्रत्यक्ष रूप से वैधता मिल गई.” उन्होंने कहा कि चार जुलाई, 2025 को उप-सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के साथ चीन की ‘जुगलबंदी’ पर जोरदार और स्पष्ट रूप से बात की थी.
रमेश ने कहा, ”मगर इस अशुभ गठजोड़ पर ठोस प्रतिक्रिया देने के बजाय मोदी सरकार ने इसे नियति मानकर चुपचाप स्वीकार कर लिया और अब चीन को राजकीय दौरों से पुरस्कृत कर रही है.” उन्होंने कहा कि चीन ने यारलुंग त्संगपो पर एक विशाल जलविद्युत परियोजना की घोषणा की है जिसके ”हमारे उत्तर-पूर्वी राज्यों पर बेहद गंभीर प्रभाव पड़ेंगे लेकिन मोदी सरकार की तरफ से इस मुद्दे पर एक शब्द भी नहीं बोला गया.” रमेश ने दावा किया कि चीन से आयात की अनियंत्रित ‘डंपिंग’ जारी है, जिसने हमारी एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्यम) इकाइयों को बुरी तरह प्रभावित किया है.
‘डंपिंग’ का अर्थ होता है कि निर्माता द्वारा किसी उत्पाद को सामान्य मूल्य से कम कीमत पर दूसरे देश को निर्यात करना जिससे उस देश को नुकसान होता है. रमेश ने कहा, ”अन्य देशों की तरह सख्त कदम उठाने के बजाय भारत ने चीनी आयातकों को लगभग खुली छूट दे दी है.” उन्होंने कहा, ”क्या ‘न्यू नॉर्मल’ चीनी आक्रामकता और हमारी सरकार की कायरता से परिभाषित किया जाना चाहिए?”
मोदी-शी बैठक ठोस मुद्दों पर ‘विफल’ रही: ओवैसी
एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने रविवार को आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ बैठक उन महत्वपूर्ण सवालों के जवाब देने में ”विफल” रही है, जिनकी भारतीय तलाश कर रहे थे. हैदराबाद से सांसद ओवैसी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”चीनी राष्ट्रपति के साथ आज हुई भारत के प्रधानमंत्री की बैठक उन महत्वपूर्ण सवालों के जवाब देने में विफल रही है जिनकी भारतीयों को तलाश थी. इस सूची में सबसे ऊपर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को चीन का समर्थन और अफगानिस्तान में सीपीईसी का विस्तार है. हमने चीन द्वारा जल विज्ञान संबंधी नदी डेटा साझा किए जाने के बारे में एक शब्द भी नहीं सुना है.” ओवैसी ने कहा कि लद्दाख में सीमा की स्थिति भी ऐसी है कि ”हमारे बहादुर सैनिक ‘बफर जोन’ में गश्त नहीं कर सकते और हमारे चरवाहों को 2020 के बाद कई क्षेत्रों में पहुंच से वंचित कर दिया गया है.” उन्होंने दावा किया कि दुर्लभ मृदाओं और अन्य महत्वपूर्ण वस्तुओं की आपूर्ति पुन? शुरू करने के बारे में चीन ने कोई वादा नहीं किया है, न ही उसने कहा है कि वह भारत से और अधिक वस्तुओं का आयात करेगा.
एआईएमआईएम प्रमुख ने कहा, ”ये मुद्दे भारतीयों के लिए मायने रखते हैं, न कि फोटो खिंचवाने का मौका, जैकेट का रंग या कालीन की लंबाई. दुख की बात है कि मोदी-शी की मुलाकात ठोस मुद्दों पर कोई हल निकालने में नाकाम रही.” प्रधानमंत्री मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने रविवार को भारत-चीन सीमा मुद्दे के ”निष्पक्ष, उचित और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य” समाधान की दिशा में काम करने पर सहमति व्यक्त की और वैश्विक व्यापार को स्थिर करने में दोनों अर्थव्यवस्थाओं की भूमिका को मान्यता देते हुए व्यापार एवं निवेश संबंधों का विस्तार करने का संकल्प लिया.
अपनी व्यापक वार्ता में दोनों नेताओं ने मुख्य रूप से व्यापार और निवेश संबंधों को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया. यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय वस्तुओं पर 50 प्रतिशत तक का व्यापक ‘टैरिफ’ लगाए जाने से वैश्विक व्यापार में व्यवधान उत्पन्न हो गया है.
शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के दौरान आयोजित बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-चीन संबंधों के निरंतर विकास के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और सौहार्द के महत्व को रेखांकित किया और कहा कि नयी दिल्ली ”परस्पर विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता” के आधार पर संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है.



