
नयी दिल्ली. तृणमूल कांग्रेस के सांसद साकेत गोखले ने विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की हार और खराब प्रदर्शन पर तंज करते हुए बुधवार को कहा कि क्षेत्रीय दलों को महत्व नहीं देने की प्रवृत्ति कांग्रेस के लिए चुनावी हार का कारण बन रही है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस का क्षेत्रीय दलों को उन स्थानों पर समायोजित नहीं करने का रवैया, जहां उन्हें लगता है कि वे जीत रहे हैं, उसके लिए घातक बन रहा है. सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में गोखले ने किसी पार्टी का नाम लिए बिना कहा कि अहंकार और क्षेत्रीय दलों को कम आंकने की प्रवृत्ति हार का कारण बन रही है.
तृणमूल कांग्रेस सांसद ने कहा, ”यह रवैया चुनावी हार की ओर ले जाता है – अगर हमें लगता है कि हम जीत रहे हैं, तो हम किसी भी क्षेत्रीय पार्टी को तवज्जो नहीं देंगे… लेकिन जिन राज्यों में हम पीछे हैं, वहां हमें क्षेत्रीय पार्टियों को जरूर तवज्जो देनी चाहिए.” उन्होंने कहा, ”अहंकार, हक और क्षेत्रीय पार्टियों को कम आंकना घातक साबित हो रहा है.” गोखले की यह टिप्पणी हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा सत्ता विरोधी लहर को मात देते हुए जीत की ‘हैट्रिक’ लगाने और कांग्रेस की वापसी की उम्मीदों को धराशायी करने के एक दिन बाद आई है. दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी कांग्रेस की चुनावी रणनीति पर सवाल उठाए थे.
हरियाणा में कांग्रेस के साथ गठबंधन की इच्छुक आम आदमी पार्टी (आप) के अध्यक्ष ने मंगलवार को कहा कि हाल के चुनावों से सबसे बड़ी सीख यह मिली है कि किसी को भी अति आत्मविश्वास नहीं करना चाहिए. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के महासचिव डी. राजा ने भी कहा कि कांग्रेस को हरियाणा के चुनाव परिणामों पर आत्मचिंतन करने की जरूरत है और महाराष्ट्र तथा झारखंड में आगामी चुनावों में ‘इंडिया’ गठबंधन के सभी सहयोगियों को साथ लेकर चलने की जरूरत है. विपक्षी दलों के गठबंधन ‘इंडिया’ ब्लॉक का हिस्सा रही तृणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल में लोकसभा चुनाव अकेले लड़ा था, जबकि कांग्रेस ने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और अन्य वामपंथी दलों के साथ गठबंधन किया था.
‘इंडिया’ के घटक दलों की नसीहत: क्षेत्रीय दलों को नजरअंदाज नहीं करे कांग्रेस
हरियाणा में कांग्रेस की करारी हार के बाद विपक्षी गठबंधन ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस’ (इंडिया) के कई घटक दलों ने बुधवार को मुख्य विपक्षी दल पर आरोप लगाया कि वह उन्हें नजरअंदाज कर रही है. उनका कहना है कि भविष्य के चुनावों में कांग्रेस की तरफ से यह रवैया नहीं दोहराया जाना चाहिए.
हरियाणा के नतीजे आने के बाद कांग्रेस को सबसे ज्यादा शिवसेना (यूबीटी) से आलोचना का सामना करना पड़ रहा है. उसने कहा कि कांग्रेस ने अन्य सहयोगी दलों की अनदेखी की जिसके कारण यह हार हुई है. तृणमूल कांग्रेस, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) और कुछ अन्य दलों के नेताओं ने भी आरोप लगाया कि कांग्रेस ने ‘इंडिया’ गठबंधन के घटक दलों के साथ मिलकर काम नहीं किया जिसके कारण हरियाणा में हार हुई.
कांग्रेस महाराष्ट्र में महा विकास अघाडी (एमवीए) गठबंधन के तहत चुनाव लड़ेगी और झारखंड में झारखंड मुक्ति मोर्चा और राष्ट्रीय जनता दल के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी, जो ‘इंडिया’ गठबंधन का ही हिस्सा हैं. कई विपक्षी नेताओं ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह जहां कमजोर है, वहां क्षेत्रीय दलों पर भरोसा करती है, लेकिन जब उसे लगता है कि वह किसी राज्य में मजबूत है, तो गठबंधन नहीं करती.
शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने कहा कि कांग्रेस का अति आत्मविश्वास हरियाणा में उसकी हार के लिए जिम्मेदार है.
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस केवल उन क्षेत्रों में सहयोगियों पर निर्भर रहती है जहां वह कमजोर है, लेकिन अपने मजबूत क्षेत्रों में उन्हें नजरअंदाज कर देती है.
शिवसेना (यूबीटी) की राज्यसभा सदस्य प्रियंका चतुर्वेदी ने भी कहा कि यह भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला था और कांग्रेस को अपनी हार पर आत्मचिंतन करने की जरूरत है. टीएमसी के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न बताने की शर्त पर इसी तरह का विचार व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस फिर से हार गई जब उसका सीधा मुकाबला भाजपा से था और क्षेत्रीय दल भाजपा को हराने में बेहतर प्रदर्शन करते हैं.
टीएमसी ‘इंडिया’ गठबंधन का हिस्सा है, लेकिन कांग्रेस के साथ समझौता नहीं हो पाने के बाद उसने पश्चिम बंगाल में अकेले लोकसभा चुनाव लड़ा था. कांग्रेस वाम दलों के साथ गठबंधन में लड़ी थी. टीएमसी नेता ने कहा कि शिवसेना (यूबीटी), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) और झामुमो जैसी पार्टियों के साथ आगामी चुनावों में बुरा व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए. कांग्रेस का नाम लिए बिना उस पर कटाक्ष करते हुए टीएमसी सांसद साकेत गोखले ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि क्षेत्रीय दलों को उन जगहों पर समायोजित नहीं करने का रवैया चुनावी हार का कारण बन रहा है , जहां उन्हें लगता है कि वे जीत रहे हैं.



