महिला T20 विश्वकप से टीम इंडिया बाहर, ये रहे छह सबसे बड़े कारण

Author: Nandkishoryadav
UPDATED: Mon, 29 Jun 2026 04:05 PM
महिला T20 विश्वकप से टीम इंडिया बाहर, ये रहे छह सबसे बड़े कारण

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भारतीय महिला क्रिकेट टीम का टी20 विश्वकप में सफर खत्म हो गया। रविवार को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ग्रुप स्टेज में हार ने भारत के सफर को रोक दिया। टीम सेमीफाइनल में नहीं पहुंच पाई। महिला टी20 विश्वकप के सेमीफाइनल में पहुंचने वाली चार टीमें ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड और वेस्टइंडीज रहीं। अब टीम इंडिया की हार के बाद फैंस सोशल मीडिया पर लगातार सवाल खड़े कर रहे हैं। खासतौर पर पिछले साल वनडे विश्वकप जीतने के बाद टीम इंडिया से काफी उम्मीदें थीं।

भारतीय महिला टीम के पास अनुभवी बल्लेबाज, विश्व स्तरीय स्पिन आक्रमण और बड़े मंच का अनुभव था, लेकिन आधुनिक टी20 क्रिकेट की सबसे अहम जरूरतें, आक्रामक रणनीति, प्रभावी तेज गेंदबाजी, दमदार फील्डिंग और दबाव में सही फैसले, पूरे टूर्नामेंट में कमजोर साबित हुईं। यही कारण रहा कि भारत अच्छी शुरुआत और कुछ जीत के बावजूद सेमीफाइनल तक नहीं पहुंच सका।

1. बड़े मुकाबलों में रणनीति ही उलटी पड़ गई
कोच अमोल मजूमदार और कप्तान हरमनप्रीत कौर दोनों ने स्वीकार किया कि टीम को अपनी टी20 रणनीति पर दोबारा विचार करना होगा। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ करो या मरो मुकाबले में भारत ने पहले बल्लेबाजी का फैसला किया, जबकि उसी पिच पर रन बनाना आसान नहीं था। 170 रन को टीम ने पर्याप्त माना, लेकिन इससे ऑस्ट्रेलिया को लक्ष्य का स्पष्ट अंदाजा मिल गया। दूसरी ओर भारतीय गेंदबाजों पर अतिरिक्त दबाव आ गया कि वे मजबूत ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजी के खिलाफ इस स्कोर का बचाव करें। अनुभवी बल्लेबाजी क्रम पर दबाव कम करने की कोशिश आखिरकार टीम के खिलाफ चली गई।

2. तेज गेंदबाजी पूरे टूर्नामेंट में सबसे कमजोर कड़ी साबित हुई
स्पिनरों ने लगातार विकेट निकाले, लेकिन तेज गेंदबाज लगभग बेअसर रहे। पूरे टूर्नामेंट में भारत के पेस अटैक ने सबसे कम सिर्फ 2 विकेट लिए। उनका गेंदबाजी औसत 64.50, स्ट्राइक रेट 45.5 और इकॉनमी 8.50 रही, जो प्रतियोगिता में सबसे खराब आंकड़ों में शामिल रही। भारतीय तेज गेंदबाज शुरुआती विकेट नहीं निकाल सके और न ही बल्लेबाजों पर दबाव बना पाए। इससे स्पिनरों पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता बढ़ गई।

टूर्नामेंट में तेज गेंदबाजों का प्रदर्शन

टीम विकेट औसत स्ट्राइक रेट इकॉनमी
दक्षिण अफ्रीका 17 18.82 14.4 7.80
ऑस्ट्रेलिया 13 15.15 16.0 5.68
इंग्लैंड 11 21.09 18.0 7.03
आयरलैंड 10 27.10 23.7 6.86
पाकिस्तान 10 22.30 14.9 8.97
वेस्टइंडीज 11 17.09 12.5 8.17
भारत 2 64.50 45.5 8.50

