जब तक आतंकवादी घुसपैठ करते रहेंगे, मारे जाते रहेंगे: फारूक अब्दुल्ला

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Wed, 30 Oct 2024 09:11 PM
जब तक आतंकवादी घुसपैठ करते रहेंगे, मारे जाते रहेंगे: फारूक अब्दुल्ला

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जम्मू. नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने बुधवार को यहां कहा कि जब तक आतंकवादी देश में घुसपैठ करते रहेंगे, मुठभेड़ में मारे जाते रहेंगे. अब्दुल्ला ने यहां संवाददाताओं से कहा, ”मुठभेड़ होती रहेंगी. आतंकवादी आते रहेंगे और हम उन्हें मार गिराते रहेंगे.” वह अखनूर में हाल में एक मुठभेड़ में तीन आतंकवादियों की मौत के बारे में पूछे गए सवाल का जवाब दे रहे थे.

क्या इस बार जम्मू कश्मीर में ‘दरबार मूव’ होगा या नहीं, इसके जवाब में अब्दुल्ला ने कहा, ”दरबार निश्चित रूप से होगा.” इस प्रथा के तहत जम्मू कश्मीर प्रशासन हर साल र्सिदयों में श्रीनगर के बजाय जम्मू से संचालित होता है जो केंद्रशासित प्रदेश की ग्रीष्मकालीन राजधानी है.

जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री ने सभी लोगों से दिवाली मनाने और जम्मू कश्मीर की जनता के लिए देवी लक्ष्मी से आशीर्वाद मांगने की अपील की. उन्होंने कहा, ”सभी को दिवाली मनानी चाहिए. यह एक बड़ा त्योहार है. देवी लक्ष्मी यहां लोगों को समृद्धि दें, क्योंकि इस क्षेत्र में धन की कमी है. आज यहां अधिकतर दुकानें खाली हैं.”

सेना ने अखनूर में मुठभेड़ में मारे गए कुत्ते की बहादुरी को सलाम किया

भारतीय सेना ने यहां अखनूर सेक्टर में आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में मारे गए अपने खोजी कुत्ते फैंटम के शव पर पुष्पचक्र अर्पित किया और उसकी बहादुरी और बलिदान को सलाम किया. अधिकारियों ने बताया कि सोमवार को जम्मू कश्मीर के अखनूर सेक्टर में जवाबी कार्रवाई के दौरान मारे गए चार वर्षीय बेल्जियन मेलिनोइस कुत्ते ने आतंकवादियों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी. कुत्ते को सोमवार को एक आतंकवादी हमले से सैनिकों की रक्षा करने के प्रयास में गोली लग गई थी. कुत्ते को बुधवार को उधमपुर में सेना के जवानों ने अंतिम विदाई दी. उसके शव को तिरंगे में लपेटा गया था और पुष्पचक्र चढ़ाा गया.

व्हाइट नाइट कोर ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”28 अक्टूबर को अखनूर के बट्टल के घने जंगलों में सर्वोच्च बलिदान देने वाले सेना के कुत्ते फैंटम को पुष्पांजलि अर्पित करने के लिए आज उधमपुर में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया. उसके बलिदान को कभी भुलाया नहीं जाएगा.” रक्षा पीआरओ ने कहा, ”फैंटम की बहादुरी ने लोगों की जान बचाई और अभियान की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उसके बलिदान को सम्मान के साथ याद किया जाएगा.”

मई 2020 में जन्मे इस कुत्ते को अगस्त 2022 में इस क्षेत्र में तैनात किया गया था और यह कई अहम अभियानों का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा. उसे भारतीय सेना के रिमाउंट वेटनरी कोर (आरवीसी) केंद्र में प्रशिक्षित किया गया था. सोमवार सुबह से अखनूर सेक्टर के बट्टल क्षेत्र में जारी और दो दिनों तक चली मुठभेड़ में भारी हथियारों से लैस तीन आतंकवादी मारे गए.

जम्मू-कश्मीर के अखनूर में मुठभेड़ में मारे गए आतंकवादी जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े थे

जम्मू क्षेत्र के अखनूर सेक्टर में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में मारे गए तीन आतंकवादी प्रतिबंधित संगठन जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) समूह के सदस्य थे और उन्होंने हाल में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) से इस क्षेत्र में घुसपैठ की थी. अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी.

अधिकारियों के मुताबिक आतंकवादी एक बड़े हमले की योजना बना रहे थे, तथा अखनूर मार्ग का इस्तेमाल कर रहे थे, जिसका इस्तेमाल पारंपरिक रूप से प्रतिबंधित संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के आतंकवादियों द्वारा किया जाता है. खुफिया रिपोर्ट के अनुसार, आतंकवादी बट्टल क्षेत्र के माध्यम से अखनूर में घुसे थे और उनके पास से जब्त वायरलेस सेट से उनके जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े होने की पुष्टि हुई है.

अधिकारियों ने बताया कि घुसपैठ करने वाले आतंकवादियों की सामान्य रणनीति के विपरीत ये आतंकवादी कथित तौर पर एक बड़े हमले की योजना बना रहे थे. सेना की 10वीं इन्फैंट्री डिवीजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग मेजर जनरल समीर श्रीवास्तव के इस दावे के बावजूद कि इस क्षेत्र में लंबे समय से घुसपैठ नहीं हुई है, अधिकारियों ने बताया कि पिछले वर्ष दिसंबर और अप्रैल में आतंकवादी गतिविधियों की पूर्व रिपोर्ट मिली थीं.

मेजर जनरल श्रीवास्तव ने संकेत दिया था कि क्षेत्र में आतंकवादी छोटे-छोटे समूहों में सक्रिय थे और योजनाबद्ध हमले के लिए अखनूर की ओर बढ. रहे थे. यह मुठभेड़ सोमवार सुबह उस समय शुरू हुई जब बट्टल स्थित शिव मंदिर आसन में दर्शन करने गए तीन स्थानीय लड़कों का सामना लड़ाकू पोशाक पहने सशस्त्र आतंकवादियों से हो गया.

जब लड़कों ने पूछा कि क्या वे सैन्यकर्मी हैं तो आतंकवादियों ने आक्रामक प्रतिक्रिया व्यक्त की तथा लड़कों को धमकी दी कि यदि उन्होंने किसी को उनकी मौजूदगी के बारे में बताया तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने होंगे. आतंकवादियों ने लड़कों का तब तक पीछा किया जब तक वे मुख्य सड़क तक नहीं पहुंच गए. जैसे ही आतंकवादियों ने सड़क पर दो सैन्य वाहन – एक मारुति जिप्सी और एक एम्बुलेंस – देखे, उन्होंने सेना के काफिले को निशाना बनाकर गोलीबारी शुरू कर दी और मंदिर की ओर भाग गए. जवाब में, विशेष बलों और राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) के कमांडो ने तेजी से अभियान शुरू किया, जिसके परिणामस्वरूप सभी तीन आतंकवादी मारे गये.

By Yogesh Kumar Sahu