कोई भी देश शिक्षा संबंधी चुनौतियों से अकेले निपट नहीं सकता: प्रह्लाद जोशी

भुवनेश्वर: केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने साझा चुनौतियों से निपटने के लिए ब्रिक्स देशों से मिलकर काम करने का आह्वान करते हुए शुक्रवार को कहा कि नवाचार और सतत विकास जैसे मुद्दों का समाधान अकेले नहीं किया जा सकता। ओडिशा की राजधानी में आयोजित ब्रिक्स देशों के शिक्षा मंत्रियों की 13वीं बैठक को संबोधित करते हुए जोशी ने कहा कि ब्रिक्स की भारत की अध्यक्षता का मार्गदर्शन मुश्किल परिस्थितियों से उबरने की क्षमता, नवाचार, सहयोग और सतत विकास के सिद्धांत कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, ”ब्रिक्स की भारत की अध्यक्षता मुश्किल परिस्थितियों से उबरने की क्षमता, नवाचार, सहयोग और सतत विकास पर आधारित है।” उन्होंने कहा कि इन चारों स्तंभों का शिक्षा क्षेत्र के लिए विशेष महत्व है। मुश्किल परिस्थितियों से उबरने की क्षमता के महत्व को स्पष्ट करते हुए जोशी ने कहा कि शिक्षा प्रणाली ऐसी होनी चाहिए, जो महामारियों, आर्थिक अनिश्चितताओं, जलवायु संबंधी चुनौतियों और तेजी से हो रहे प्रौद्योगिकी बदलावों से उत्पन्न व्यवधानों का सामना करने में सक्षम हो।

नवाचार पर जोर देते हुए मंत्री ने कहा कि शिक्षा प्रणाली स्थिर नहीं रह सकती। उन्होंने कहा, ”ऐसा इसलिए कि हमारे आसपास की दुनिया तेजी से बदल रही है। शिक्षा प्रणाली को प्रत्येक नयी पीढ़ी की आकांक्षाओं के अनुरूप लगातार विकसित होना होगा और युवाओं को उन अवसरों के लिए तैयार करना होगा, जिनका आज शायद अस्तित्व भी नहीं है।” सहयोग की आवश्यकता पर बल देते हुए जोशी ने कहा कि साझा चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए सहयोग और सतत विकास अत्यंत आवश्यक हैं।

उन्होंने कहा, ”हम सभी मिलकर इन चुनौतियों से निपट सकते हैं, लेकिन हममें से कोई भी अकेले इनका समाधान नहीं कर सकता। जो ज्ञान हम सृजित करें, जो प्रौद्योगिकी विकसित करें और जिन संस्थानों को हम मजबूत करें, उनका लाभ केवल वर्तमान पीढ़ी ही नहीं बल्कि आने वाली पीढि़यों को भी मिलना चाहिए।”

भारत की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, इंडोनेशिया, ईरान, इथियोपिया और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, बैठक में प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा , कौशल विकास, अनुसंधान एवं नवाचार, शैक्षणिक योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता तथा शैक्षणिक नेतृत्व जैसे प्रमुख विषयों पर विचार-विमर्श होने की संभावना है। मंत्रिस्तरीय बैठक से पहले पांच अगस्त को शिक्षा मंत्रालय ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 के तहत यहां ब्रिक्स के वरिष्ठ अधिकारियों की तीसरी बैठक आयोजित की थी।

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