
नागपुर: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शनिवार को कहा कि उनकी सरकार मराठा समुदाय की आरक्षण संबंधी मांगों को पूरा करने के प्रति सकारात्मक है और समुदाय के हित में निर्णय लेना जारी रखेगी, साथ ही यह भी सुनिश्चित करेगी कि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के साथ कोई अन्याय न हो।
उन्होंने कहा कि सरकार आरक्षण के मुद्दे पर ऐसे निर्णय लेगी, जो संविधान और अदालतों की कसौटी पर खरे उतर सकें तथा कानूनी जांच में टिक सकें।
फडणवीस ने कहा कि ईंधन की बढ़ती कीमतें वैश्विक ऊर्जा संकट से जुड़ी हैं और अंतरराष्ट्रीय स्थिति में सुधार होने पर इनके दाम स्थिर हो जाएंगे।
नागपुर के भांडेवाड़ी में संपीड़ित बायोगैस संयंत्र का निरीक्षण करने के बाद संवाददाताओं से बातचीत में फडणवीस से मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के बारे में पूछा गया।
जरांगे ने शनिवार को जालना जिले में भीषण गर्मी के बीच अपना नौवां अनिश्चितकालीन अनशन शुरू कर दिया, जिससे आरक्षण के मुद्दे पर राज्य सरकार पर दबाव और बढ़ गया। मुंबई से लगभग 400 किलोमीटर दूर स्थित अंतरवाली सराटी गांव में जरांगे ने भीषण गर्मी के बावजूद बिना किसी टेंट या सुरक्षात्मक आश्रय के खुले मैदान में अनशन शुरू किया।
जरांगे ने मराठा समुदाय के लोगों को ओबीसी आरक्षण का लाभ दिलाने के लिए कुनबी जाति प्रमाणपत्र जारी करने, हैदराबाद और सतारा गजट अभिलेखों को लागू करने तथा आरक्षण आंदोलन में भाग लेने वाले मराठा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग दोहराई है। जरांगे के अनशन के बारे में पूछे जाने पर फडणवीस ने कहा, ”सरकार इस मुद्दे पर हमेशा सकारात्मक रही है। जब-जब कठिनाइयां आईं, सरकार ने निर्णय लिए। सरकार का रुख पारदर्शी और सकारात्मक है तथा भविष्य में भी ऐसा ही रहेगा।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार सभी समुदायों के लिए काम करती है और सामाजिक समूहों के बीच टकराव पैदा नहीं करती। उन्होंने कहा, ”मेरे और उपमुख्यमंत्री एकनाथ ंिशदे द्वारा मराठा समुदाय के लिए जो निर्णय लिए हैं, वे इतिहास में पहले कभी नहीं लिए गए। हम समुदाय के हित में निर्णय लेना जारी रखेंगे।” उन्होंने हालांकि इस बात पर बल दिया कि आरक्षण संबंधी किसी भी निर्णय को संविधान और न्यायालयों के निर्देशों के अनुरूप होना चाहिए।
फडणवीस ने कहा, ”हमें संविधान तथा उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का पालन करना होगा। उस दायरे से बाहर लिया गया निर्णय भले ही प्रचार दिला दे, लेकिन वह कानूनी जांच में नहीं टिकेगा।” उन्होंने कहा, ”हम हर वह निर्णय लेंगे, जो संविधान और न्यायालयों की कसौटी पर खरा उतर सके।”
राज्य के ओबीसी समुदाय मराठाओं को अपने आरक्षण हिस्से से लाभ दिए जाने का कड़ा विरोध करते रहे हैं। उनका कहना है कि ऐसा करने से उन्हें मिलने वाले मौजूदा लाभ प्रभावित होंगे। ओबीसी समूहों की ंिचताओं पर फडणवीस ने कहा कि सरकार एक समुदाय को लाभ पहुंचाने के लिए दूसरे समुदाय के हितों की अनदेखी नहीं करेगी।
उन्होंने कहा, ”इस सरकार ने कभी किसी समुदाय से लाभ छीनकर दूसरे को नहीं दिया है और न ही ऐसा करेगी।”मुख्यमंत्री ने कहा, ”ओबीसी समुदाय को डरने की कोई जरूरत नहीं है। हम मराठा समुदाय की ंिचताओं का समाधान करेंगे, लेकिन ओबीसी समुदाय के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय नहीं होने देंगे।”
मराठा आरक्षण से जुड़े सरकारी प्रस्ताव (जीआर) की मांग पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इस संबंध में चर्चा जारी है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता ने कहा, ”मैं अभी विस्तार में नहीं जाना चाहता, लेकिन संविधान और कानून के दायरे में रहते हुए कोई भी निर्णय लेने के लिए हम तैयार हैं।” इससे पहले संपीड़ित बायोगैस परियोजना के बारे में फडणवीस ने कहा कि यह देश का पहला ‘ड्राई-डाइजेशन’ आधारित नगर ठोस अपशिष्ट प्रसंस्करण संयंत्र है।
ड्राई-डाइजेशन, अपशिष्ट से ऊर्जा प्राप्त करने की एक नवोन्मेषी प्रक्रिया है, जो उच्च ठोस कार्बनिक अपशिष्ट को पानी के घोल में परिर्वितत किए बिना विघटित करती है। उन्होंने बताया कि प्रतिदिन 1,200 टन क्षमता वाली यह परियोजना 400-400 टन के तीन चरणों में लागू की जा रही है और अगस्त तक इसके पूरी तरह चालू होने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि यह संयंत्र प्रतिदिन लगभग 28 टन गैस, 120 टन जैविक खाद और करीब 400 टन ‘रिफ्यूज-डिराइव्ड फ्यूल’ (आरडीएफ) का उत्पादन करेगा। फडणवीस ने कहा, ”यह देश की पहली ऐसी परियोजना है, जिसे पूरी तरह निजी निवेश से बिना किसी ‘टिंिपग शुल्क’ के विकसित किया गया है। इसमें लगभग 300 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है।”
उन्होंने कहा कि यह परियोजना कचरे को संपदा में बदलने, पर्यावरणीय क्षति कम करने तथा भांडेवाड़ी क्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही कचरे और दुर्गंध की समस्या समाप्त करने में मदद करेगी। ईंधन की बढ़ती कीमतों पर फडणवीस ने कहा कि पूरा विश्व ऊर्जा संकट का सामना कर रहा है।
उन्होंने कहा, ”अमेरिका, यूरोप और पड़ोसी देशों सहित दुनिया भर में ईंधन की कीमतें बढ़ी हैं। यदि आपूर्ति श्रृंखलाओं को बनाए रखना है, तो अधिक लागत वहन करनी होगी।” उन्होंने विश्वास जताया कि वैश्विक संकट समाप्त होते ही ईंधन की कीमतें स्थिर हो जाएंगी।



