
मुंबई. केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने रविवार को विश्व हिंदू परिषद (विहिप) की उस परामर्श की आलोचना की जिसमें कहा गया था कि नवरात्र के दौरान ‘गरबा’ कार्यक्रमों में केवल हिंदुओं को ही प्रवेश दिया जाना चाहिए. आठवले ने कहा कि इस तरह के आ”ान ”हिंसा को न्योता देने” के समान हैं.
विहिप ने शनिवार को कहा था कि ‘गरबा’ कार्यक्रमों में केवल हिंदुओं को ही प्रवेश दिया जाना चाहिए और आयोजकों को सलाह दी थी कि वे “लव जिहाद” की घटनाओं से बचने के लिए पहचान के उद्देश्य से प्रवेशकर्ताओं का आधार कार्ड देखें. विहिप के एक नेता ने कहा था कि गरबा के दौरान गैर-हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित होना चाहिए. उन्होंने गरबा को पूजा का ही एक तरीका बताया था और कहा कि यह केवल नृत्य कार्यक्रम या सांस्कृतिक आयोजन नहीं है. आठवले ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में विहिप के इस आदेश पर आपत्ति जताई.
उन्होंने अपने पोस्ट में कहा,” मैं इसकी कड़ी निंदा करता हूं! विश्व हिंदू परिषद कौन होता है यह तय करने वाला कि कौन गरबा में जाएगा और कौन नहीं? यह सलाह सिर्फ आयोजकों को निर्देश देने तक सीमित नहीं है, बल्कि कुछ कट्टरपंथी तत्वों को हिंसा भड़काने और बल प्रयोग करने का खुला निमंत्रण है.” केंद्रीय सामाजिक न्याय राज्य मंत्री ने कहा, ”अगर इस सलाह के कारण नवरात्र के दौरान देश में कहीं भी कोई झड़प, हमला या धार्मिक संघर्ष होता है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी विहिप और उससे जुड़े संगठनों की होगी.” आठवले ने कहा कि इस तरह के कदम भारत की एकता, विविधता और धार्मिक सहिष्णुता के मूल पर प्रहार करते हैं. रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) प्रमुख ने कहा, ”नवरात्र पूजा और आनंद का त्योहार है और इसे नफरत और संदेह के मंच में बदलने का प्रयास किया जा रहा है, जो बेहद निंदनीय है.”



