असम का विपक्ष हिंदू विधायकों को विस में बोलने से रोकता है: हिमंत

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Thu, 29 Aug 2024 09:27 PM
असम का विपक्ष हिंदू विधायकों को विस में बोलने से रोकता है: हिमंत
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गुवाहाटी. असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने बृहस्पतिवार को विपक्ष पर निशाना साधते हुए दावा किया कि उनमें ”मूलत: राज्य के निवासी हिंदू विधायकों” को विधानसभा में अपनी बात नहीं रखने देने की प्रवृत्ति विकसित हो गई है. असम भूमि एवं राजस्व विनियमन (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2024 पर चर्चा के दौरान, शर्मा ने अपनी पार्टी के विधायक भुवन पेगू के भाषण को बाधित करने के लिए भी विपक्षी सदस्यों की कड़ी आलोचना की.

शर्मा ने पेगू का बचाव करते हुए कहा, “मूलत: राज्य के निवासी हिंदू विधायकों को सदन में नहीं बोलने देने की एक नयी प्रवृत्ति उत्पन्न हो गई है. यह एक खतरनाक प्रवृत्ति है. कृपया इतने आक्रामक न हों. हमारी जमीन के बाद अब विधानसभा पर कब्जा करने की कोशिश न करें.” पेगू तत्कालीन पूर्वी बंगाल से असम में लोगों के कथित प्रवासन और आक्रामकता के बारे में पुराने विधानसभा रिकॉर्ड का उल्लेख करते हुए एक बयान दे रहे थे.

मुख्यमंत्री ने कहा, “आप हिंदू-मुस्लिम मुद्दों पर बात करना बंद नहीं कर सकते. ये जीवन की कठोर वास्तविकताएं हैं. यहां तक ??कि जनगणना भी हमें अपना धर्म लिखने के लिए कहती है.” विधानसभा द्वारा पारित विधेयक के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह असमिया समुदाय की लड़ाई के बारे में है, जो “विलुप्त होने वाला है”, कुछ और वर्षों तक अस्तित्व में होगा. शर्मा ने कहा, “धुबरी, गोलपारा, बारपेटा, दरांग, नागांव, मोरीगांव में हमारी जमीन चली गई है. अब, हम बचे रहने के लिए संघर्ष कर रहे हैं.” इस बयान का विरोध करते हुए कांग्रेस विधायक ने सदन से बहिर्गमन किया.

मोरीगांव में महिला शिक्षकों को ‘मियां मुस्लिमों’ ने किया आतंकित: असम विस में भाजपा विधायक ने कहा

असम विधानसभा में बृहस्पतिवार को उस समय हंगामे की स्थिति बन गई जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक रमाकांत देवरी ने आरोप लगाया कि ‘बांग्लादेशी मियां मुस्लिमों’ ने मोरीगांव जिले में महिला स्कूली शिक्षकों का उत्पीड़न किया. इसके बाद सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी.

विधानसभा अध्यक्ष बिश्बजीत दैमारी ने प्रश्नकाल में देवरी को शिक्षा मंत्री रनोज पेगू से एक पूरक प्रश्न पूछने की अनुमति दी.
देवरी ने कहा, ”मोरीगांव में महिला शिक्षक बांग्लादेशी मियां मुस्लिमों से आतंकित हैं.” इस पर विपक्षी विधायकों की कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई जिन्होंने आरोप लगाया कि सदन में जानबूझकर यह प्रश्न उठाया गया. देवरी ने हंगामा कर रहे विपक्षी सदस्यों की ओर उंगली उठाते हुए कहा, ”शांत हो जाइए, मुझे बोलने दीजिए.” एआईयूडीएफ विधायक अमीनुल इस्लाम ने सत्तारूढ़ विधायक की भाषा शैली पर आपत्ति जताई.

विधानसभा अध्यक्ष ने बार-बार देवरी से मुद्दे पर बात करने और विवादास्पद मुद्दे उठाने के बजाय सीधे पूरक प्रश्न पूछने को कहा.
उन्होंने भाजपा विधायक से कहा, ”आप सीधे प्रश्न क्यों नहीं पूछते? आप इधर-उधर की बातें क्यों कर रहे हैं?” उधर देवरी के समर्थन में भाजपा विधायकों ने कहा कि विपक्षी विधायक एक आदिवासी सदस्य को बोलने नहीं दे रहे. दोनों पक्षों के शोर-शराबा करने पर दैमारी ने सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित कर दी. कार्यवाही पुन: शुरू हुई तो देवरी ने फिर से आरोप लगाया कि जिले के संवेदनशील क्षेत्रों में पहले शिक्षकों को कथित तौर पर गोवंश का मांस खाने के लिए विवश किया गया था. नेता प्रतिपक्ष देबब्रत सैकिया ने कहा, ”किसी को तथ्यों के बिना कोई बात नहीं कहनी चाहिए. अगर ऐसा कुछ हुआ है तो कार्रवाई होनी चाहिए.”

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