बांग्लादेश के चटगांव में भारतीय वीजा आवेदन प्रक्रिया अनिश्चितकाल के लिए निलंबित

भारत ने बांग्लादेश उच्चायोग बाहर हुए प्रदर्शन को लेकर बांग्लादेशी मीडिया की खबरों को खारिज किया

ढाका/नयी दिल्ली. भारत ने रविवार को बांग्लादेश के दक्षिण-पूर्वी बंदरगाह शहर चटगांव स्थित भारतीय वीजा आवेदन केंद्र में वीजा सेवाएं अगले आदेश तक निलंबित कर दीं. स्थानीय मीडिया ने यह जानकारी दी. यह कदम प्रमुख युवा नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद बढ़े तनाव के मद्देनजर उठाया गया है. पिछले साल छात्रों के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शन के प्रमुख नेता रहे हादी 12 फरवरी को होने वाले आम चुनावों के लिए उम्मीदवार थे. इन विरोध प्रदर्शनों के कारण पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना अपदस्थ हो गई थीं.

नकाबपोश बंदूकधारियों ने 12 दिसंबर को मध्य ढाका के विजयनगर क्षेत्र में इंकलाब मंच के प्रवक्ता हादी के सिर में उस समय गोली मार दी थी, जब वह चुनाव प्रचार कर रहे थे. बाद में सिंगापुर में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. उनकी मौत के बाद बांग्लादेश के विभिन्न हिस्सों में हिंसा और तोड़फोड़ की घटनाएं हुईं. इसी दौरान चटगांव में सहायक भारतीय उच्चायुक्त के आवास पर बृहस्पतिवार को पथराव की घटना भी हुई. भारतीय वीजा आवेदन केंद्र (आईवीएसी) ने एक बयान में कहा कि चटगांव में भारतीय सहायक उच्चायोग में हाल में हुई घटना के कारण आईवीएसी में सेवाएं निलंबित कर दी गई हैं.

आईवीएसी के अनुसार, बंदरगाह शहर में भारतीय वीजा संबंधी सभी सेवाएं 21 दिसंबर से अगले आदेश तक बंद रहेंगी. बयान में कहा गया कि सुरक्षा स्थिति की समीक्षा के बाद वीजा आवेदन केंद्र को फिर से खोलने के संबंध में आगे की घोषणा की जाएगी. बांग्लादेश के सिलहट में भारतीय सहायक उच्चायोग कार्यालय और वीजा आवेदन केंद्र पर शनिवार को सुरक्षा बढ़ा दी गई. आईवीएसी ढाका, खुलना और राजशाही, चटगांव और सिलहट में केंद्र संचालित करता है. आईवीएसी के एक अधिकारी ने बताया कि चार अन्य कार्यालय चालू हैं.

भारत ने बृहस्पतिवार को ढाका में अपने वीजा आवेदन केंद्र को फिर से खोल दिया. सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण एक दिन पहले इसे बंद कर दिया गया था. लेकिन राजशाही और खुलना में दो अन्य केंद्रों को संक्षिप्त अवधि के लिए बंद कर दिया गया, क्योंकि भारत विरोधी प्रदर्शनकारियों ने वहां भारतीय दूतावासों की ओर मार्च करने का प्रयास किया था.

बीस दिसंबर को बांग्लादेश के सिलहट शहर में भारतीय सहायक उच्चायोग कार्यालय और वीजा आवेदन केंद्र पर सुरक्षा बढ़ा दी गई थी.
‘ढाका ट्रिब्यून’ अखबार के अनुसार, सिलहट मेट्रोपॉलिटन पुलिस के अतिरिक्त उपायुक्त (मीडिया) सैफुल इस्लाम ने कहा कि सुरक्षा के कड़े उपाय इसलिए किए गए हैं, ताकि ”कोई तीसरा पक्ष स्थिति का फायदा न उठा सके.” बांग्लादेश की राजधानी ढाका में हादी को शनिवार को राष्ट्रीय कवि काजी नजरुल इस्लाम की कब्र के पास दफनाया गया.

भारत ने बांग्लादेश उच्चायोग बाहर हुए प्रदर्शन को लेकर बांग्लादेशी मीडिया की खबरों को खारिज किया

भारत ने बांग्लादेश में मीडिया की उन खबरों को ”भ्रामक प्रचार” बताते हुए खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि उस देश में एक हिंदू व्यक्ति की हत्या के विरोध में नयी दिल्ली में बांग्लादेशी उच्चायोग के बाहर हुए प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा का माहौल बिगाड़ने का प्रयास किया गया था.

