अरपा नदी से अवैध रूप से रेत चुराने के मामले में अदालत ने आरोपी को तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश सिराजुद्दीन कुरैशी ने फैसला सुनाते हुए टिप्पणी की कि आखिरी पेड़ कटने, नदी के जहरीली होने और आखिरी मछली पकड़े जाने के बाद ही इन्सान को यह समझ आएगा कि वह पैसे को खा नहीं सकता। अदालत ने दोषी पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
पर्यावरण क्षति पर अदालत का संदेश
विशेष न्यायाधीश ने फैसले में अमेरिका की आदिम जनजाति की एक प्रसिद्ध कहावत का उल्लेख करते हुए प्रकृति को पहुंचाए जा रहे नुकसान के गंभीर असर को रेखांकित किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्राकृतिक संसाधनों का नुकसान केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका सीधा असर जीवन और आने वाली पीढ़ियों पर भी पड़ता है। इसके साथ ही फैसले में पोप फ्रांसिस की टिप्पणी का भी विशेष रूप से उल्लेख किया गया, जिसमें जैव विविधता को नष्ट करने को ईश्वर की रचना की अखंडता पर हमला करार दिया गया है।
विशेष न्यायाधीश ने फैसले में अमेरिका की आदिम जनजाति की एक प्रसिद्ध कहावत का उल्लेख करते हुए प्रकृति को पहुंचाए जा रहे नुकसान के गंभीर असर को रेखांकित किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्राकृतिक संसाधनों का नुकसान केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका सीधा असर जीवन और आने वाली पीढ़ियों पर भी पड़ता है। इसके साथ ही फैसले में पोप फ्रांसिस की टिप्पणी का भी विशेष रूप से उल्लेख किया गया, जिसमें जैव विविधता को नष्ट करने को ईश्वर की रचना की अखंडता पर हमला करार दिया गया है।