बिना तलाक लिये विवाहित व्यक्ति ‘लिव-इन’ संबंध में नहीं रह सकता

प्रयागराज. इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि एक विवाहित व्यक्ति अपनी पत्नी/पति से तलाक लिये बगैर कानूनी रूप से ‘लिव-इन’ संबंध में नहीं रह सकता. अदालत ने इस टिप्पणी के साथ ही एक जोड़े की सुरक्षा के अनुरोध वाली याचिका खारिज कर दी.
न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह ने कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता पूर्ण नहीं है और यह मौजूदा जीवन साथी के संवैधानिक अधिकारों का हनन नहीं कर सकती.

याचिकाकर्ताओं ने इस अनुरोध के साथ अदालत का रुख किया था कि दोनों बालिग हैं और पति पत्नी की तरह साथ रह रहे हैं और उनके जीवन को प्रतिवादी से खतरा है. वहीं दूसरी ओर, राज्य सरकार के वकील ने याचिका का यह कहते हुए विरोध किया कि इन याचिकाकर्ताओं का कृत्य अवैध है क्योंकि प्रथम याचिकाकर्ता पहले से ही दिनेश नाम के व्यक्ति की पत्नी है और उसने तलाक नहीं लिया है.

अदालत ने मंगलवार को दिए अपने निर्णय में कहा, ”दो वयस्क व्यक्तियों की निजी आजादी में हस्तक्षेप करने का किसी को भी अधिकार नहीं है, लेकिन स्वतंत्रता का अधिकार या निजी स्वतंत्रता का अधिकार पूर्ण नहीं है और इस पर कुछ पाबंदियां भी हैं. एक व्यक्ति की स्वतंत्रता वहां खत्म हो जाती है, जहां से दूसरे व्यक्ति का संवैधानिक अधिकार शुरू होता है.”

अदालत ने कहा, ”एक पति या पत्नी का अपने जीवन साथी के साथ रहने का संवैधानिक अधिकार है जिससे उसे निजी स्वतंत्रता के नाम पर वंचित नहीं किया जा सकता और संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन करके ऐसी सुरक्षा नहीं दी जा सकती.” अदालत ने कहा, ”यदि याचिकाकर्ता पहले से विवाहित हैं और उसका जीवन साथी जीवित है तो उसे बिना तलाक लिये तीसरे व्यक्ति के साथ ‘लिव-इन’ संबंध में रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती.”

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