विपक्षी महागठबंधन एक ‘विभाजित कुनबा’; क्या तेजस्वी विपक्ष के नेता भी बन पाएंगे: भाजपा

महागठबंधन के संवाददाता सम्मेलन के पोस्टर पर थी सिर्फ तेजस्वी की तस्वीर, भाजपा ने ली चुटकी

नयी दिल्ली/पटना. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बृहस्पतिवार को बिहार में विपक्षी महागठबंधन को एक ‘विभाजित कुनबा’ करार देते हुए राष्ट्रीय जनता दल (राजद) से कहा कि उसे इस बात की चिंता करनी चाहिए कि राज्य विधानसभा चुनाव के लिए “मुख्यमंत्री पद के उसके चेहरे” के रूप में नामित तेजस्वी यादव नतीजों की घोषणा के बाद विपक्ष के नेता भी बन पाएंगे या नहीं.

बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की प्रचंड जीत का भरोसा जताते हुए भाजपा ने दावा किया कि महागठबंधन ने राजद नेता तेजस्वी और विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के अध्यक्ष मुकेश सहनी को “मजबूरी के चलते” चुनाव से पहले क्रमश: मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री पद का अपना उम्मीदवार घोषित किया है.

भाजपा ने कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि राजद ने पटना में संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में लगाए गए पोस्टर में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की जगह तेजस्वी का चेहरा प्रर्दिशत कर पार्टी को उसकी “औकात” दिखा दी है. इस संवाददाता सम्मेलन में विपक्ष के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री पद के उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की गई.

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद जफर इस्लाम ने दिल्ली में ‘पीटीआई वीडियो’ से कहा, “यह (महागठबंधन) एक विभाजित कुनबा है. इसलिए वे (बृहस्पतिवार को पटना में आयोजित) संवाददाता सम्मेलन में एकता का संदेश देने की कोशिश कर रहे थे.” उन्होंने कहा, “आपको एकता का संदेश देने की जरूरत नहीं होती. ऐसा संदेश आपके स्वभाव, हाव-भाव, आचरण, प्रतिबद्धता और दृ­ढ़ विश्वास से खुद-ब-खुद जाहिर हो जाता है.” इस्लाम ने कहा कि हालांकि, लोग समझते हैं कि यह विपक्षी खेमे के भीतर मौजूद मतभेदों को छिपाने का प्रयास है.

भाजपा प्रवक्ता ने कहा, “उन्होंने (महागठबंधन ने) तेजस्वी यादव को मजबूरी में मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया है. उन्होंने सहनी को भी मजबूरी में उपमुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया है. जिन लोगों ने आज ये घोषणाएं की हैं, उन्हें इस बात की चिंता करनी चाहिए कि वह (तेजस्वी) बिहार चुनाव के नतीजों की घोषणा के बाद विपक्ष के नेता भी बन पाएंगे या नहीं.” जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी ने भी विपक्ष पर निशाना साधा और कहा कि तेजस्वी एक “हारे हुए सिपाही” हैं और राज्य विधानसभा चुनावों में एक बार फिर उनकी शिकस्त “तय” है.

बिहार विधानसभा चुनाव के लिए विपक्ष के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर तेजस्वी के नाम की घोषणा के बारे में पूछे जाने पर त्यागी ने ‘पीटीआई वीडियो’ से कहा, “उनके (तेजस्वी के) नेतृत्व में कई चुनाव लड़े गए हैं. वह एक हारे हुए सिपाही हैं. और इस लड़ाई में भी उनकी हार तय है. उनके पास दिखाने और करने के लिए कुछ भी नया नहीं है.” विपक्षी महागठबंधन ने बिहार विधानसभा चुनाव के लिए बृहस्पतिवार को तेजस्वी को मुख्यमंत्री और सहनी को उपमुख्यमंत्री पद का अपना उम्मीदवार घोषित किया.

पटना में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में सभी घटक दलों के नेताओं की मौजूदगी में इसकी घोषणा करते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने कहा कि सत्ता में आने पर समाज के अन्य वर्गों के नेताओं को भी उपमुख्यमंत्री बनाया जाएगा. गहलोत ने कहा कि इस फैसले का कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने समर्थन किया है. भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में लगाए गए पोस्टर में राहुल को जगह न मिलने को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा.

