
कोलकाता: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बृहस्पतिवार को कहा कि यादवपुर विश्वविद्यालय में ”देश विरोधी ताकतों” के हिमायतियों का ”इलाज” करना जरूरी हो गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर परिसर में ‘कश्मीर मांगे आजादी’ के नारे लगाए गए, तो सरकार महात्मा गांधी की नहीं बल्कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस की भाषा में जवाब देगी।
शुभेंदु ने मांसाहार को लेकर बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री के दिए गए बयान पर हालिया विवाद का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने कोलकाता पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया है कि हाल में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के विरोध प्रदर्शन के दौरान शास्त्री के पुतले जलाने वालों को गिरफ्तार किया जाए।
उन्होंने शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के अंतर-विश्वविद्यालय तबादले को सक्षम बनाने वाले एक संशोधन विधेयक को विधानसभा में पेश किए जाने के दौरान कहा कि इस प्रस्तावित कानून के जरिए ”तथाकथित पंडितों” को नए स्थापित संस्थानों में भेजा जाएगा, जिससे उन नए संस्थानों को फायदा होगा।
शुभेंदु ने कहा, ”यह विधेयक संस्थानों की स्वायत्तता और सरकार के प्रति जवाबदेही के बीच संतुलन बनाएगा… इससे पीएचडी पर्यवेक्षण और परियोजनाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा… जो लोग इस विधेयक के प्रावधानों से खुश नहीं हैं, वे अपनी नौकरी छोड़ सकते हैं।” उन्होंने कहा कि यादवपुर विश्वविद्यालय को 1,300 करोड़ रुपये का अनुदान मिलेगा, लेकिन ‘भारत तेरे टुकड़े होंगे’ का नारा लगाने वालों के ”टुकड़े-टुकड़े” कर दिए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने यादवपुर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति गोपाल सेन की 1970 में हुई हत्या का जिक्र करते हुए कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो सरकार इस घटना की जांच के लिए एक समिति का गठन करेगी। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष को भगवा रंग का ‘अनादर’ करने के कारण पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में हार का सामना करना पड़ा। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि आगामी उपचुनावों में भी विपक्षी दलों की हार तय है।



