
सहारनपुर में नकली नोटों के बाद अब नकली सिक्के तैयार कर उन्हें बाजार में चलाने वाले गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। शहर कोतवाली पुलिस ने एसओजी और सर्विलांस टीम के साथ कार्रवाई करते हुए गिरोह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों के पास से करीब 1.28 लाख रुपये के नकली सिक्के, सिक्के बनाने वाली छह मशीनें, डाई और बड़ी मात्रा में अधबने सिक्के बरामद किए गए हैं। जांच में गिरोह द्वारा अब तक 70 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के नकली सिक्के बाजार में खपाने की बात सामने आई है।
25 साल से नकली सिक्के बनाने में लगा था सरगना
पुलिस पूछताछ में गिरोह के कथित मास्टरमाइंड उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह को लेकर अहम जानकारी सामने आई है। पंजाब के मोहाली का रहने वाला उपकार कथित तौर पर वर्ष 2001 से नकली सिक्के बनाने के कारोबार में शामिल था।
बताया गया है कि आरोपी पहले सर्राफ का काम करता था, जिसके कारण उसे धातु और सिक्के बनाने की प्रक्रिया की जानकारी थी। वर्ष 2017 में दिल्ली पुलिस ने उसे नकली सिक्कों के मामले में गिरफ्तार किया था। उसके ऊपर एक लाख रुपये का इनाम भी घोषित किया गया था।
तिहाड़ जेल में बनी थी गिरोह की योजना
पुलिस के मुताबिक, तिहाड़ जेल में रहने के दौरान उपकार की मुलाकात आरोपी हिमांशु उर्फ गुल्लू से हुई थी। पूछताछ में सामने आया कि जेल के दौरान दोनों के बीच नकली सिक्के बनाने के कारोबार को आगे बढ़ाने की योजना बनी।
दोनों वर्ष 2021 में जेल से बाहर आने के बाद अपने नेटवर्क को मजबूत करने में जुट गए। धीरे-धीरे उन्होंने अन्य लोगों को गिरोह से जोड़ा और नकली सिक्कों के निर्माण तथा उन्हें अलग-अलग इलाकों में पहुंचाने का काम शुरू किया।
सहारनपुर में फैक्टरी लगाने की थी तैयारी
पुलिस जांच के अनुसार, गिरोह सहारनपुर में भी नकली सिक्कों के निर्माण के लिए एक फैक्टरी स्थापित करने की तैयारी कर रहा था। इसके लिए स्थानीय स्तर पर लोगों को जोड़ने और आवश्यक इंतजाम करने की प्रक्रिया चल रही थी।
हालांकि, इससे पहले ही पुलिस को गिरोह की गतिविधियों की जानकारी मिल गई और टीम ने कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि सहारनपुर में इस नेटवर्क से कौन-कौन लोग जुड़े थे और प्रस्तावित फैक्टरी की तैयारी कितनी आगे बढ़ चुकी थी।
एक सिक्के की लागत करीब पांच रुपये बताई
पुलिस की जांच में नकली सिक्कों के कारोबार से जुड़े आर्थिक पहलू भी सामने आए हैं। पूछताछ के अनुसार, 20 रुपये के एक नकली सिक्के को तैयार करने में लगभग पांच रुपये की लागत आती थी।
पुलिस के मुताबिक, गिरोह को बाजार में चार हजार रुपये मूल्य के नकली सिक्के खपाने पर करीब 400 रुपये कमीशन मिलता था। जांच में सामने आए अनुमान के अनुसार, आरोपियों ने करीब 3.5 करोड़ सिक्के तैयार किए होंगे।
पुलिस ने इसी आधार पर अनुमान लगाया है कि इनके निर्माण पर लगभग 17.50 करोड़ रुपये खर्च हुए और करीब 52.50 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ। वहीं, पुलिस ने गिरोह द्वारा 70 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के नकली सिक्के बाजार में खपाने का दावा भी किया है।
बाजार और टोल प्लाजा तक पहुंचाए जाते थे सिक्के
पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि नकली 20 रुपये के सिक्कों को अलग-अलग स्थानों पर चलाया जाता था। इनमें सामान्य बाजार के अलावा सरकारी शराब के ठेके और टोल प्लाजा भी शामिल बताए गए हैं।
सिक्कों को तैयार करने और उनकी फिनिशिंग के लिए गिरोह के पास मशीनों के साथ डाई, घिसाई के पत्थर और अन्य उपकरण मौजूद थे।
हरियाणा में निर्माण, कई राज्यों में सप्लाई
पुलिस के मुताबिक, गिरोह हरियाणा के सोनीपत में नकली सिक्के तैयार करता था। इसके बाद इन्हें हरियाणा के अलावा पंजाब, उत्तर प्रदेश और बिहार के विभिन्न इलाकों में खपाया जाता था।
पुलिस अब गिरोह के पूरे नेटवर्क और इससे जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने में जुटी है।
आरोपियों की संपत्तियों की भी होगी जांच
एसएसपी अभिनंदन सिंह के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों की आर्थिक गतिविधियों और संपत्तियों की जांच की जाएगी। पुलिस यह पता लगाएगी कि आरोपियों ने अवैध गतिविधियों से कितनी संपत्ति अर्जित की है।
यदि जांच में कोई संपत्ति अपराध से अर्जित पाई जाती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार जब्ती की कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही पुलिस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और उनके आर्थिक नेटवर्क की भी पड़ताल कर रही है।
आरोपी हिमांशु पर पहले से तीन मुकदमे
पुलिस के अनुसार, आरोपी हिमांशु उर्फ गुल्लू के खिलाफ पहले से तीन मुकदमे दर्ज हैं। ये मामले वर्ष 2015 में सहारनपुर के नानौता थाने में दर्ज किए गए थे।
वहीं, मुख्य आरोपी उपकार लूथरा के खिलाफ दिल्ली में भी मुकदमे दर्ज होने की जानकारी पुलिस ने दी है।
पांच आरोपियों की गिरफ्तारी
पुलिस ने इस मामले में उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह, हिमांशु उर्फ गुल्लू, कुलदीप, संतोष चौरसिया उर्फ जनार्दन और अनुराग पाल उर्फ लंकेश को गिरफ्तार किया है।
इनमें उपकार लूथरा मोहाली, हिमांशु और कुलदीप सहारनपुर, संतोष चौरसिया बिहार के मधुबनी तथा अनुराग पाल संत रविदास नगर जिले का निवासी बताया गया है।
पुलिस की जांच अभी जारी
पुलिस को पिछले कुछ समय से बाजार में नकली सिक्के चलाए जाने की शिकायतें मिल रही थीं। इसके बाद शहर कोतवाली पुलिस, एसओजी और सर्विलांस टीम ने संयुक्त रूप से जांच शुरू की।
जांच के दौरान कुछ संदिग्धों को हिरासत में लिया गया। पूछताछ के बाद गिरोह के अन्य सदस्यों के बारे में जानकारी मिली और कार्रवाई करते हुए कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं और नकली सिक्कों की सप्लाई किन-किन क्षेत्रों तक पहुंची है।



