पाकिस्तान की डीपफेक वाली साजिश: खुफिया एजेंसियों का दावा- फैला रहा PM के फर्जी वीडियो; क्या करना चाहता है PAK?

Author: Nandkishoryadav
UPDATED: Sat, 01 Aug 2026 01:50 PM
पाकिस्तान की डीपफेक वाली साजिश: खुफिया एजेंसियों का दावा- फैला रहा PM के फर्जी वीडियो; क्या करना चाहता है PAK?
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नई दिल्ली: भारतीय खुफिया एजेंसियों ने दावा किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना बनाकर बनाए गए डीपफेक वीडियो की संख्या में अचानक बढ़ोतरी हुई है। एजेंसियों के अनुसार, इन वीडियो का मकसद युवाओं, खासकर छात्रों को भड़काकर दोबारा विरोध-प्रदर्शन के लिए उकसाना है।

खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो प्रसारित किए जा रहे हैं, जिनमें यह दावा किया जा रहा है कि प्रधानमंत्री हाल के छात्र प्रदर्शनों में शामिल युवाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई करना चाहते हैं।
पाकिस्तान कैसे रच रहा साजिश?
एक खुफिया अधिकारी के अनुसार, इन वीडियो को कथित तौर पर पाकिस्तान से संचालित सोशल मीडिया हैंडल बड़े पैमाने पर प्रसारित कर रहे हैं। अधिकारी का दावा है कि इनका मकसद छात्रों को फिर से सड़कों पर लाना और इस बार उनका गुस्सा सीधे प्रधानमंत्री मोदी की ओर मोड़ना है।
अधिकारी ने कहा कि हालिया प्रदर्शनों के दौरान छात्रों का मुख्य मुद्दा नीट पेपर लीक था। केंद्र सरकार की ओर से तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ कार्रवाई के बाद स्थिति शांत हो गई थी। उनका दावा है कि अब कथित पाकिस्तानी हैंडल केवल प्रधानमंत्री मोदी को निशाना बना रहे हैं और छात्रों के जरिए राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।

प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर कार्रवाई को लेकर क्या बोली थी सरकार?
रिपोर्ट के अनुसार, सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ कोई दंडात्मक या कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। पिछले सप्ताह दिल्ली, बिहार, पश्चिम बंगाल, असम और महाराष्ट्र की सरकारों ने भी छात्रों को ऐसा भरोसा दिया था।

गुरुवार को दिल्ली सरकार ने भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय राजधानी में नीट-यूजी विरोध प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ कोई प्रतिकूल कानूनी कार्रवाई नहीं की जा रही है। इसके साथ ही प्रदर्शन से जुड़े 13 एफआईआर मामलों की कार्यवाही बंद करने का आदेश भी दिया गया।

भ्रामक दावों पर क्या बोलीं खुफिया एजेंसियां?
एक अधिकारी ने कहा कि सरकार ने साफ संकेत दिया है कि वह टकराव नहीं, बल्कि समाधान चाहती है। उनके अनुसार, इसी वजह से कथित आईएसआई समर्थित तत्वों ने फर्जी वीडियो और भ्रामक दावों का प्रसार तेज कर दिया है।

अधिकारी का दावा है कि इन तत्वों ने प्रधानमंत्री मोदी के कई डीपफेक वीडियो प्रसारित किए हैं, जिनमें उन्हें यह कहते हुए दिखाया गया है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। एक बदले हुए वीडियो में प्रधानमंत्री को यह कहते हुए सुनाया जा रहा है कि भाजपा सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने वालों को इसके परिणाम भुगतने होंगे।

पुराने वीडियो में की गई छेड़छाड़
रिपोर्ट के अनुसार, कई पाकिस्तानी सोशल मीडिया हैंडल ने प्रधानमंत्री के उस पुराने वीडियो का इस्तेमाल किया है, जिसमें उन्होंने पेपर माफिया के खिलाफ कार्रवाई की बात कही थी और परीक्षा व्यवस्था को लेकर छात्रों के सकारात्मक सुझावों की सराहना की थी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि हालिया वीडियो में प्रधानमंत्री ने प्रदर्शन के दौरान अपने खिलाफ लगाए गए आपत्तिजनक नारों के बाद संयम और माफी की अपील की थी। प्रधानमंत्री ने कहा था, “गालियां किसी समस्या का समाधान नहीं हैं। जो भटक गए हैं, उन्हें सही रास्ता दिखाएं। आइए, हम सब मिलकर भारत के लिए काम करें।”

‘भारत में भ्रम फैलाने की कोशिश’
एक अन्य अधिकारी का दावा है कि सरकार द्वारा स्थिति संभाल लिए जाने और प्रदर्शन समाप्त हो जाने से पाकिस्तान समर्थित तत्व निराश हैं। उनके अनुसार, वे चाहते थे कि आंदोलन लंबा चले, जिससे व्यवस्था पर दबाव बने। अधिकारी ने कहा कि यह कथित तौर पर लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई भारत सरकार के प्रति लोगों का भरोसा कमजोर करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि भारत में अशांति फैलाने के उद्देश्य से ऐसे फर्जी वीडियो का प्रसार पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके), बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में मौजूद आंतरिक समस्याओं से ध्यान भटकाने की कोशिश भी हो सकता है।

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