धोखाधड़ी मामले में महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री कोकाटे की दोषसिद्धि पर उच्चतम न्यायालय की रोक

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Mon, 22 Dec 2025 08:07 PM
धोखाधड़ी मामले में महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री कोकाटे की दोषसिद्धि पर उच्चतम न्यायालय की रोक
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नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने धोखाधड़ी और जालसाजी के एक मामले में महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री माणिकराव कोकाटे की दोषसिद्धि पर सोमवार को रोक लगा दी और स्पष्ट किया कि विधायक के रूप में उन्हें अयोग्य करार नहीं दिया जाएगा. मामला 1989-1992 में 30,000 रुपये की वार्षिक आय सीमा वाले आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लोगों के लिए एक आवासीय योजना से संबंधित है. प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की अवकाशकालीन पीठ ने कोकाटे की याचिका पर महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी किया.

पीठ ने कहा, ”नोटिस जारी किया जाए. इस बीच, याचिकाकर्ता की दोषसिद्धि स्थगित रहेगी और उन्हें विधायक के रूप में अयोग्य नहीं ठहराया जाएगा लेकिन वह लाभ का कोई पद नहीं संभालेंगे.” कोकाटे नासिक जिले की सिन्नार से विधायक हैं. उन्हें इस साल फरवरी में दोषी करार दिए जाने और दो साल की कैद की सजा सुनाए जाने के एक मजिस्ट्रेट के फैसले को नासिक सत्र अदालत ने 16 दिसंबर को बरकरार रखा था. सत्र अदालत ने कहा कि उन्होंने और उनके भाई ने बेइमानी से राज्य सरकार को उन्हें फ्लैट आवंटित करने के लिए मनाया.

बंबई उच्च न्यायालय ने 19 दिसंबर को धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले में कोकाटे की दो साल जेल की सजा को निलंबित कर दिया था. उसने उन्हें जमानत दे दी लेकिन दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इनकार कर दिया. उच्च न्यायालय ने आदेश में कहा कि वह दोषिसद्धि पर रोक नहीं लगा सकती क्योंकि इस बात की ओर इशारा करने के प्रथम दृष्टया प्रमाण हैं कि मामले में राकांपा नेता की संलिप्तता थी. विपक्ष की मांग के बाद 17 दिसंबर को कोकाटे से मंत्री पद वापस ले लिया गया और 18 दिसंबर को उन्होंने इस्तीफा दे दिया. नासिक पुलिस की एक टीम उसी रात बांद्रा पहुंची और उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट की तामील की.

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