न्यायालय ने यूपीएससी को दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए लेखक बदलने संबंधी दिए निर्देश

नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) को बुधवार को निर्देश दिया कि वह परीक्षाओं की अधिसूचना में एक ऐसा प्रावधान शामिल करे जिससे पात्र अभ्यर्थी परीक्षा से कम से कम सात दिन पहले तक लेखक बदलने का अनुरोध कर सकें.
न्यायालय ने यूपीएससी को दो महीने के भीतर एक व्यापक अनुपालन हलफनामा दाखिल करने को भी कहा जिसमें आयोग द्वारा आयोजित परीक्षाओं में दृष्टिबाधित अ्भ्यियथयों के लिए ‘स्क्रीन-रीडर सॉफ्टवेयर’ के उपयोग संबंधी प्रस्तावित कार्य योजना, समय-सीमा और तौर-तरीकों का विवरण हो.

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि दिव्यांगजन को दिए गए अधिकार किसी दया या कृपा का काम नहीं हैं, बल्कि समानता, गरिमा और भेदभावरहित व्यवहार के संवैधानिक वादे की अभिव्यक्ति हैं. पीठ ने कहा, ”यह न्यायालय यह टिप्पणी करना उचित समझता है कि शासन में समावेशिता का सही मापदंड केवल प्रगतिशील नीतियां बनाने में नहीं, बल्कि उनके विश्वसनीय और प्रभावी कार्यान्वयन में निहित है.” शीर्ष अदालत ने दिव्यांगजन के अधिकारों को ब­ढ़ावा देने का काम कर रहे संगठन ‘मिशन एक्सेसिबिलिटी’ द्वारा दायर याचिका पर अपना फैसला सुनाया जिसमें यूपीएससी द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा में लेखक पंजीकरण के लिए समयसीमा में संशोधन का अनुरोध किया गया है.

याचिका में पात्र उम्मीदवारों के लिए ‘स्क्रीन-रीडर सॉफ्टवेयर’ से युक्त लैपटॉप के उपयोग और सुगम डिजिटल प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का निर्देश दिए जाने का भी अनुरोध किया गया है. पीठ ने अपने फैसले में निर्देश दिया कि यूपीएससी ”यह सुनिश्चित करेगा कि वह अपनी हर परीक्षा की अधिसूचना में यह स्पष्ट प्रावधान शामिल करे कि लेखक की सुविधा के लिए पात्र अभ्यर्थी परीक्षा की तिथि से कम से कम सात दिन पहले तक लेखक को बदलने का अनुरोध कर सकें.” न्यायालय ने कहा कि ऐसे अनुरोधों पर निष्पक्ष रूप से विचार किया जाए और आवेदन प्राप्त होने के तीन कार्यदिवस के भीतर एक उचित आदेश पारित करते हुए उनका निस्तारण किया जाए.

पीठ ने यूपीएससी को निर्देश दिया कि वह एक विस्तृत अनुपालन हलफनामा दाखिल करे, ”जिसमें स्क्रीन-रीडर सॉफ्टवेयर की उपलब्धता और दृष्टिबाधित उम्मीदवारों के लिए उसके उपयोग से संबंधित कार्ययोजना, समय-सीमा और प्रक्रियाओं का स्पष्ट उल्लेख हो” ताकि आगामी परीक्षाओं में इसका उपयोग सुनिश्चित किया जा सके. पीठ ने कहा कि हलफनामे में सभी केंद्रों या निर्धारित परीक्षा केंद्रों पर सॉफ्टवेयर और संबंधित बुनियादी ढांचे के परीक्षण, मानकीकरण और सत्यापन के लिए प्रस्तावित कदमों का भी उल्लेख होना चाहिए.

उसने कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग तथा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के माध्यम से केंद्र को इन कदमों के शीघ्र कार्यान्वयन के लिए यूपीएससी को सभी आवश्यक प्रशासनिक और तकनीकी सहायता प्रदान करने का भी निर्देश दिया.
पीठ ने यूपीएससी को अनुपालन हलफनामा दायर करने के लिए अगले साल 16 फरवरी की समय सीमा दी और मामले की अगली सुनवाई के लिए यही तिथि निर्धारित की.

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