अरुणाचल के मुख्यमंत्री ने स्थानीय मान्यताओं के संरक्षण की प्रतिबद्धता दोहराई

ईटानगर: अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने राज्य के मूल निवासियों की मान्यताओं के संरक्षण और प्रोत्साहन के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने इन मान्यताओं को जनजातीय समुदायों की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आत्मा करार दिया।

मुख्यमंत्री ने बृहस्पतिवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा एक संदेश में कहा कि यहां की स्थानीय मान्यताएं प्रमुख धर्मों से भिन्न हैं, क्योंकि उनका उद्गम किसी शास्त्र से नहीं, बल्कि भूमि, स्मृति और जीवंत परंपराओं से हुआ है।

उन्होंने लिखा, ह्लये बाहर से नहीं आई हैं, बल्कि यहीं की भूमि में रची-बसी हैं। ये हमारे लोगों, हमारे जंगलों, पर्वतों, नदियों और पूर्वजों की आत्मा को संजोए हुए हैं खांडू ने कहा कि इस पारंपरिक ज्ञान की रक्षा के लिए राज्यभर में कई पहल शुरू की गई हैं।

मुख्यमंत्री खांडू ने कहा कि पारंपरिक शिक्षा और मूल्य प्रणाली को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से समुदाय-आधारित संस्थानों के माध्यम से आदि, गालो, न्यीशी और तांगसा जनजातियों के लिए छह स्वदेशी गुरुकुल स्थापित किए गए हैं।

इसके अलावा, 3,000 से अधिक पंजीकृत मूल निवासी पुजारियों को उनके अनुष्ठान संबंधी योगदान, मौखिक परंपराओं के संरक्षण और आध्यात्मिक मार्गदर्शन के लिए मानदेय प्रदान किया जा रहा है। खांडू ने बताया कि सांस्कृतिक संरक्षण के प्रयासों को संस्थागत रूप देने के लिए प्रत्येक जिले में जनजातीय सांस्कृतिक केंद्र विकसित किए जा रहे हैं जो दस्तावेजीकरण, प्रशिक्षण और प्रचार-प्रसार के केंद्र के रूप में कार्य करेंगे।

इन पहलों के पूरक रूप में राज्य भर में 50 स्वदेशी प्रार्थना केंद्र भी स्थापित किए गए हैं, ताकि स्थानीय मान्यताओं पर आधारित आध्यात्मिक साधना के लिए सर्मिपत स्थान उपलब्ध हो सकें। मुख्यमंत्री ने कहा, ह्लयह केवल संस्कृति की बात नहीं है, बल्कि यह हमारे अस्तित्व और हमारी पहचान की बात है। यह सुनिश्चित करने की बात है कि हम अपने जड़ों को न भूलें।

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