आज जगन्नाथ रथ यात्रा की शुरुआत, क्यों पुरी का आयोजन पूरी दुनिया के लिए खास; क्या है मान्यता-इतिहास?

भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा का है। यह यात्रा भारत के ओडिशा राज्य के पुरी शहर में होती है। इस यात्रा को दुनियाभर के लोग देखने आते हैं और बहुत ही खास माना जाता है।

क्या है रथ यात्रा?
हर साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष द्वितीया तिथि को भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा अपने-अपने रथों पर सवार होकर पुरी के मंदिर से निकलते हैं और गुंडिचा मंदिर की ओर जाते हैं।
लोग इन रथों को खींचते हैं और भगवान का दर्शन करते हैं। यह बहुत बड़ा त्योहार है।

मान्यताएं और कहानी:
माना जाता है कि भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई और बहन के साथ नौ दिनों के लिए अपने मौसी के घर, गुंडिचा मंदिर जाते हैं।
यह यात्रा सभी के लिए है, चाहे कोई भी जाति या समुदाय हो।
रथ पर भगवान का दर्शन करने से पाप धुल जाते हैं और मोक्ष मिलता है।
रथ खींचना बहुत पवित्र काम माना जाता है।
यात्रा शुरू होने से पहले, भगवान स्नान कर बीमार हो जाते हैं और फिर ठीक होकर लौटते हैं।
भगवान जगन्नाथ अपनी पत्नी लक्ष्मी से मिलते हैं। लक्ष्मी उनके साथ नहीं जातीं, लेकिन बाद में रथ यात्रा के दौरान मिलती हैं।

इतिहास:
यह परंपरा 12वीं सदी से चली आ रही है।
पुरी का मंदिर उस समय बना था।
कभी-कभी आक्रमण और युद्ध के कारण यह रथ यात्रा रुक जाती थी।
आज यह भारत का सबसे बड़ा धार्मिक त्योहार है।

रथ यात्रा का रास्ता:
यह यात्रा पुरी के मुख्य मंदिर से शुरू होती है और करीब तीन किलोमीटर दूर गुंडिचा मंदिर तक जाती है।
तीन बड़े रथ होते हैं, एक भगवान जगन्नाथ का, दूसरे बलभद्र का और तीसरे सुभद्रा का।
हर साल नए रथ बनाए जाते हैं।

इस बार की तैयारियां:
इस साल करीब 30 लाख श्रद्धालु पुरी पहुंचने की उम्मीद है।
सुरक्षा के लिए बहुत व्यवस्था की गई है, जैसे 12,000 पुलिसकर्मी, सीसीटीवी, अस्पताल, साफ-सफाई, यातायात व्यवस्था, ट्रेनों का संचालन आदि।
श्रद्धालु रथ खींचने में भाग लेते हैं और भगवान का दर्शन करते हैं।

यह त्योहार भगवान की भक्ति और श्रद्धा का प्रतीक है, और पूरे देश-विदेश से लोग इसमें भाग लेने आते हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button