चंडीगढ़ के पंचकूला सेक्टर-20 स्थित संस्कृति मॉडल स्कूल में बहुत ही हिंसक घटना हुई है।
आरोप है कि तीसरी कक्षा के छात्र ने एक केजी में पढ़ने वाली बच्ची को पिता के बुलाने का झांसा देकर स्कूल की पहली मंजिल पर ले गया और वहां उसके बाल पकड़कर सिर को डेस्क, पत्थरों और गमले से कई बार पटका।
बच्ची के बेहोश होने के बाद भी मारपीट की गई। गंभीर हालत में बच्ची को चंडीगढ़ PGI रेफर किया गया। बेहोश होने के बाद भी डस्टबिन से हमला किया। अंत में बच्ची को मरा हुआ समझकर उसे छोड़कर वह बाहर निकल गया। बच्ची की हालत नाज़ुक है और वह पीजीआई में भर्ती है।
आरोप है कि बच्ची के बेहोश होने के बाद भी छात्र उसे घसीटता रहा और पत्थरों से मारता रहा। गंभीर रूप से घायल इस बच्ची को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है।
बच्चों में हिंसा का कौन ज़िम्मेदार है..मोबाइल? पैरेंटिंग? एकल परिवार? या सब मिला जुला? बहुत डरावना है ये..बचपन कहाँ जा रहा है।
इस घटना में स्कूल की अक्षम्य लापरवाही दिख रही है। प्राइवेट स्कूल मनमानी फीस वसूलते हैं और कॉपी किताब के नाम पर मोटा पैसा लेते हैं लेकिन बच्चों पर जरा भी ध्यान नहीं रखते।
सुरक्षा के नाम पर सीसीटीवी लगाकर खानापूर्ति करते हैं और जिन अधिकारियों को स्कूलों पर निगरानी रखनी चाहिए वे बस धन उगाही करते हैं।
पंचकूला के संस्कृति मॉडल स्कूल में जो हुआ, वो सिर्फ एक घटना नहीं है। स्क्रीन, हिंसक कंटेंट, परिवार की अनदेखी और स्कूलों में व्यवहार की शिक्षा की कमी — सब मिलकर बच्चों को आक्रामक बना रहे हैं। डर इस बात का है कि आने वाले दिनों में ऐसी वारदातें और बढ़ेंगी।
मांग साफ है:
LKG से 10वीं तक एक नया अनिवार्य विषय शुरू करो — व्यवहार, नैतिकता, दूसरों के प्रति संवेदना, नियम और बुनियादी कानून।
जापान Doutoku से यह करता है। भारत को भी करना होगा। सिर्फ मार्क्स और साइंस से इंसान नहीं बनता।
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