
मुंबई. बंबई उच्च न्यायालय ने एंटीलिया बम कांड और व्यवसायी मनसुख हिरन की हत्या के मामले में एक पूर्व पुलिसकर्मी को सोमवार को जमानत देने से इनकार करते हुए कहा कि उसके खिलाफ प्रथम दृष्टया सबूत मौजूद हैं. न्यायमूर्ति रेवती मोहिते डेरे और न्यायमूर्ति पृथ्वीराज चव्हाण की पीठ ने कहा कि पूर्व पुलिसकर्मी सुनील माने के खिलाफ लगे अपराध के आरोप गंभीर प्रकृति के हैं तथा साक्ष्यों और गवाहों के साथ छेड़छाड़ की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता.
महाराष्ट्र पुलिस में वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक के पद पर रहे माने को व्यवसायी मुकेश अंबानी के आवास एंटीलिया के बाहर विस्फोटकों से लदी एक एसयूवी मिलने और उसके बाद वाहन के मालिक हिरन की हत्या के मामले में अप्रैल 2021 में गिरफ्तार किया गया था.
आरोपी ने अदालत से जमानत की गुहार लगाते हुए दावा किया था कि उसके खिलाफ कोई सबूत नहीं है.
राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने दावा किया था कि हिरन की हत्या की साजिश रचने में माने संलिप्त था. हिरन कथित तौर पर 25 फरवरी, 2021 को उद्योगपति मुकेश अंबानी आवास के पास खड़ी मिली विस्फोटकों से भरी गाड़ी का मालिक था. हिरन का शव पांच मार्च 2021 को ठाणे के नजदीक खाई में मिला था.
पीठ ने कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत सामग्री प्रथम दृष्टया इस बात की ओर इशारा करती है कि किस तरह ”मनसुख हिरन की हत्या करने के लिए एक पूर्व नियोजित और बड़ी साजिश रची गई थी.” अदालत ने कहा कि आगे की जांच जारी है, और उसे ”उम्मीद और भरोसा है कि एनआईए उक्त जांच को शीघ्रता से तार्किक निष्कर्ष तक ले जाएगी और यह सुनिश्चित करेगी कि मृतक के परिवार को न्याय मिले”.
अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया हिरन की हत्या में माने की संलिप्तता और मिलीभगत के संकेत करने वाली पर्याप्त सामग्री मौजूद है. पीठ ने कहा कि चूंकि वह एक पुलिसकर्मी रहा है, इसलिए उसके द्वारा गवाहों को प्रभावित करने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है.
अदालत ने कहा, ”अपराध गंभीर प्रकृति के हैं, जिनमें गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम के कड़े प्रावधानों के तहत अपराध भी शामिल हैं. याचिकाकर्ता को जमानत पर रिहा करना उचित नहीं होगा, क्योंकि इससे मुकदमे में बाधा उत्पन्न होगी.” इस मामले में माने के अलावा पूर्व पुलिसकर्मी सचिन वाजे, प्रदीप शर्मा और विनायक शिंदे सहित नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया है.