पूनावाला ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “इसलिए यह सिर्फ ‘सम्मान चोरी’ नहीं है, जिससे कांग्रेस जूझ रही है.” उन्होंने आरोप लगाया कि संयुक्त संवाददाता सम्मेलन के पोस्टर में तेजस्वी की तस्वीर प्रर्दिशत की गई, जबकि राहुल की तस्वीर “हटा दी गई.” पूनावाला ने कहा, “राजद ने सचमुच कांग्रेस को उसकी ‘औकात’ दिखा दी.” भाजपा के आईटी प्रकोष्ठ के प्रमुख अमित मालवीय ने कहा कि महागठबंधन के भीतर “तीव्र अंतर्कलह” है, जो “पूरी तरह से” खुलकर सामने आ गई है. मालवीय ने कहा, “पहले राहुल गांधी ने तेजस्वी को चेहरा नहीं माना और अब तेजस्वी ने पोस्टर से राहुल गांधी को गायब कर दिया.” उन्होंने कहा, “यह पोस्टर अपने आप में महागठबंधन के टूटने की घोषणा है.”

लालू ने सहयोगी दलों पर दबाव डालकर बेटे को मुख्यमंत्री का उम्मीदवार बनवाया: सम्राट चौधरी

बिहार के उप मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता सम्राट चौधरी ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि राष्ट्रीय जनता दल (राजद) अध्यक्ष लालू प्रसाद ने दबाव डालकर अपने बेटे तेजस्वी यादव को महागठबंधन की तरफ से मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करवाया.

भाजपा मीडिया सेंटर में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में चौधरी ने कहा कि आज लोकतंत्र और बिहार को शर्मसार करने वाला दिन है.
उन्होंने आरोप लगाया, “लालू यादव ने जैसे 15 साल तक बिहार में राज किया, वैसे ही अब अपने गठबंधन में गुंडागर्दी कर सभी सहयोगी दलों पर दबाव बनाकर अपने बेटे को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित कराया है.” चौधरी ने कहा कि लालू यादव के शासनकाल में बिहार को “लूट, हत्या और भ्रष्टाचार” का इनाम मिला और अब “पंजीकृत अपराधी का बेटा मुख्यमंत्री बनने का सपना देख रहा है.”

भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और महागठबंधन के अन्य दलों ने लालू यादव जैसे भ्रष्ट नेता के पुत्र का समर्थन किया है.
उन्होंने कहा, “जिस व्यक्ति ने 950 करोड़ रुपये के चारा घोटाले में भ्रष्टाचार किया, उसी के बेटे को मुख्यमंत्री बनाने का निर्णय लिया गया है.” तेजस्वी यादव के चुनावी वादों को अव्यावहारिक बताते हुए उप मुख्यमंत्री ने कहा, “वह 2.70 करोड़ लोगों को सरकारी नौकरी देने की बात करते हैं. जबकि राज्य में फिलहाल करीब 22 लाख सरकारी कर्मचारी हैं, जिन पर 85 हजार करोड़ रुपये का व्यय होता है.

अगर तेजस्वी यादव का वादा पूरा किया जाए, तो 12 लाख करोड़ रुपये की आवश्यकता होगी, जबकि बिहार का कुल बजट सिर्फ 3.17 लाख करोड़ रुपये है.” चौधरी ने तेजस्वी द्वारा जीविका दीदियों को 30 हजार रुपये मासिक वेतन देने की घोषणा पर सवाल उठाते हुए कहा, “राज्य में 1.36 करोड़ जीविका दीदी हैं. यह वादा पूरी तरह अव्यावहारिक और जनता को भ्रमित करने वाला है.” उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में “जीविका दीदी योजना” के जरिए महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए एक साल में 56 हजार करोड़ रुपये का बाजार तैयार हुआ है.

