अमेरिका को आई भारत की याद, चीन से निपटने के लिए पैक्स सिलिका में स्वागत को तैयार

अमेरिका अब अपनी तकनीकी सप्लाई चेन के लिए पूरी तरह चीन पर निर्भर नहीं रहना चाहता। इसके लिए दुनिया की महाशक्ति अमेरिका को चीन के बढ़ते तकनीकी ताकत से निपटने के लिए एक बार फिर भारत की याद आई है। अमेरिकी विदेश उप सचिव (आर्थिक मामलों के) जैकब हेलबर्ग ने गुरुवार को आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि भारत फरवरी 2026 में पैक्स सिलिका गठबंधन में शामिल होगा। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का इस समूह में आना एक मील का पत्थर माना जा रहा है।

क्या है पैक्स सिलिका का उद्देश्य?

पैक्स सिलिका अमेरिका के नेतृत्व वाली एक ऐसी रणनीतिक पहल है, जिसे दिसंबर 2025 में शुरू किया गया था। इसका मुख्य मकसद वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और सेमीकंडक्टर की सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाना है। अमेरिका चाहता है कि आधुनिक तकनीक केवल भरोसेमंद लोकतांत्रिक देशों के पास ही रहे और चीन जैसे देशों पर निर्भरता कम हो सके। इस गठबंधन में अमेरिका के साथ जापान, दक्षिण कोरिया, इजरायल, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर और ब्रिटेन जैसे देश पहले से ही शामिल हैं। हाल ही में कतर और संयुक्त अरब अमीरात भी इसके सदस्य बने हैं।

समूह में भारत के आने से होगा ये लाभ
जैकब हेलबर्ग ने जोर देकर कहा कि शुरुआत में इस गठबंधन का केंद्र जापान और दक्षिण कोरिया जैसे मैन्युफैक्चरिंग हब थे। लेकिन अब सप्लाई चेन को पूरी तरह सुरक्षित करने के लिए भारत का साथ आना जरूरी है। भारत के पास न केवल खनिज संसाधन हैं, बल्कि एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए जरूरी सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की विशाल प्रतिभा भी है। अमेरिका का मानना है कि भारत के आने से हार्डवेयर मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में एक नया विकल्प तैयार होगा।

क्यों जरूरी है यह गठबंधन?
इस गठबंधन की कार्यप्रणाली बहुत खास होगी। इसमें फंक्शनल वर्किंग ग्रुप बनाए जाएंगे, जो हर देश की विशेषज्ञता का फायदा उठाएंगे। जैसे नीदरलैंड लिथोग्राफी में माहिर है, ताइवान फैब्रिकेशन में और भारत सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में अपनी ताकत दिखाएगा। हेलबर्ग ने स्पष्ट किया कि एआई की यह दौड़ 21वीं सदी की वैश्विक व्यवस्था को तय करेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि विरोधी देश सप्लाई चेन को राजनीतिक दबाव के हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। इसे रोकने के लिए पैक्स सिलिका जैसा आर्थिक सुरक्षा गठबंधन जरूरी है।

पहली मीटिंग ने नहीं शामिल का भारत
दिलचस्प बात यह है कि 2025 में जब पैक्स सिलिका की पहली बैठक हुई थी, तब भारत को इससे बाहर रखा गया था। इस फैसले की काफी आलोचना हुई थी। अब अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की हालिया नई दिल्ली यात्रा के बाद भारत को इसमें शामिल करने का रास्ता साफ हुआ है। राजदूत गोर ने कहा कि सुरक्षित और लचीली सिलिकॉन सप्लाई चेन बनाने के लिए भारत और अमेरिका का मिलकर काम करना अनिवार्य है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button