सोरेन ने प्रधानमंत्री मोदी से आदिवासियों के लिए विशेष योजनाएं लाने का आग्रह किया

खूंटी. झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से आदिवासियों, विशेषकर राज्य में खनिज संसाधनों के दोहन के कारण विस्थापित लोगों के लिए विशेष योजनाएं लाने का आग्रह किया. खूंटी में मोदी की मौजूदगी में एक जनसभा को संबोधित करते हुए सोरेन ने कहा कि इतिहासकार आदिवासियों को इतिहास में वह जगह दिलाने में नाकाम रहे हैं, जिसके वे हकदार हैं.

उन्होंने कहा, “झारखंड ने कई मायनों में प्रगति की है. चाहे वह खनिज संपदा हो, खिलाड़ी हों या कोई अन्य विषय. प्रधानमंत्री जी, हम आग्रह करना चाहेंगे कि जंगलों में बड़ी संख्या में रहने वाले आदिवासियों को खनिज संसाधनों के दोहन के कारण विस्थापन का दंश झेलना पड़ता है. मुझे उम्मीद है कि वनों में रहने वाले लोगों के लिए एक विशेष कार्ययोजना तैयार की जाएगी.”

सोरेन ने कहा, “यह बहुत अजीब बात है कि हम चांद पर पहुंच गए हैं, लेकिन आदिवासी, आदिम जनजाति, दलित, पिछड़ी जातियां और अति पिछड़ी जातियां अपने अधिकारों के लिए अब भी लड़ रही हैं. इस अंतर को पाटना चाहिए. आज हम विकास की पंक्ति में खड़े अंतिम व्यक्ति की बात करते हैं, लेकिन दुर्भाग्य से यह सिर्फ कागजों तक ही सीमित नजर आ रहा है.” उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज सदियों से अपने अधिकारों के लिए लड़ रहा है और एक आदिवासी हमेशा फांसी पर चढ़ने के लिए तैयार रहता है.

सोरेन ने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इतिहासकारों ने आदिवासियों को आज तक वह जगह नहीं दी, जिसके वे हकदार हैं. आज आदिम जनजातियों के लिए खास घोषणा की गई है. आदिम जनजातियों का उत्थान हम सभी की जिम्मेदारी है. अगर आदिम जनजातियां नहीं बचेंगी, तो हमारा अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा.” मुख्यमंत्री देश में लगभग 28 लाख पीवीटीजी (विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह) के समग्र कल्याण के लिए 24,000 करोड़ रुपये के प्रधानमंत्री विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीएम पीवीटीजी) मिशन की शुरुआत का जिक्र कर रहे थे.

इससे पहले, उन्होंने आदिवासी नायक बिरसा मुंडा की जयंती के अवसर पर झारखंड में प्रधानमंत्री का स्वागत किया. उन्होंने कहा, “झारखंड एक आदिवासी बहुल राज्य है. मैं खुद भी आदिवासी समुदाय से आता हूं. आज केंद्र सरकार ने पूरे देश को पीवीटीजी मिशन से जोड़ दिया है. भगवान बिरसा मुंडा सिर्फ इस राज्य में ही नहीं, बल्कि पूरे देश में पूजे जाते हैं. झारखंड हमेशा से वीरों की भूमि रही है, चाहे वह भगवान बिरसा मुंडा हों, सिदो-कान्हू हों, चांद-भैरव हों, फूलो-झानो हों या तेलांग खड़िया हों.”

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