महज 25 मिलीसेकंड में भवनों, सड़कों और बिजली लाइन की गड़बड़ियां ढूंढेगा एआई ड्रोन

इंदौर: इंदौर के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) ने दुर्गम क्षेत्रों में स्थित ढांचों की पैनी निगरानी के लिए कृत्रिम मेधा (एआई) से लैस ड्रोन विकसित किया है। यह ड्रोन बिजली की हाईटेंशन लाइनों और गैस पाइपलाइनों से लेकर भवनों और सड़कों की दरारों और अन्य ढांचागत गड़बड़ियों का महज 25 मिलीसेकंड के भीतर पता लगा सकता है।

आईआईटी इंदौर के प्रोफेसर अभिरूप दत्ता ने बताया कि करीब डेढ़ साल में विकसित इस ड्रोन की तकनीक मानव रहित विमान (यूएवी) को एआई और ‘मशीन र्लिनंग’ के साथ जोड़ती है। दत्ता ने कहा,”इस ड्रोन ने उन्नत एआई उपकरणों का उपयोग करके अलग-अलग ढांचों की दरारों और अन्य गड़बड़ियों का केवल 25 मिलीसेकंड के भीतर पता लगाने और संबंधित डेटा को सुव्यवस्थित रूप से पेश करने में 98.70 प्रतिशत की ऊंची सफलता दर हासिल की है।”
उन्होंने बताया कि अगर विशिष्ट अनुसंधान किया जाए, तो एआई ड्रोन को रेल पटरियों की दरारों और अन्य गड़बड़ियों का पता लगाने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है। दत्ता ने एआई ड्रोन के अनुसंधान की अगुवाई की। अनुसंधान दल में आईआईटी के छात्र कुमार शेषांक शेखर और संस्थान की पीएचडी शोधार्थी हर्षा अविनाश तांती भी शामिल थीं।

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