‘डबल इंजन सरकार’ की आवश्यकता पर जोर देते हुए सम्राट चौधरी ने कहा, “बिहार के वास्तविक विकास के लिए केंद्र में मोदी सरकार और राज्य में नीतीश कुमार की सरकार का होना जरूरी है. बिहार की तरक्की केवल केंद्र के सहयोग और सुशासन से ही संभव है.” उन्होंने उम्मीद जताई कि बिहार की जनता “भ्रष्टाचार और गुंडागर्दी के सहारे सत्ता में आने की कोशिश करने वाले महागठबंधन” को आगामी 6 और 11 नवंबर को मतदान के जरिए करारा जवाब देगी.

तेजस्वी मुख्यमंत्री के उम्मीदवार बन सकते हैं, मुख्यमंत्री कभी नहीं: नित्यानंद राय

केंद्रीय गृह राज्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता नित्यानंद राय ने बृहस्पतिवार को कहा कि महागठबंधन ने भले ही तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया हो, लेकिन बिहार की जनता उन्हें कभी मुख्यमंत्री नहीं बनने देगी.  राय ने संवाददाताओं से कहा, “तेजस्वी यादव महागठबंधन के मुख्यमंत्री उम्मीदवार तो हो सकते हैं, लेकिन मुख्यमंत्री कभी नहीं बन सकते, क्योंकि लोकतंत्र में मुख्यमंत्री का चयन जनता करती है और जनता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और विकास पर भरोसा करती है. बिहार ने पिछले 20 वर्षों में नीतीश कुमार के नेतृत्व को स्वीकारा ही नहीं, बल्कि सराहा भी है.”

भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और उजियारपुर से सांसद नित्यानंद राय ने आरोप लगाया कि अगर गलती से भी तेजस्वी यादव के नेतृत्व में सरकार बन गई तो बिहार में “फिर से जंगलराज लौट आएगा.” उन्होंने कहा, “दिनदहाड़े हत्या, लूट, बलात्कार, जमीन-जायदाद की लूटपाट शुरू हो जाएगी और बिहार 1990 से 2005 के दौर में वापस चला जाएगा.” राय ने दावा किया कि तेजस्वी यादव कांग्रेस और अन्य दलों पर दबाव डालकर मुख्यमंत्री उम्मीदवार तो बन गए हैं, लेकिन महागठबंधन के भीतर ही कई दल उन्हें स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं. उन्होंने कहा, “इस हकीकत को तेजस्वी यादव भी जानते हैं और उनके साथी दल भी.” केंद्रीय गृह राज्यमंत्री ने तेजस्वी यादव के उस बयान पर भी प्रतिक्रिया दी जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर वह भ्रष्टाचार में लिप्त पाए गए तो खुद पर कार्रवाई करेंगे.

महागठबंधन के संवाददाता सम्मेलन के पोस्टर पर थी सिर्फ तेजस्वी की तस्वीर, भाजपा ने ली चुटकी

बिहार की राजधानी पटना में उस संवाददाता सम्मेलन के आयोजन स्थल पर एक पोस्टर पर ‘इंडिया’ गठबंधन के कई प्रमुख नेताओं की तस्वीरें नहीं होने को लेकर बृहस्पतिवार को विवाद खड़ा हो गया, जिसमें राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव को विपक्षी गठबंधन की तरफ से मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया गया. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस बैनर पर केवल राजद नेता तेजस्वी यादव की ही बड़ी तस्वीर दिख रही है. महागठबंधन नेताओं की एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन का आयोजन पटना के मौर्या होटल में किया गया था. इसमें तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया गया.

विधानसभा चुनाव के लिए ‘इंडिया’ गठबंधन ((इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस) के घटक दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर कई दिनों तक चले गतिरोध के बाद ‘महागठबंधन’ के नेताओं ने अपनी पहली प्रेस वार्ता आयोजित की. इस संवाददाता सम्मेलन के आयोजन स्थल पर पोस्टर में कई प्रमुख नेताओं की तस्वीर नहीं होने से जुड़े विवाद पर भाजपा के राज्य मीडिया प्रभारी दानिश इकबाल ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “इंडिया गठबंधन के भीतर चल रही कलह अब खुलकर सामने आ गई है… पहले राहुल गांधी तेजस्वी को (गठबंधन का) चेहरा नहीं मानते थे. अब तेजस्वी ने राहुल गांधी को पोस्टरों से हटा दिया है. यह पोस्टर अपने आप में महागठबंधन के टूटने की घोषणा है.”

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