3. फील्डिंग ने बार-बार मेहनत पर पानी फेर दिया
भारत की फील्डिंग पूरे टूर्नामेंट में चिंता का विषय रही। बांग्लादेश के खिलाफ सिर्फ 12 गेंदों के भीतर चार कैच छूटे। पाकिस्तान के खिलाफ भी तीन मौके गंवाए गए। 2025 के बाद भारत ने 25 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 46 कैच छोड़े, जो इस अवधि में किसी भी टीम से सबसे ज्यादा हैं। टीम की कैचिंग एफिशिएंसी केवल 69.3 प्रतिशत रही। कप्तान हरमनप्रीत कौर भी मान चुकी हैं कि बड़े मुकाबलों में ऐसी गलतियां मैच का रुख बदल देती हैं।

4. बल्लेबाजी में सही समय पर सही फैसले नहीं हुए
भारत का बल्लेबाजी क्रम पूरे टूर्नामेंट में स्थिर नहीं दिखा। अलग-अलग मैचों में मध्यक्रम की बल्लेबाजी क्रम बदलती रही। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जेमिमा रोड्रिग्स लंबे समय तक संघर्ष करती रहीं, लेकिन उन्हें काफी देर से रिटायर्ड आउट किया गया। तब तक सिर्फ कुछ ओवर बचे थे और विस्फोटक बल्लेबाज ऋचा घोष को केवल एक गेंद खेलने का मौका मिला। टीम की आक्रामक बल्लेबाजी की रणनीति बड़े मैच में डिफेंसिव सोच में बदल गई।

5. डेथ ओवरों में गेंदबाजी और बल्लेबाजी दोनों फेल
भारतीय टीम पूरे टूर्नामेंट में आखिरी ओवरों में दबाव झेलने में असफल रही। गेंदबाजी में डेथ ओवरों में लगातार बड़े रन दिए गए, जबकि बल्लेबाजी में लक्ष्य का पीछा करते समय जरूरी रन गति हासिल नहीं हो सकी। हरमनप्रीत कौर ने भी स्वीकार किया कि लंबे समय से यही समस्या बनी हुई है कि टीम मैच में रहते हुए भी अंतिम ओवरों में मुकाबला गंवा देती है।

6. सही प्लेइंग-11 नहीं मिल पाया
विश्वकप के दौरान भारत लगातार अपने सही संयोजन की तलाश में रहा। पांच मैचों में तेज गेंदबाजों के अलग-अलग कॉम्बिनेशन आजमाए गए। श्रेयंका पाटिल की चोट के बाद डेथ ओवरों में विकल्प नहीं मिला। कोच अमोल मजूमदार ने भी माना कि टीम अब तक तय नहीं कर सकी कि उसका सर्वश्रेष्ठ टी20 संयोजन क्या है। यही असमंजस पूरे अभियान में दिखाई दिया।

गेंदबाजी और बल्लेबाजी में कमियां रहीं हार की जड़

इसके अलावा गेंदबाजी में भी कमियां दिखीं। बल्लेबाजी में भी कई सवाल बने हुए हैं।
महिला प्रीमियर लीग (WPL) के चार सीजन पूरे होने के बावजूद कोई घरेलू बल्लेबाज ऐसा दावा पेश नहीं कर सका है, जो जेमिमा रॉड्रिग्स और हरमनप्रीत कौर जैसे खिलाड़ियों को प्लेइंग-11 में कड़ी चुनौती दे सके।
संभव है कि डब्ल्यूपीएल में टीमें इस तरह स्ट्रैटजी बनाती हैं कि भारतीय घरेलू बल्लेबाजों को शीर्ष क्रम में पर्याप्त अवसर नहीं मिलता, लेकिन फिलहाल टीम को अपने मौजूदा बल्लेबाजों से ही प्रदर्शन में सुधार की उम्मीद करनी होगी।
यह विश्व कप अभियान साफ संकेत देता है कि भारतीय महिला टीम को बदलाव की जरूरत है। इस बात से खुद अमोल मुजुमदार भी सहमत हैं।
हालांकि, उन्होंने कई बार ‘रीथिंक’ यानी नई रणनीति पर विचार करने की बात कही, लेकिन यह अब भी स्पष्ट नहीं है कि बदलाव आखिर होगा किस स्तर पर।

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