महाराष्ट्र के स्कूलों में मराठी अनिवार्य, नियमों का उल्लंघन करने पर रद्द हो सकती है मान्यता: मंत्री

मुंबई: महाराष्ट्र के मंत्री दादा भुसे ने सोमवार को कहा कि राज्यभर के सभी माध्यमों के स्कूलों में मराठी भाषा की पढ़ाई और इस विषय की परीक्षा कराना कानूनी रूप से अनिवार्य कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि इसका उल्लंघन करने वाले शिक्षण संस्थानों की मान्यता रद्द की जा सकती है।

विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान हुई चर्चा का जवाब देते हुए स्कूल शिक्षा मंत्री दादा भुसे ने कहा कि महाराष्ट्र में सभी माध्यमों के स्कूलों में कक्षा एक से 10 तक मराठी भाषा को अनिवार्य किया गया है।

उन्होंने कहा कि यह प्रावधान ‘महाराष्ट्र राज्य के सभी स्कूलों में मराठी भाषा का अनिवार्य शिक्षण एवं अध्ययन’ अधिनियम, 2020 के तहत किया गया है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि स्कूलों को योग्य मराठी शिक्षक भी नियुक्त करने होंगे और नियमित निरीक्षण के ज़रिए इस नियम के पालन पर नज़र रखी जाएगी।

मंत्री ने कहा, “यदि कोई स्कूल प्रावधानों को लागू नहीं करता है तो पहले उसे उल्लंघन सुधारने के लिए कहा जाएगा। यदि इसके बाद भी वह मराठी नहीं पढ़ाता है तो उस पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। लगातार नियमों का पालन नहीं करने पर 17 अप्रैल, 2026 को जारी सरकारी निर्णय के तहत स्कूल की मान्यता भी रद्द की जा सकती है।”

सदस्यों के सवालों का जवाब देते हुए भुसे ने स्पष्ट किया कि मराठी केवल कागजों पर अनिवार्य विषय बनकर नहीं रहेगी। उन्होंने कहा, “हर कक्षा के लिए मराठी की परीक्षाएं निश्चित रूप से आयोजित की जाएंगी।”

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