प्रसिद्धि पाने का राजनीतिक दांव है मेरे पिता पर जूता फेंकना : भाजपा सांसद

बदायूं. समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता स्वामी प्रसाद मौर्य पर एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान जूता फेंकने की घटना के दो दिन बाद उनकी पुत्री व भाजपा सांसद संघमित्रा मौर्य ने बुधवार को इसे प्रसिद्धि पाने का राजनीतिक दांव करार दिया. अपने संसदीय क्षेत्र में संवाददाताओं से बातचीत में भाजपा सांसद ने कहा, ”यह कोई नई चीज नहीं है. लेकिन एक जनप्रतिनिधि और लोकतंत्र का हिस्सा होने के नाते मुझे लगता है कि इतने नीचे स्तर पर गिरना गलत है.”

संघमिश्रा ने कहा, ”जहां तक मुझे याद है, यह सिलसिला 2008 से शुरू हुआ. उस वक्त अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश पर जूता फेंका गया था. उसके बाद तो जूता फेंकने वाला व्यक्ति जैदी हीरो बन गया, उसने चुनाव लड़ा और वह चुनाव जीत गया.” भाजपा नेता ने कहा, ”2009 में तत्कालीन गृह मंत्री पी चिदंबरम पर जूता फेंका गया. दिल्ली में आपके पत्रकार साथी ने फेंका था. वह प्रसिद्ध हो गया, चुनाव लड़ा और विधायक बन गया. इसलिए मुझे लगता है कि लोगों द्वारा प्रसिद्धि पाने और खुद को स्थापित करने के राजनीतिक दांव के तहत जूते और स्याही फेंकने का काम किया जाता है.”

संघमिश्रा ने कहा, ”लेकिन प्रसिद्ध होने के लिए लोकतंत्र में इस निचले स्तर तक गिरना निदंनीय है और मैं इसका विरोध करती हूं. यह कोई नई चीज नहीं है.” लखनऊ में सोमवार को पार्टी के एक कार्यक्रम में स्वामी प्रसाद मौर्य पर जूता फेंका गया था. हालांकि जूता उन तक नहीं पहुंचा और पार्टी कार्यकर्ताओं ने जूते फेंकने वाले व्यक्ति को पकड़ लिया और पिटाई करने के बाद उसे पुलिस को सौंप दिया.

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