विदेश मंत्रालय ने बताया कि शनिवार को बांग्लादेश के मयमनसिंह में दीपू चंद्र दास की ”विभत्स हत्या” के विरोध में बांग्लादेश उच्चायोग के सामने लगभग 20-25 युवक एकत्र हुए और नारे लगाए. इसने कहा कि प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेश में सभी अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की भी मांग की. भारत ने ढाका की अंतरिम सरकार से दास की ”बर्बर हत्या” के दोषियों को न्याय के कटघरे में लाने का भी आग्रह किया.

बांग्लादेशी मीडिया की कुछ खबरों में दावा किया गया कि बांग्लादेश उच्चायोग के बाहर प्रदर्शन कर रहे युवाओं ने परिसर की सुरक्षा में सेंध लगाने की कोशिश की. मंत्रालय ने कहा कि ”किसी भी समय बाड़ तोड़ने या सुरक्षा का माहौल बिगाड़ने का कोई प्रयास नहीं किया गया”. इसने यह भी कहा कि पुलिस ने कुछ मिनटों के बाद समूह को तितर-बितर कर दिया और इन घटनाओं के दृश्य साक्ष्य सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं. दास (25) की बृहस्पतिवार को मयमनसिंह शहर में भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी. छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद बांग्लादेश में अशांति का एक नया दौर देखने को मिला है. वह सरकार विरोधी प्रदर्शनों का एक प्रमुख चेहरा थे, जिनके कारण शेख हसीना सरकार का पतन हुआ था.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, ”हमने बांग्लादेशी मीडिया के कुछ वर्गों में इस घटना को लेकर भ्रामक प्रचार देखा है.” उन्होंने कहा, ”तथ्य यह है कि 20 दिसंबर को नयी दिल्ली में बांग्लादेश उच्चायोग के सामने लगभग 20-25 युवक एकत्र हुए और मयमनसिंह में दीपू चंद्र दास की जघन्य हत्या के विरोध में नारे लगाए, साथ ही बांग्लादेश में सभी अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की मांग भी की.” जायसवाल ने कहा कि किसी भी समय ”बाड़ तोड़ने या सुरक्षा संकट पैदा करने का कोई प्रयास नहीं किया गया”.

उन्होंने कहा, “मौके पर तैनात पुलिस ने कुछ मिनटों के भीतर समूह को तितर-बितर कर दिया. इन घटनाओं के दृश्य साक्ष्य सार्वजनिक रूप से सभी के देखने के लिए उपलब्ध हैं. भारत ‘वियना कन्वेंशन’ के अनुसार अपने क्षेत्र में विदेशी मिशनों और चौकियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है.” जायसवाल इस मुद्दे पर मीडिया के एक सवाल का जवाब दे रहे थे.

उन्होंने कहा, ”भारत बांग्लादेश में उत्पन्न हो रही स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है. हमारे अधिकारी बांग्लादेशी अधिकारियों के संपर्क में हैं और हमने अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों पर अपनी गहरी चिंता उनसे साझा की है.” उन्होंने कहा, ”हमने यह भी आग्रह किया है कि दास की बर्बर हत्या के दोषियों को न्याय के कटघरे में लाया जाए.”

ढाका विश्वविद्यालय के बंगबंधु छात्रावास का नाम बदलकर ‘उस्मान हादी’ किया गया 

ढाका विश्वविद्यालय के बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान छात्रावास का नाम बदलकर शरीफ उस्मान हादी के नाम पर रख दिया गया है. स्थानीय मीडिया ने रविवार को यह जानकारी दी. हादी एक प्रमुख युवा नेता थे जिन्होंने पिछले साल बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार को गिराने वाले जुलाई विद्रोह में भाग लिया था.

राजधानी में सिर में गोली लगने के छह दिन बाद बृहस्पतिवार को हादी की मौत हो गई. समाचार पत्र ‘ढाका ट्रिब्यून’ के अनुसार, छात्रावास (हॉल) में रहने वाले छात्रों के संगठन ‘हॉल यूनियन’ ने शनिवार को मुख्य द्वार पर लगी नामपट्टिका को हटाकर उसकी जगह ‘शहीद शरीफ उस्मान हादी हॉल’ की नई नामपट्टिका लगा दी.

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