
नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूत प्रदर्शन किया है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के मुताबिक, भारत की वास्तविक GDP दूसरी तिमाही में 7.8 फीसदी की दर से बढ़ी। यह आंकड़ा IMF के कर्मचारियों और अन्य पर्यवेक्षकों के अनुमान से बेहतर रहा।
IMF की प्रवक्ता जूली कोजैक के अनुसार, भारत की आर्थिक वृद्धि को मुख्य रूप से सेवा क्षेत्र और निर्यात में उम्मीद से बेहतर गतिविधियों का समर्थन मिला। यह प्रदर्शन ऐसे समय में सामने आया है जब दुनिया के कई हिस्सों में ऊर्जा की बढ़ती कीमतें आर्थिक गतिविधियों पर दबाव डाल रही हैं।
7.8 फीसदी GDP वृद्धि ने चौंकाया
भारत की वास्तविक GDP में दूसरी तिमाही के दौरान 7.8 फीसदी की वृद्धि हुई। IMF के मुताबिक यह उसके कर्मचारियों के अनुमान के साथ-साथ अन्य पर्यवेक्षकों की उम्मीद से भी अधिक है।
आर्थिक वृद्धि का यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इस दौरान वैश्विक अर्थव्यवस्था को ऊर्जा कीमतों से जुड़े दबाव का सामना करना पड़ रहा है। भारत ने इसके बावजूद अपनी आर्थिक गति को बनाए रखा है।
सेवा क्षेत्र और निर्यात बने अर्थव्यवस्था का सहारा
IMF ने भारत की बेहतर आर्थिक वृद्धि के पीछे सेवा क्षेत्र और निर्यात को प्रमुख कारण बताया है। इन दोनों क्षेत्रों में गतिविधियां अनुमान से मजबूत रहीं, जिससे दूसरी तिमाही की आर्थिक वृद्धि को गति मिली।
सेवा क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन और निर्यात से जुड़ी मजबूत गतिविधियां इस बात का संकेत देती हैं कि बाहरी आर्थिक दबावों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था में मजबूती बनी हुई है।
महंगे तेल से भारत पर बढ़ सकता है दबाव
हालांकि IMF भारत की मौजूदा आर्थिक स्थिति को लेकर सकारात्मक है, लेकिन बढ़ती तेल कीमतों को लेकर उसने सावधानी भी जताई है।
तेल और ऊर्जा की कीमतों में वृद्धि का असर उन देशों पर अधिक पड़ता है जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर हैं। इससे भुगतान संतुलन और राजकोषीय स्थिति पर दबाव बढ़ सकता है। IMF फिलहाल भारत पर बढ़ी हुई ऊर्जा कीमतों के प्रभाव की निगरानी कर रहा है।
ऊर्जा कीमतों के झटके के बावजूद भारत मजबूत
IMF का कहना है कि भारत में ऊर्जा कीमतों का झटका ऐसे समय आया है जब देश की अर्थव्यवस्था पहले की तुलना में अधिक मजबूत स्थिति में है। अब तक उपलब्ध प्रदर्शन को देखते हुए भारत ने बढ़ी हुई ऊर्जा कीमतों का सामना काफी मजबूती से किया है।
हालांकि, यदि लंबे समय तक तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो इसका असर महंगाई, आयात लागत और आर्थिक गतिविधियों पर पड़ सकता है। वैश्विक स्तर पर ऊर्जा कीमतों में लंबे समय तक बढ़ोतरी आर्थिक वृद्धि के लिए भी जोखिम पैदा कर सकती है।
अक्टूबर में आएगा IMF का नया अनुमान
भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर IMF का अगला महत्वपूर्ण अपडेट अक्टूबर में आने की उम्मीद है। जूली कोजैक के अनुसार, IMF अक्टूबर में भारत के लिए अपने नए आर्थिक अनुमान जारी करेगा।
फिलहाल IMF बढ़ी हुई तेल कीमतों के भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव पर नजर रख रहा है। मौजूदा प्रदर्शन के आधार पर संगठन ने भारत को ऊर्जा कीमतों के झटके के प्रति अपेक्षाकृत मजबूत बताया है।
ईरान युद्ध और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव
ऊर्जा बाजार में मौजूदा अस्थिरता का संबंध पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से भी जोड़ा जा रहा है। ईरान युद्ध के बाद तेल और गैस की आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य में संभावित व्यवधान ने ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ाया है।
ऊंची ऊर्जा कीमतों के लंबे समय तक बने रहने से वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ने और आर्थिक वृद्धि प्रभावित होने का जोखिम है। ऐसे माहौल में भारत का 7.8 फीसदी की GDP वृद्धि दर्ज करना विशेष महत्व रखता है।
भारत के लिए आगे क्या चुनौती?
भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि सकारात्मक संकेत है, लेकिन आने वाले समय में तेल की कीमतें एक महत्वपूर्ण चुनौती बनी रह सकती हैं। ऊर्जा आयात की लागत बढ़ने से देश के बाहरी खाते और सरकारी वित्त पर दबाव पड़ सकता है।
ऐसे में भारत की आर्थिक मजबूती बनाए रखने के लिए निर्यात, सेवा क्षेत्र और घरेलू आर्थिक गतिविधियों की गति महत्वपूर्ण होगी। IMF का अक्टूबर में आने वाला नया अनुमान यह स्पष्ट करने में मदद करेगा कि वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत की विकास दर को लेकर उसका आकलन किस दिशा में बदलता है।
निष्कर्ष:
भारत ने वैश्विक ऊर्जा संकट और बढ़ती तेल कीमतों के बीच दूसरी तिमाही में 7.8 फीसदी की वास्तविक GDP वृद्धि दर्ज कर उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है। IMF ने सेवा क्षेत्र और निर्यात को इस मजबूती का प्रमुख आधार बताया है। हालांकि, महंगे तेल से जुड़े जोखिमों पर नजर रखना जरूरी है। अक्टूबर में IMF का नया आर्थिक अनुमान भारत की आगे की विकास संभावनाओं को लेकर महत्वपूर्ण संकेत दे सकता है।
डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोत में दी गई IMF संबंधी जानकारी पर आधारित है। आर्थिक परिस्थितियां तेजी से बदल सकती हैं।



