नवी मुंबई की अदालत ने दो बांग्लादेशियों को अवैध रूप से भारत में रहने का दोषी ठहराया

ठाणे. महाराष्ट्र के नवी मुंबई की एक अदालत ने दो बांग्लादेशी नागरिकों को भारत में बिना वैध पासपोर्ट प्रवेश करने और रहने के मामले में दोषी ठहराया. ग्यारह दिसंबर के अदालती आदेश की प्रति मंगलवार को उपलब्ध कराई गई, जिसमें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (बेलापूर) सी. वी. मराठे ने अभियोजन द्वारा फर्जी पहचान दस्तावेज बनवाने से जुड़ी धारा के तहत लगाए गए आरोपों को स्वीकार नहीं किया.

मुकदमे के दौरान, अतिरिक्त लोक अभियोजक संध्या म्हात्रे ने अदालत को बताया कि हैदर अली अशरफ अली (29) और फातिमा गफूर शेख (34) को इस वर्ष जनवरी में कोपरगांव, सेक्टर 26 से गिरफ्तार किया गया था, क्योंकि वे भारत में किसी वैध यात्रा दस्तावेज या कानूनी अनुमति के बिना रह रहे थे. अली पर यह आरोप भी है कि जांच के दौरान उसने जाली आधार कार्ड पेश किया. अदालत ने कहा कि दोनों ने भारत में बिना वैध कागजात के रहने के कारण “पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) नियम, 1950 के नियम 5′ का उल्लंघन किया.

एक ओर अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि विदेशी नागरिकों का अवैध रूप से रहना हमारे देश की सुरक्षा और संरक्षा के लिए “संभावित खतरा’ है, तो वहीं बचाव पक्ष ने कहा कि आरोपी “गरीब और निरक्षर’ हैं और उन्होंने भारत में केवल “रोजी-रोटी के लिए बिना किसी दुर्भावना के प्रवेश किया’.

अदालत ने दोषियों को 11 महीने की कैद की सजा सुनाई और 500-500 रुपये का जुर्माना लगाया. चूंकि दोनों 14 जनवरी, 2025 से हिरासत में 10 महीने और 27 दिन बिता चुके हैं, इसलिए अदालत ने सजा में इस समय को कम कर दिया. साथ ही, अदालत ने नवी मुंबई पुलिस प्रमुख को निर्देश दिया कि वे बांग्लादेश उच्चायोग के माध्यम से इनके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू करें.

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