ज्ञानवापी शृंगार गौरी मामले की पोषणीयता पर सवाल उठाने वाली याचिका खारिज, सुनवाई जारी रहेगी

Author: Nandkishoryadav
UPDATED: Mon, 12 Sep 2022 06:36 PM
ज्ञानवापी शृंगार गौरी मामले की पोषणीयता पर सवाल उठाने वाली याचिका खारिज, सुनवाई जारी रहेगी
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वाराणसी. वाराणसी की जिला अदालत ने सोमवार को ज्ञानवापी शृंगार गौरी मामले की पोषणीयता पर सवाल उठाने वाली मुस्लिम पक्ष की याचिका खारिज कर दी और कहा कि वह पूजा के अधिकार की मांग वाली याचिका पर सुनवाई जारी रखेगी. मुस्लिम पक्ष ने अदालत के इस फैसले को उच्­च न्­यायालय में चुनौती देने की घोषणा की है. हिन्दू पक्ष के वकील विष्णु जैन ने बताया कि जिला न्यायाधीश ए.के. विश्वेश ने मामले की पोषणीयता पर सवाल उठाने वाली याचिका को खारिज करते हुए सुनवाई जारी रखने का निर्णय किया.

अदालत में मौजूद एक वकील ने बताया कि जिला न्यायाधीश ने दोनों पक्षों के वादियों और उनके अधिवक्­ताओं समेत 32 लोगों की मौजूदगी में 26 पन्­नों का आदेश 10 मिनट के अंदर पढ़कर सुनाया. अदालत ने गत 24 अगस्­त को इस मामले में अपना आदेश 12 सितंबर तक के लिए सुरक्षित रख लिया था.

मुस्लिम पक्ष के वकील मेराजुद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि जिला अदालत के इस निर्णय को उच्­च न्­यायालय में चुनौती दी जाएगी.
उल्लेखनीय है कि इस मामले में पांच महिलाओं ने याचिका दायर कर हिंदू देवी-देवताओं की दैनिक पूजा की अनुमति मांगी थी, जिनके विग्रह ज्ञानवापी मस्जिद की बाहरी दीवार पर स्थित हैं. अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद समिति ने ज्ञानवापी मस्जिद को वक्फ संपत्ति बताते हुए कहा था कि मामला सुनवाई योग्य नहीं है. मामले में अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी.

जिला जज ने अपने आदेश में कहा, ”दलीलों और विश्­लेषण के मद्देनजर मैं इस निष्­कर्ष पर पहुंचा हूं कि यह मामला उपासना स्­थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम 1991, वक्­फ अधिनियम 1995 और उप्र श्री काशी विश्­वनाथ मंदिर अधिनियम 1983 तथा बचाव पक्ष संख्­या 4 (अंजुमन इंतजामिया) द्वारा दाखिल याचिका 35 सी के तहत र्विजत नहीं गया है, लिहाजा इसे निरस्­त किया जाता है.” अदालत के यह फैसला सुनाने के बाद कुछ लोग सड़कों पर आ गये और मिठाइयां बांटकर खुशियां मनायीं.

गौरतलब है कि उच्­चतम न्­यायालय ने गत 20 मई को ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर हिंदू श्रद्धालुओं की याचिका को मामले की जटिलता के मद्देनजर वाराणसी के सिविल न्यायाधीश (सीनियर डिवीजन) की अदालत से जिला न्यायाधीश, वाराणसी की अदालत में हस्तांतरित कर दिया था. शीर्ष अदालत ने कहा था कि अच्छा होगा यदि इस मामले की सुनवाई 25-30 वर्ष का अनुभव रखने वाले किसी वरिष्­ठ न्यायाधीश से कराई जाये. कराने के आदेश दिये थे.

न्­यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़, न्­यायमूर्ति सूर्य कांत और न्­यायमूर्ति पी एस नरसिम्­हा की पीठ ने कहा था कि वह सिविल जज की योग्­यता को कमतर नहीं आंक रही है, मगर इस मामले की पेचीदगी को देखते हुए यह बेहतर है कि कोई वरिष्­ठ न्­यायिक अधिकारी इस मामले की सुनवाई करे. इसके बाद इस मामले को जिला न्­यायाधीश ए के विश्­वेश की अदालत में स्­थानांतरित कर दिया गया था. अदालत के निर्णय सुनाये जाने की संवेदनशीलता के मद्देनजर वाराणसी जिला प्रशासन ने धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी थी और सुरक्षा के कड़े बंदोबस्­त किये थे.

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