भारत के कपड़ा, इस्पात क्षेत्रों में ‘अतिरिक्त उत्पादन’ क्षमता नहीं : डीजीटीआर

नयी दिल्ली: भारत में कपड़ा और इस्पात क्षेत्रों में अतिरिक्त उत्पादन क्षमता नहीं है, क्योंकि देश में इन उत्पादों की प्रति व्यक्ति खपत दुनिया के अन्य देशों की तुलना में काफी कम है। वाणिज्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को यह बात कही। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (यूएसटीआर) ने मार्च में भारत सहित कई अर्थव्यवस्थाओं की विनिर्माण क्षेत्रों में कथित अतिरिक्त उत्पादन क्षमता और उससे जुड़े व्यापारिक प्रभाव की जांच शुरू की है। यह जांच अमेरिकी व्यापार अधिनियम, 1974 की धारा 301(बी) के तहत की जा रही है।

वाणिज्य मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव एवं व्यापार उपचार महानिदेशक (डीजीटीआर) अमिताभ कुमार ने कहा कि विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के व्यापार उपचार संबंधी किसी भी कानून में ‘अतिरिक्त क्षमता’ का प्रावधान नहीं है और यह एक नया विमर्श है। उन्होंने कहा, “हम नहीं मानते कि भारत के कपड़ा क्षेत्र में अतिरिक्त उत्पादन क्षमता है। देश में सभी प्रकार के कपड़ा उत्पादों, विशेषकर मानव निर्मित रेशों और तकनीकी वस्त्रों की प्रति व्यक्ति खपत बेहद कम है। भारत की जलवायु गर्म और उष्णकटिबंधीय है, इसलिए यहां मुख्य रूप से सूती कपड़े पहने जाते हैं। ऐसे में अतिरिक्त क्षमता का सवाल ही नहीं पैदा होता।”

कुमार ने कहा कि इस्पात क्षेत्र में भी भारत की प्रति व्यक्ति खपत बहुत कम है। उन्होंने कहा, “भले ही भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा इस्पात उत्पादक हो, लेकिन हमारी आबादी, आर्थिक जरूरतों और विकास की जरूरतों की तुलना में प्रति व्यक्ति इस्पात खपत दुनिया में सबसे कम में से है।” उन्होंने बताया कि भारत कपास के अलावा मानव निर्मित रेशों का शुद्ध आयातक है।

भारत ने अपने आधिकारिक जवाब में अमेरिकी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि यूएसटीआर की अधिसूचना में यह साबित करने के लिए कोई ठोस तर्क या प्रथम दृष्टया साक्ष्य नहीं दिया गया है कि भारत के प्रमुख उद्योगों में संरचनात्मक अतिरिक्त उत्पादन क्षमता मौजूद है, जिससे अमेरिका के साथ व्यापार अधिशेष पैदा हो रहा है।

कुमार ने कहा कि व्यापार उपचार उपाय अनुचित व्यापार व्यवहार से निपटने, घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रणाली को समर्थन देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button